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Rajya Sabha Poll: उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल राज्यसभा चुनाव में कैसे हैं समीकरण, कहां किसका पलड़ा भारी?

Mon, 26 Feb 2024 07:43 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 26 Feb 2024 07:43 PM IST
सार

Rajya Sabha Elections: 27 फरवरी को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक तीन राज्यों के विधायक राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए मतदान करेंगे। शाम पांच बजे से वोटो की गिनती शुरू होगी। उम्मीद की जा सकती है कि 27 फरवरी देर रात तक सभी नतीजे आ जाएं।

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Uttar Pradesh, Karnataka and Himachal Rajya Sabha Elections and number game
राज्यसभा चुनाव 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

तीन राज्यों की 15 राज्यसभा सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान होना है। इनमें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसी तरह कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। हिमाचल प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। 12 राज्यों से 41 उम्मीदवार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी तक शामिल हैं।  
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उत्तर प्रदेश का गणित 
मौजूदा चुनाव में सबसे ज्यादा 10 सीटें उत्तर प्रदेश में खाली हो रही हैं। इन 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें नौ भाजपा के हैं। इनके अलावा सपा की जया बच्चन का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। जया को सपा ने फिर से टिकट दिया है। जया के अलावा सपा ने रामजीलाल सुमन और आलोक रंजन को भी उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा की ओर से आरपीएन सिंह, चौधरी तेजवीर सिंह, अमरपाल मौर्य, संगीता बलवंत, सुधांशु त्रिवेदी, साधना सिंह, नवीन जैन और संजय सेठ मैदान में हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा 403 सदस्यीय है। वर्तमान में चार सीटें खाली होने से कुल 399 विधायक मतदान में हिस्सा ले सकते हैं। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी। सपा के पास 108 विधायक हैं। पार्टी दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। जबकि तीसरे उम्मीदार को जिताने के लिए तीन प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के दो विधायक भी समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, पल्लवी पटेल जैसे विधायकों की बगावत का सामना कर रही पार्टी के लिए परेशानी बढ़ सकती है। 

वहीं, भाजपा और उसके सहयोगियों के पास सात सदस्यों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्याबल है। राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल ने भाजपा उम्मीदवारों को वोट करने का एलान किया है। इसे मिलाकर आठवें उम्मीदवार के लिए भाजपा और सहयोगियों के पास प्रथम वरीयता के 29 वोट ही हैं। ऐसे में आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए प्रथम वरीयता के आठ वोट कम हैं।  वहींं, बसपा के एक सदस्य किसे वोट करेंगे यह अब तक साफ नहींं है। 
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हिमाचल प्रदेश की लड़ाई
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नड्डा इस बार गुजरात से निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। हिमाचल में इस वक्त कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया है। सिंघवी के सामने भाजपा ने हर्ष महाजन को उतारा है। हर्ष कांग्रेस से ही भाजपा में आए हैं। जीत के 35 प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं। सरकार को तीन निर्दलियों का भी समर्थन है। ऐसे में संख्याबल में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।      

इस बीच, भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन ने दावा किया है कि पार्टी लाइन से परे विधायकों के साथ उनके संबंध हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कांग्रेस सदस्य अंतरात्मा की आवाज से वोट देंगे। उधर कांग्रेस ने भाजपा के दावे को खारिज किया है। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी एकजुट है और उसका उम्मीदवार जीतेगा।
 
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कर्नाटक की सियासत
कांग्रेस के तीन और भाजपा के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें कांग्रेस के डॉ. एल. हनुमंथैया, सैयद नासिर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं। इस बार यहां कांग्रेस ने अजय माकन, सैयद नासिर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा और जेडीएस गठबंधन ने नारायणा कृष्णासा भांडगे और कुपेंद्र रेड्डी को टिकट दिया है। चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में होने से यहां चुनाव हैं। 

224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 135 विधायक हैं। भाजपा के 66 और जेडीएस के 19 विधायक हैं। अन्य विधायकों की संख्या चार है। चार सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए एक सदस्य को जीतने के लिए 45 प्राथमिक वोट की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस अपने तीनों उम्मीदवारों को जिता सकती है। वहीं, भाजपा-जेडीएस गठबंधन को अपने दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पांच अतरिक्त वोट की जरूरत है। चार अन्य विधायक अगर भाजपा जेडीएस गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट करते हैं तो केवल एक वोट के इधर से उधर होने पर मामला पलट सकता है। 

इस बीच क्रॉस वोटिंग की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं। कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को राज्यसभा की वोटिंग तक एक होटल में रखने का फैसला किया है। इससे पहले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा था कि हमारे विधायकों ने हमें उन प्रस्तावों के बारे में बताया है जो उन्हें मिल रहे हैं। हम जानते हैं कि भाजपा और जेडीएस क्या योजना बना रहे हैं। हमारी अपनी रणनीति है। हालांकि, भाजपा ने कांग्रेस के दावों का खंडन किया है।

राज्यसभा सदस्यों का चुनाव कौन करता है?
राज्यसभा में किस राज्य से कितने सांसद होंगे यह उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय होता है। राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। चूंकि राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है।

चुनाव नतीजों का ये फॉर्मूला क्या है? 
जिस राज्य की राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हो रहे हैं, उस राज्य के विधायक इसमें वोट डालते हैं। इन चुनाव में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह वोट नहीं पड़ते। यहां विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट डालना होता है। 

विधायकों को चुनाव आयोग की ओर से एक विशेष पेन दी जाती है। उसी पेन से उम्मीदवारों के आगे वोटर को नंबर लिखने होते हैं। एक नंबर उसे सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे डालना होता है। ऐसे दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के आगे दो लिखना होता है। इसी तरह विधायक चाहे तो सभी उम्मीदावारों को वरीयता क्रम दे सकता है। अगर आयोग द्वारा दी गई विशेष पेन का इस्तेमाल नहीं होता तो वह वोट अमान्य हो जाता है। इसके बाद विधानसभा के विधायकों की संख्या और राज्यसभा के लिए खाली सीटों के आधार पर जीत के लिए आवश्यक वोट तय होते हैं। जो उम्मीदवार उस आवश्यक संख्या से अधिक वोट पाता है वह विजयी घोषित होता है। 
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