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राष्ट्रपति शासन हटाने को किया विशेषाधिकार का इस्तेमाल
Sun, 24 Nov 2019 03:55 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 24 Nov 2019 03:55 AM IST
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महाराष्ट्र की राजनीति
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चुनावी नतीजों के बाद करीब एक महीने तक महाराष्ट्र में बनी ऊहपोह की स्थिति 23 नवंबर को खत्म हो गई। इस एक महीने के दौरान राज्य के सभी बड़े दलों को सरकार बनाने का न्यौता दिया गया लेकिन कोई भी सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नतीजों के 18 दिन बाद तक सरकार गठन न होता देख राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दी थी।
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शनिवार 23 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुबह 5.45 बजे महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाने संबंधी अधिसूचना पर हस्ताक्षर किया। इसके तुरंत बाद 5.47 पर गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने अधिसूचना पर डीजिटल सिगनेचर कर उसे सार्वजनिक कर दिया।
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खास बात है कि इस मामले में सरकार ने ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रुल 1961 के रुल संख्या 12 का इस्तेमाल किया। इसके तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए कैबिनेट के मंजूरी की जरुरत नहीं। इस नियम के आधार पर राष्ट्रपति ने बिना कैबिनेट मंजूरी के इस फैसले पर हस्ताक्षर कर दिया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हस्ताक्षरित राजपत्र के अनुसार, ‘संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार, मैं भारत का राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, मेरे द्वारा 12 नवंबर 2019 को महाराष्ट्र राज्य के संबंध में की गई घोषणा को निरस्त करता हूं, जो 23 नवंबर 2019 से प्रभावी है।’
12 नवंबर को जब राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाया था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाकर इसे मंजूरी दी थी। इसके तुरंत बाद पीएम ब्रिक्स सम्मेलन के लिए ब्राजिल रवाना हो गए थे। उस दिन राष्ट्रपति कोविंद पंजाब में थे। उन्होंने वहां से करीब 5.30 बजे शाम दिल्ली पहुंच कर अधिसूचना पर हस्ताक्षर किया था।