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UPSC: लेटरल एंट्री को लेकर बैकफुट पर सरकार, काम कर गया विपक्ष और एनडीए सहयोगियों का दबाव
Tue, 20 Aug 2024 03:31 PM IST
बशु जैन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 20 Aug 2024 03:31 PM IST
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विपक्ष की एकजुटता से दबाव में आई सरकार।
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अमर उजाला
विस्तार
यूपीएससी में बिना परीक्षा पास किए लेटरल एंट्री के जरिए आईएएस के पद जैसे संयुक्त सचिव, निदेशक और डिप्टी सेक्रेटरी हासिल करना, अब इस स्कीम के हालिया विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है। मंगलवार को डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी चेयरमैन प्रीति सूदन को पत्र लिखकर लेटरल एंट्री के तहत 45 पदों की भर्ती के लिए निकले विज्ञापन को रद्द करने के लिए कहा है। यह आदेश प्रधानमंत्री के निर्देश पर जारी किया गया है।कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं ने लेटरल एंट्री स्कीम का विरोध किया था। ये उसी विरोध का नतीजा है कि अब सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है। केंद्र सरकार, अगर सामाजिक न्याय के दायरे को तोड़कर कोई नियुक्ति करती है तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि मोदी सरकार में सहयोगी दल जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी लेटरल एंट्री स्कीम का विरोध किया था।
बता दें कि यूपीएससी ने बिना परीक्षा पास किए विभिन्न मंत्रालयों में बतौर ज्वाइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर व डिप्टी सेक्रेटरी नियुक्त करने का विज्ञापन जारी किया था। इसे लेटरल एंट्री नोटिफिकेशन का नाम दिया गया। लेटरल एंट्री के माध्यम से सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी भी आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने इंटरनेशनल/मल्टी नेशनल कंपनी वालों के लिए भी आईएएस बनने की राह खोल दी थी। जैसे ही यह विज्ञापन निकला तो विपक्षी दलों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, मोदी सरकार की यह योजना, आरक्षण छीनकर संविधान को बदलने का भाजपाई चक्रव्यूह है। खरगे ने दावा किया कि एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के पद अब आरएसएस के लोगों को मिलेंगे। मोदी सरकार का यह कदम, संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी है। सरकारी महकमों में नौकरियां भरने की बजाय पिछले 10 सालों में अकेले पीएसयू में ही भारत सरकार के हिस्सों को बेच-बेचकर 5.1 लाख पद, भाजपा ने खत्म कर दिए हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, इस दौरान कैजुअल और कॉन्ट्रैक्ट भर्ती में 91 फीसदी का इजाफा हुआ है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 2022-23 तक 1.3 लाख पद कम हुए हैं।
इसके बाद यह मुद्दा गर्माता चला गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लेटरल स्कीम के जरिए मोदी सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा, प्रशासनिक सुधार आयोग, दलित, ओबीसी और आदिवासियों पर हमला है। भाजपा का रामराज्य का विकृत संस्करण संविधान को नष्ट करने और बहुजनों से आरक्षण छीनने का प्रयास है। नरेंद्र मोदी, संघ लोक सेवा आयोग की जगह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जरिए लोकसेवकों की भर्ती कर संविधान पर हमला कर रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के जरिए भर्ती कर खुलेआम एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का आरक्षण छीना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, सीधी भर्ती को लेकर पहला प्रयास यूपीए सरकार ने ही किया था। प्रशासनिक सुधा आयोग को 2005 में यूपीए सरकार में ही विकसित किया गया था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने प्रशासनिक सुधार आयोग की अध्यक्षता की थी। 'प्रशासनिक सुधा आयोग' को भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था।
सोशल मीडिया पर भी लेटरल एंट्री का मुद्दा ट्रेंड होने लगा था। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस योजना को संविधान और आरक्षण के साथ छेड़छाड़ से जोड़ दिया। उस वक्त तक भी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया था। इस बीच एनडीए के सहयोगी दल 'लोक जनशक्ति पार्टी' (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री, चिराग पासवान भी लेटरल एंट्री स्कीम के मामले में सरकार की खिलाफत पर उतर गए। उन्होंने कहा, हमारी पार्टी लेटरल एंट्री से भर्ती करने के पक्ष में नहीं है। यह फैसला बहुत गलत है। जहां भी नियुक्तियां होती हैं, वहां आरक्षण के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। वे सरकार के समक्ष इस मामले को उठाएंगे। मोदी सरकार में शामिल जेडीयू ने भी इस भर्ती योजना का विरोध कर दिया।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा, हमारी पार्टी शुरू से ही केंद्र सरकार से आरक्षित सीटों को भरने की बात कहती आई है। जेडीयू, राम मनोहर लोहिया को मानती है। जब लोगों को सदियों से समाज में पिछड़ेपन का सामना करना पड़ा तो आप मेरिट क्यों ढूंढ रहे हैं। त्यागी ने कहा, केंद्र सरकार ऐसे फैसलों के जरिए विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा दे रही है।
लेटरल एंट्री स्कीम को लेकर चौतरफा घिरती जा रही मोदी सरकार ने आखिरकार इस योजना को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, एक बार फिर संविधान की जीत हुई है। लेटरल एंट्री मतलब सीधी भर्ती के फैसले पर रोक लगी है। राहुल गांधी समेत, समूचे विपक्ष के पुरजोर विरोध ने सरकार को फैसला वापस लेने पर मजबूर किया है। सामाजिक न्याय और आरक्षण पर किसी भी तरह का हमला हम नहीं होने देंगे। पीएम मोदी, बेकार का क्रेडिट लेने की जरा सी भी कोशिश मत कीजिए। दलितों आदिवासियों, पिछड़ों के ख़िलाफ़ यह पूरी साजिश जो अब बेनकाब हो गई है, वो आपकी नाक के नीचे रची गई। श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, तरस आ रहा है मोदी जी के मंत्री, सांसदों, प्रवक्ताओं, ट्रोल भक्तों और मीडिया के चरणचुंबक, जो इसको कल तक कूद कूद कर इस भर्ती योजना को सही ठहरा रहे थे, बेचारे निरुत्तर हैं अब। सच है, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।