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US-India: ट्रंप-2 में दोस्त मोदी को कौन सा रिटर्न गिफ्ट देंगे अमेरिकी राष्ट्रपति?

Tue, 28 Jan 2025 09:36 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 28 Jan 2025 09:36 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर कूटनीति में माहिर हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा(पूर्व विदेश सचिव) स्मार्ट कूटनीतिक पारी के लिए जाने जाते हैं। समझा जा रहा है कि टीम एस. जयशंकर इस समय भू-राजनीतिक चुनौतियों को गहराई से समझ रही है।

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US India: What return gift will US President trump give to his friend Modi
भारत अमेरिका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को टैरिफ किंग कहकर चिढ़ाते हैं। ट्रेड सरप्लस का मुद्दा हमेशा उठाते रहते हैं। इस मुद्दे को लेकर ट्रंप ने भारत, चीन, ब्राजील को सख्त संदेश दे दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि मित्र मोदी से वाशिंगटन में बधाई स्वीकार करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप उन्हें कौन सा रिटर्न गिफ्ट देकर नई दिल्ली भेंजेंगे।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर कूटनीति में माहिर हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा(पूर्व विदेश सचिव) स्मार्ट कूटनीतिक पारी के लिए जाने जाते हैं। समझा जा रहा है कि टीम एस. जयशंकर इस समय भू-राजनीतिक चुनौतियों को गहराई से समझ रही है। इस टीम को पता है कि अमेरिका से अब दूरी बनाकर नहीं रखा जा सकता। इसलिए अमेरिका को साधने की हर संभव कोशिश जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में गए विदेश मंत्री अपने अमेरिकी समकक्ष मर्को रुबियों से मिलकर लौटे थे। दोनों नेताओं में कुछ अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में अमेरिका में रह रहे 17-18 हजार अवैध भारतीयों को लेकर भी चर्चा हुई है। जयशंकर इस पर अपने रुख से अमेरिका को अवगत कराकर लौटे हैं।
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कब जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फरवरी के दूसरे सप्ताह में अमरिका जा सकते हैं। राष्ट्रति ट्रंप खुद इस बारे में मडिया से चर्चा के दौरान खुलासा कर चुके हैं। ट्रंप ने इस दौरान पत्रकारों से प्रधानमंत्री से फोन पर हुई बातचीत के अंश को भी बताया। हालांकि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बारे में अभी कुछ कहने से बच रहे हैं। समझा जा रहा है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह में प्रधानमंत्री परिस जाएंगे। वहां आर्टीफशियल इंटेलीजेंस पर वश्विक सम्मेलन हो रहा है। पेरिस से प्रधानमंत्री अमरिका जा सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से भी साफ है कि दोनों देशों के बीच में इस यात्रा पर चर्चा हो रही है। कूटनतिक प्रयास जारी है।  
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किन मुद्दों का है दबाव?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत का बाजार चाहिए। भारत के सामने अमेरिका की शर्त मानने में कई दुविधाएं हैं। ट्रंप जब भारत को टैरिफ किंग कहकर चिढ़ाते हैं तो इसके पीछे उनका उद्देश्या असंतुलित आयात और निर्यात पर है। ट्रंप कहते हैं कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर अधिक कर लगाता है और भारत के उत्पाद अमेरिका में बिना ड्यूटी के बिक रहे हैं। भारत अधिक मुनाफा ले जा रहा है। वह भारत पर ट्रेड सरप्लस का तंज भी इसी को लेकर कसते हैं। माना जाता है कि राष्ट्रपति जिस तरह के तेवर दिखा रहे हैं, उसमें वह भारत पर अमेरिकी सामान पर ड्यूटी कम करने और भारतीय उत्पादों पर कुछ ड्यूटी लगाने का दबाव बना सकते हैं। वह भारत से 17-18 हजार अपने अवैध प्रवासियों को ले जाने के लिए कह सकते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि भारत रूस के साथ अपने कारोबार को घटाए। अमेरिका से तेल का आयात और रक्षा सौदों को बढ़ाए। अमेरिका में रह चुके भारत के एक राजदूत का भी कहना है कि ट्रंप-2 चुनौतियां काफी हैं। भारत के पास इस समय बाइडेन प्रशासन के दौर वाला विकल्प भी सीमित है। दूसरे, भारत ऐसे मोड़ पर है, जहां अमेरिका, रूस, चीन से संतुलित रिश्ते रखने का बड़ा दबाव है। सूत्र का कहना है कि भारत और रूस के बीच में रिश्ते के मजबूत आधार ने भी वातावरण में तड़का लगाया है। इसलिए भारत और अमेरिका के बीच में 2025 में रिश्तों की बुनियाद को मजबूत और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए कई बड़ी चुनौतियां हैं।

समय का रूख देख भारत तैयार कर रहा है कूटनीति  की नई पिच
भारत ने चीन के साथ अपने रिश्ते को सामान्य बनाने की पहल तेज कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री चीन की यात्रा पर नए आयाम की जमीन तैयार करके आए हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच में लगातार एक समझ महसूस की जा रही है। विदेश मंत्रालय के जानकार कहते हैं कि चीन के विदेश मंत्री और एनएसए वांग यी, विदेश मंत्री एस जयशंकर  तथा एनएसए अजीत डोभाल ने एक बड़ी कूटनीतिक एक्सरसाइज के बाद बड़े गतिरोध को हल किए हैं। कुछ चीजें रह गई हैं और उस दिशा में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इसी तरह से भारत ने अमेरिका से प्रीडेटर ड्रोन के सौदे को हरी झंडी दिखाकर अपने रुख का संकेत दे दिया है। समझा जा रहा है कि भारत अमेरिका से होने वाले आयात पर ड्यूटी में भी कटौती कर सकता है। ईधन तेल, व्हिस्की आदि की खरीद को बढ़ाने का कदम उठा सकता है।


क्या अमेरिका की नाराजगी मोल ले सकता है भारत?
वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय बहुत बड़ी चुनौती से गुजर रही है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति ने उदारवाद को पीछे छोड़कर आर्थिक संरक्षणवाद के रास्ते को अपना लिया है। वे अवैध प्रवासियों को लेकर भी संवेदनशील हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन वाले दौर से काम नहीं चलने वाला है। इसका एक बड़ा कारण है कि अमेरिका रूस के साथ संतुलित रिश्ते के रास्ते पर बढ़ने का संकेत दे रहा है। चीन के साथ उसके रिश्ते करवट ले रहे हैं। डब्ल्यूएचओ और पेरिस के जलवायु समझौते से ट्रंप बाहर आने की घोषणा कर चुके हैं। दूसरी तरफ अमेरिका की अर्थव्यवस्था का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। आकार में भी भारत की अर्थव्यवस्था जहां साढ़े तीन खरब डालर की है, वहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था  इससे सात गुना अधिक है।
 
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