Uttar Pradesh: क्या खत्म हो गई अब यूपी से आजम खान की सियासत! अब कौन संभालेगा सियासी विरासत?
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विस्तार
क्या उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले आजम खान की सियासत खत्म हो गई है। आजम खान के बेटे और स्वार सीट से विधायक रहे अब्दुल्ला आजम की सदस्यता रद्द होने की वजह से यह अब यह सवाल उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में है। दरअसल न तो आजम खान और अब तो सदस्यता जाने के बाद अब्दुल्ला आजम चुनाव लड़ने के योग्य बचे हैं। इसलिए सबसे ज्यादा चर्चा यही हो रही है कि क्या आजम खान की सियासत उत्तर प्रदेश में खत्म हो गई है। अगर कुछ गुंजाइश भी है तो फिर आजम खान का परिवार आने वाले सियासी दिनों में किस पर दांव लगाने वाला है।
पत्नी तंजीम फातिमा की तबियत खराब
कभी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां की तूती बोलती थी। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले आजम खान अब न तो विधायक और सांसद हैं और न ही चुनाव लड़ने से लेकर वोट देने के हकदार। उनके बेटे और स्वार विधानसभा सीट से 2022 में विधायक चुने गए अब्दुल्ला आजम की सदस्यता चली गई और विधानसभा सीट खाली हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी तंवर कहते हैं कि इस हालात में अब सवाल यही उठता है कि आजम खान की सियासी पारी को अब आगे कौन बढ़ाएगा। क्योंकि पिता और पुत्र जो सियासत में मजबूती से खड़े हुए थे वह अब चुनाव लड़ने योग्य ही नहीं बचे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनकी पत्नी तंजीम फातिमा की सेहत भी नासाज़ चल रही है। आजम खान के परिवार में सक्रिय रूप से उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला, आजम खा की पत्नी तंजीम फातिमा और वह खुद सबसे ज्यादा सक्रिय थे। लेकिन आज के हालातों में फिलहाल आजम खान के परिवार से सियासत को आगे बढ़ाने के लिए कोई भी मजबूत सदस्य सियासत के मैदान में नहीं नहीं है।
तंवर कहते हैं कि आजम खान के पास अब अपनी सियासत की पारी को आगे बढ़ाने के लिए एक विकल्प या तो खुद अपनी पत्नी तंजीम फातिमा को सियासत के मैदान में उतारकर राजनीतिक सफर की दावेदारी को आगे बढ़ाएं या फिर किसी बाहरी व्यक्ति पर दांव लगाएं। सियासत के जानकारों का कहना है कि आजम खा ने बाहरी व्यक्तियों पर दो बार दांव लगाया, लेकिन राजनीतिक रूप से वह दांव सही नहीं रहा। दरअसल आजम खान के परिवार में उनके एक बेटे और बहू और भी हैं। हालांकि वह सियासी रूप से फिलहाल उतने मजबूत नहीं हैं। लेकिन सियासी जानकारों का कहना है कि अगर आजम खान को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखनी है या सियासत में बने रहना है तो उन्हें या तो अपनी पत्नी को आगे करना होगा या फिर अपने दूसरे बेटे और बहू को सियासत में आगे बढ़ाना मजबूरी होगा।
छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक
राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध सिंह कहते हैं कि फिलहाल जिस तरीके से आजम खान के सितारे गर्दिश में नजर आ रहे हैं उससे तो यह उम्मीद नहीं दिखती है कि आजम खान या उनका परिवार हाल फिलहाल तुरंत सियासत में बड़े दमखम के साथ खड़ा हो पाएगा। क्योंकि आजम खान पर भी छह साल के लिए चुनाव लड़ने का प्रतिबंध है। और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पर भी सोमवार को सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप सिद्ध होने के साथ सजा सुनाई गई और उसी के साथ उनकी सदस्यता चली गई। छह साल तक अब्दुल्ला आजम के भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई। उत्तर प्रदेश के सियासी जानकारों का मानना है कि अब इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी का रोल बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
सियासी जानकार अब सवाल यह उठाते हैं कि अब जब न आजम खान एमपी एमएलए हैं और न ही उनका बेटा एमएलए है। तो क्या समाजवादी पार्टी आजम खान का उसी मजबूती के साथ सहयोग करेगी या नहीं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी पार्टी दोनों के साथ खड़ी हुई है। लेकिन आजम खान के करीबी ही पार्टी के इस तरह से खड़े होने पर सवाल उठा रहे हैं। आजम खान के करीबियों का कहना है अगर समाजवादी पार्टी उनके साथ खड़ी है, तो फिर वह उसी मजबूती के साथ दिखनी भी चाहिए। लेकिन अभी तक जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं दिखा है। राजनीतिक जानकारो की मानें तो आजम खान और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच जो रिश्ते हैं, उससे फिलहाल इसकी संभावना कम नजर आ रही है कि आजम खान की लड़ाई समाजवादी पार्टी एक बड़े फ्रंट पर जाकर लड़ेगी। ऐसा जब आजम खान जेल में थे तब भी नहीं हुआ था। इसको लेकर आजम खान की नाराजगी खुलकर के सामने भी आई थी।