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UP LS Polls 2024: आखिर कहां फंसी हैं बसपा की आधी से ज्यादा सीटें? BJP वाला दांव लगाने की तैयारी में मायावती!

Tue, 09 Apr 2024 06:53 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 09 Apr 2024 06:53 PM IST
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सार
बहुजन समाज पार्टी ने अब तक उत्तर प्रदेश में 38 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जबकि बाकी सीटों पर अभी भी मायावती ने पत्ते नहीं खोले हैं।
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Uttar Pradesh Lok Sabha Polls BSP Mayawati Election 2024 BJP competition SP Congress news and updates
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग की तारीख नजदीक आती जा रही है। ज्यादातर सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने अभी भी आधे से ज्यादा सीटों पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जबकि एन मौके पर टिकट देने वाली भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बहुजन समाज पार्टी को पीछे छोड़ते हुए सबसे पहले सबसे ज्यादा टिकट घोषित कर दिए। बसपा के अब तक आधे से ज्यादा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के पीछे कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कहा जा रहा है कि मायावती भी इस बार दूसरे दलों में पांच बरस तक मेहनत करने वाले प्रत्याशियों पर दांव लगाने की तैयारी में हैं। 


अभी तक 38 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए
बहुजन समाज पार्टी ने अब तक उत्तर प्रदेश में 38 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जबकि बाकी सीटों पर अभी भी मायावती ने पत्ते नहीं खोले हैं। बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दरअसल मायावती ने पहले से लोकसभा प्रभारियों के साथ-साथ जोनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारियां भी अपने कैडर के लोगों को दे दी थीं। इनमें ही लोकसभा के प्रत्याशियों का चयन होकर घोषणा होनी थी। लेकिन इसे लेकर पार्टी के भीतर ही कई तरह की असमंजस वाली स्थितियां पैदा हो गईं। पार्टी से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक अलग-अलग सीटों पर कुछ नाम मायावती के पास पहुंचे। जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। कुछ नामों पर सहमति भी बनी, लेकिन पार्टी के भीतर और कैडर के लोगों में स्वीकार्यता नहीं हो पा रही थी। यही वजह थी कि मायावती ने उन सीटों को फिलहाल फाइनल नहीं किया है।




आकाश आनंद की भी अहम भूमिका
बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रत्याशियों के चयन में मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद की भी बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि आकाश आनंद सीटों के मामले में तो कोई दखल नहीं दे रहे हैं, लेकिन मायावती अपने उत्तराधिकारी आकाश आनंद को सीटों के बंटवारे वाले फैसले में अपने साथ रख रही हैं। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जोनल कोऑर्डिनेटर रहे बाबूलाल चौधरी कहते हैं कि मायावती हमेशा से अपने प्रत्याशियों के चयन में हर बात का बहुत बारीकी से अध्ययन करती रही हैं। क्योंकि इस बार आकाश आनंद की भूमिका बहुत बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यह माना जा सकता है कि सभी सीटों पर जमकर स्क्रीनिंग हो रही है। इसके अलावा सियासी तौर पर उन सभी गुणा गणित का भी आकलन किया जाता है,  जो जिताऊ प्रत्याशी के लिए आवश्यक है।

दूसरे दलों के जिताऊ प्रत्याशियों पर दांव लगाने की तैयारी 
वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि यह जरूर है कि मायावती ने इस बार अपने प्रत्याशियों की घोषणा में देरी जरूर की है। लेकिन वह किसी और सियासी दांव की जुगत में भी लगी हैं, ऐसा सियासी गलियारों में कहा जा रहा है। उनका मानना है कि यह सियासी दांव बिल्कुल भारतीय जनता पार्टी जैसा भी हो सकता है। जैसे भारतीय जनता पार्टी जिताऊ प्रत्याशी पर भरोसा करती है, भले ही वह किसी भी पार्टी से हो। उसे टिकट देकर चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी उतारती है। इस बार बहुजन समाज पार्टी भी कुछ इसी तरह का सियासी दांव लगाने की जुगत में है। वह कहते हैं कि सियासी गलियारों में कहा यही जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी में कई ऐसे राजनीतिक दलों के नेता भी टिकट पाने में लगे हैं, जिनको उनकी पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया। 

बहुजन समाज पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं जिस तरह से मायावती ने सभी जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट दिए हैं, उसमें अगर भाजपा, सपा या कांग्रेस का जिताऊ नेता उनकी पार्टी से संपर्क करता है, तो मायवती उसे टिकट देने का विचार कर सकती हैं। हालांकि यह पूरा फैसला बसपा सुप्रीमो मायावती पर ही निर्भर करता है। लेकिन उनका कहना है कि इन पार्टियों के कई नेता बसपा के संपर्क में हैं। लेकिन अब बची हुई आधी सीटों पर पार्टी उन्हें टिकट देती है या नहीं, यह तो टिकट घोषित होने के साथ ही पता चलेगा। लेकिन पार्टी जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए जिताऊ प्रत्याशियों पर दांव लग रही है।
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