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मानवाधिकार उल्लंघन: 'मणिपुर पर अमेरिकी रिपोर्ट पूर्वाग्रही'; विदेश मंत्रालय ने खंडन कर कहा- इसे महत्व न दें
Thu, 25 Apr 2024 06:01 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 25 Apr 2024 06:01 PM IST
सार
मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी अमेरिकी रिपोर्ट को भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। मणिपुर की घटनाओं के अलावा राहुल गांधी के खिलाफ गुजरात की अदालत में दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए इस रिपोर्ट में कई आपत्तिजनक बातों का जिक्र किया गया है। इस पर एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि रिपोर्ट अमेरिका का पूर्वाग्रह भरा रवैया उजागर करती है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत में मानवाधिकार उल्लंघन के कथित मामलों को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट पूर्वाग्रह से ग्रसित है। विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट भारत की सही तस्वीर पेश नहीं करती और वास्तविकता से कोसों दूर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत ऐसी रिपोर्ट को महत्व नहीं देता, जिसमें भारत की सटीक तस्वीर पेश नहीं की गई हो। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में इसका कोई महत्व नहीं है। उन्होंने मीडिया से भी इस रिपोर्ट को महत्व न देने का आग्रह किया।
बेहद पक्षपातपूर्ण है रिपोर्ट, भारत को बारे में खराब समझ; इसे महत्व देना जरूरी नहीं
बता दें कि अमेरिकी रिपोर्ट में मणिपुर में मई, 2023 में हुए जातीय संघर्ष के बाद मणिपुर में कथित मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं का जिक्र किया गया है। इससे जुड़े एक सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, यह रिपोर्ट बेहद पक्षपातपूर्ण है और भारत के बारे में खराब समझ को दिखाती है।
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मणिपुर की घटनाओं का जिक्र, विदेश विभाग ने पीएम मोदी के बयान का जिक्र किया
गौरतलब है कि भारतीय समयानुसार सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात जारी एक रिपोर्ट में भारत के प्रति अपने पूर्वाग्रह वाले रवैये को जारी रखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी सालाना मानवाधिकार रिपोर्ट जारी की। इसमें मणिपुर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया। विदेश विभाग ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मणिपुर की घटनाओं को शर्मनाक बताया है और मामले में कदम उठाने की बात कही है।
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जारी की रिपोर्ट
अमेरिकी कांग्रेस से स्वीकृत इस रिपोर्ट में राहुल गांधी को गुजरात के एक कोर्ट से दो साल की सजा, ब्रिटेन के मीडिया समूह बीबीसी पर भारत में आयकर छापों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की ओर से जारी रिपोर्ट में 2023 में कुछ सकारात्मक घटनाओं को भी जगह दी गई है। इनमें कश्मीर में मार्च में शिया मुस्लिमों को प्रदर्शन की अनुमति देना शामिल है।
गाजा के मानवीय संकट पर अमेरिकी संस्थाओं में आक्रोश; भारत की करीबी नजर
अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है। हालांकि, जिम्मेदारी की भावना और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच सही संतुलन होना बहुत जरूरी है। बता दें कि पश्चिम एशिया के गाजा में इस्राइली सेना के हमले के मद्देनजर पैदा हुए मानवीय संकट के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। कोलंबिया के अलावा येल और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे विरोध प्रदर्शन देखे गए। इनके बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा, सरकार ने इन घटनाओं से जुड़ी खबरें देखी हैं। भारत का मानना है कि हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था के बीच सही संतुलन होना चाहिए।
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बेहद पक्षपातपूर्ण है रिपोर्ट, भारत को बारे में खराब समझ; इसे महत्व देना जरूरी नहीं
बता दें कि अमेरिकी रिपोर्ट में मणिपुर में मई, 2023 में हुए जातीय संघर्ष के बाद मणिपुर में कथित मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं का जिक्र किया गया है। इससे जुड़े एक सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा, यह रिपोर्ट बेहद पक्षपातपूर्ण है और भारत के बारे में खराब समझ को दिखाती है।
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#WATCH | On the US State Department report on Human Rights, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "This report is deeply biased and reflects a poor understanding of India. We attach no value to it and urge you to do the same." pic.twitter.com/4XIHgnoswP
— ANI (@ANI) April 25, 2024
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मणिपुर की घटनाओं का जिक्र, विदेश विभाग ने पीएम मोदी के बयान का जिक्र किया
गौरतलब है कि भारतीय समयानुसार सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात जारी एक रिपोर्ट में भारत के प्रति अपने पूर्वाग्रह वाले रवैये को जारी रखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी सालाना मानवाधिकार रिपोर्ट जारी की। इसमें मणिपुर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया। विदेश विभाग ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मणिपुर की घटनाओं को शर्मनाक बताया है और मामले में कदम उठाने की बात कही है।
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जारी की रिपोर्ट
अमेरिकी कांग्रेस से स्वीकृत इस रिपोर्ट में राहुल गांधी को गुजरात के एक कोर्ट से दो साल की सजा, ब्रिटेन के मीडिया समूह बीबीसी पर भारत में आयकर छापों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की ओर से जारी रिपोर्ट में 2023 में कुछ सकारात्मक घटनाओं को भी जगह दी गई है। इनमें कश्मीर में मार्च में शिया मुस्लिमों को प्रदर्शन की अनुमति देना शामिल है।
#WATCH | On protests at Columbia University and other Universities in the US, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "We have seen reports on the matter and have been following related events. In every democracy, there has to be the right balance between freedom of expression,… pic.twitter.com/15ycFpQ6vl
— ANI (@ANI) April 25, 2024
गाजा के मानवीय संकट पर अमेरिकी संस्थाओं में आक्रोश; भारत की करीबी नजर
अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है। हालांकि, जिम्मेदारी की भावना और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच सही संतुलन होना बहुत जरूरी है। बता दें कि पश्चिम एशिया के गाजा में इस्राइली सेना के हमले के मद्देनजर पैदा हुए मानवीय संकट के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। कोलंबिया के अलावा येल और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय समेत दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे विरोध प्रदर्शन देखे गए। इनके बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा, सरकार ने इन घटनाओं से जुड़ी खबरें देखी हैं। भारत का मानना है कि हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था के बीच सही संतुलन होना चाहिए।