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भर्तृहरि महताब के दावों पर कांग्रेस का पलटवार: मनीष तिवारी बोले- यूपीआई शुल्क पर विपक्ष के समर्थन का दावा झूठा

Fri, 18 Sep 2026 06:04 PM IST
अमन तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 18 Sep 2026 06:04 PM IST
सार

यूपीआई शुल्क को लेकर कांग्रेस और भाजपा सांसद भतृहरि महताब के बीच विवाद बढ़ गया है। महताब ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर का समर्थन किया था। जबकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे गलत और भ्रामक बताते हुए खारिज किया।

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UPI MDR Row Congress Rejects Bhartruhari Mahtab’s Claim of Opposition Support
मनीष तिवारी, कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा सांसद भतृहरि महताब के बयानों पर हमला बोला है। महताब वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने दावा किया था कि विपक्षी सांसदों ने यूपीआई पर शुल्क लगाने का समर्थन किया था। कांग्रेस ने उनके इस बयान को पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने समिति अध्यक्ष के दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पर सहमति का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। यह कहना बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है कि विरोध न करके विपक्ष ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
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भाजपा सांसद भतृहरि महताब ने मीडिया में एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि विपक्षी सांसदों की मौजूदगी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। उनके अनुसार तीन विपक्षी सांसद चर्चा का हिस्सा थे। इनमें तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय शामिल थे। इसके अलावा कांग्रेस के मनीष तिवारी और प्रमोद तिवारी भी मौजूद थे। महताब ने कहा कि इन्हीं चर्चाओं में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाने की सिफारिश हुई थी।
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मनीष तिवारी ने इस पर सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने 12 मार्च 2026 की बैठक का ब्योरा दिया। उस दिन समिति ने वित्तीय सेवा विभाग की अनुदान मांगों की समीक्षा की थी। समिति ने कहा था कि टियर 3 से 6 वाले शहरों में डिजिटल भुगतान बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए तीन साल की योजना और कैशबैक की जरूरत है। साथ ही विभाग को एक आत्मनिर्भर और स्तरीय मॉडल की संभावना तलाशनी चाहिए। तिवारी ने कहा कि यहां मुख्य शब्द सिर्फ संभावना तलाशना था, न कि शुल्क लगाना।
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तिवारी ने 12 अगस्त को लोकसभा में रखी गई 32वीं रिपोर्ट का भी हवाला दिया। यह सरकार की 'एक्शन टेकन' रिपोर्ट थी। इस रिपोर्ट में खुद सरकार ने माना था कि विभाग दो विकल्पों की 'तलाश कर रहा है'। पहला विकल्प बड़े लेन-देन पर शुल्क बहाल करने की संभावना देखना था। दूसरा विकल्प सरकारी मदद को धीरे-धीरे खत्म करना था। तिवारी ने साफ किया कि इसके बाद यूपीआई पर नया शुल्क लगाने का प्रस्ताव समिति के सामने कभी नहीं आया।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर महताब पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि महताब एक अनुभवी सांसद रहे हैं। लेकिन अब वह भाजपा के '2024 ओडिशा कैडर' बन चुके हैं। इसी कारण वह गलत जानकारी फैलाने के लिए उतावले दिख रहे हैं। महताब 2024 के आम चुनाव से ठीक पहले बीजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

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इससे पहले सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था। उन्होंने कहा था कि संसदीय समिति ने ही यूपीआई ढांचे को तुरंत लागू करने पर जोर दिया था। अधिकारी ने कहा कि 12 अगस्त को रिपोर्ट स्वीकार करते समय कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे। इनमें पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ शामिल थे। बैठक के मिनट्स में किसी ने भी विरोध दर्ज नहीं कराया था।

सरकार ने राहुल गांधी के बयानों पर भी सवाल खड़े किए थे। राहुल गांधी व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाले शुल्क का लगातार विरोध कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने गुरुवार को ही सरकार के इन दावों को खारिज कर दिया था। कांग्रेस ने कहा कि 'यूपीआई टैक्स' के फैसले से जनता में भारी नाराजगी है। मोदी सरकार जनता के इस गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मनगढ़ंत बहाने बना रही है।
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