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बिना इजाजत खादी कैलेंडर पर लगाई PM की तस्वीर, PMO ने मांगा जवाब

Mon, 16 Jan 2017 01:08 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 16 Jan 2017 01:08 PM IST
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‘upset’ PMO has sought an explanation from MMSME on PM modi's Pic on Khadi calendar
- फोटो : ANI

खादी ग्रामोद्योग के जरिए अपने नव वर्ष के कैलेंडर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बजाय चरखा चलाते हुए पीएम मोदी की तस्वीर छापने से सियासी बवाल मचा हुआ है। विपक्ष ने खादी के इस कदम की घोर निंदा करते हुए पीएम पर गांधी को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था।

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हालांकि सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक बापू की तस्वीर की जगह पीएम मोदी की तस्वीर बिना पीएम से पूछकर लगाई गई थी। अब खबर है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ पीएम मोदी कड़ा एक्शन ले सकते हैं। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) से जवाब मांगा है। खबर के मुताबिक पीएम मोदी खादी के इस कदम से सख्त नाराज हैं। 
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इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक नाम नहीं छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि बिना इजाजत सरकारी या प्राइवेट एंटिटी की तरफ से 'प्रधानमंत्री को खुश करने या उनके करीब दिखने के लिए ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।’अधिकारी ने कहा कि इससे पहले टेलीकॉम कंपनी जियो और पेटीएम के विज्ञापन में भी प्रधानमंत्री की फोटो का बिना इजाजत इस्तेमाल हुआ था।
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पीएम मोदी की फोटो खादी के वार्षिक कलैंडर पर लगाने को लेकर छिड़े विवाद पर भाजपा सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा था कि खादी ग्रामोद्योग की डायरी और कैलेंडर के मामले को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। शर्मा ने कहा कि खादी के कैलेंडर और डायरी में सिर्फ गांधीजी की तस्वीर लगे ऐसा कोई नियम नहीं हैं, इसलिए किसी नियम का उल्लघंन नहीं हुआ हैं।

इससे पहले 1996, 2002, 2005, 2011, 2012 और 2013 में भी जो खादी ग्रामउद्योग का कैलेंडर रिलीज हुआ था उसमें भी गांधी जी की तस्वीर नहीं थी। भाजपा का कहना है कि पीएम मोदी ने खादी को बतौर ब्रांड के रूप में प्रचारित किया है। उनके जरिए खादी की ब्रांडिंग के बाद से बिक्री में अभुतपूर्व वृद्धि हुई है। जबकि यूपीए की 10 सालों की सरकार में खादी की बिक्री 2 से 7 प्रतिशत तक होती थी। 

'चरखा कातने से कोई गांधी नहीं बन जाता'

‘upset’ PMO has sought an explanation from MMSME on PM modi's Pic on Khadi calendar

इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक एनडीए सरकार द्वारा नियुक्त किए गए केवीआईसी के चीफ वी के सक्सेना ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल संस्थान के मूल आदर्शों से मेल खाता है। उन्होंने कहा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से खादी को बढ़ावा मिला है।

इसलिए उनके फोटो का इस्तेमाल हुआ। सक्सेना ने बताया कि 2015-16 में खादी की बिक्री 34 पर्सेंट बढ़ी, जबकि उससे पहले के दशक में इसमें 2-7 पर्सेंट का इजाफा हुआ था। आपको बता दें कि खादी के इस कदम के बाद हमला बोलते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि गांधी बनने के लिए जन्मों की तपस्या करनी पड़ती है।

चरखा कातने से कोई गांधी नहीं बन जाता है। बल्कि उपहास का पात्र बनता है। 

बापू पर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री की विवादित टिप्पणी

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वहीं इससे पहले विवादों बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर विवादित टिप्पणी की थी। विज ने शनिवार सुबह कहा था कि नोटों पर गांधी का फोटो लगने के बाद रुपये का मूल्य गिरता ही गया। नोटों से गांधी धीरे-धीरे हटेंगे।

गांधी से जुड़कर खादी उठ नहीं पाई। जैसे ही उनका बयान मीडिया व ट्विटर पर वायरल हुआ दोपहर होते-होते बवाल मच गया। कांग्रेस के साथ ही महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने बापू के खिलाफ अशोभनीय बयान देने पर विज को खूब लताड़ा। इसके साथ ही भाजपा ने भी विज के बयान से किनारा करते हुए गांधी को प्रेरणास्रोत बताया। 

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