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अरुणाचल में 11,200 मेगावाट प्रोजेक्ट पर बवाल: विरोध से थमी रफ्तार, चीन के सामने क्यों है ये अभेद्य दीवार?
Mon, 02 Nov 2026 01:47 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, ईटानगर
पीटीआई, ईटानगर
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 02 Nov 2026 01:47 PM IST
सार
अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध में तीन जिलों में 36 घंटे का बंद बुलाया गया। स्थानीय संगठनों को गांवों के डूबने, विस्थापन, खेती और जंगलों के नुकसान की आशंका है। वहीं, केंद्र सरकार के लिए यह परियोजना चीन के मुकाबले रणनीतिक रूप से अहम है।
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अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों में 36 घंटे का बंद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में सोमवार को जनजीवन प्रभावित रहा। एक प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में कई संगठनों की ओर से बुलाए गए 36 घंटे के बंद के चलते जिले में कई स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे।
कितने देर बंद का किया आह्वान?
प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर टायर जलाए, जबकि जिले में बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद रहे। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम और सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन ने सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 36 घंटे के बंद का आह्वान किया।
अधिकारी ने क्या बताया?
अपर सियांग के डिप्टी कमिश्नर अशोक ताजो ने पीटीआई को बताया, 'कई सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद हैं। दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद हैं। बंद का असर मुख्य रूप से यिंगकियोंग कस्बे और गेकू में देखने को मिल रहा है।' सियांग के पुलिस अधीक्षक कामदाम सिखोम ने कहा कि जिले में बंद का कोई असर नहीं है, क्योंकि सभी सरकारी कार्यालय, दुकानें और स्कूल सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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संगठनों की क्या मांग है?
इन संगठनों ने अपनी मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में यह बंद बुलाया था। उनकी मांगों में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई, सुरक्षा बलों की वापसी और सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (एक विशाल जलविद्युत परियोजना) के लिए चल रहे सर्वे कार्यों को रोकना शामिल है।
भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माने जाने वाले इस प्रोजेक्ट का, स्थानीय 'आदि' समुदाय के कुछ वर्गों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा है। खासकर प्रस्तावित प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले इलाकों के निवासियों।
स्थानीय लोग क्यों कर रहे विरोध?
यह विरोध मुख्य रूप से इस डर से है कि इससे उनके पुश्तैनी गांव डूब सकते हैं, लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है, कृषि भूमि और जंगल नष्ट हो सकते हैं, और समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली पर बुरा असर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
केंद्र सरकार के लिए भी यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार इसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के संदर्भ में अहम मानती है; यही नदी भारत में प्रवेश करने पर 'सियांग' कहलाती है।
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कितने देर बंद का किया आह्वान?
प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर टायर जलाए, जबकि जिले में बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद रहे। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम और सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन ने सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 36 घंटे के बंद का आह्वान किया।
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अधिकारी ने क्या बताया?
अपर सियांग के डिप्टी कमिश्नर अशोक ताजो ने पीटीआई को बताया, 'कई सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद हैं। दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद हैं। बंद का असर मुख्य रूप से यिंगकियोंग कस्बे और गेकू में देखने को मिल रहा है।' सियांग के पुलिस अधीक्षक कामदाम सिखोम ने कहा कि जिले में बंद का कोई असर नहीं है, क्योंकि सभी सरकारी कार्यालय, दुकानें और स्कूल सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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संगठनों की क्या मांग है?
इन संगठनों ने अपनी मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में यह बंद बुलाया था। उनकी मांगों में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई, सुरक्षा बलों की वापसी और सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (एक विशाल जलविद्युत परियोजना) के लिए चल रहे सर्वे कार्यों को रोकना शामिल है।
भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माने जाने वाले इस प्रोजेक्ट का, स्थानीय 'आदि' समुदाय के कुछ वर्गों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा है। खासकर प्रस्तावित प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले इलाकों के निवासियों।
स्थानीय लोग क्यों कर रहे विरोध?
यह विरोध मुख्य रूप से इस डर से है कि इससे उनके पुश्तैनी गांव डूब सकते हैं, लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है, कृषि भूमि और जंगल नष्ट हो सकते हैं, और समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली पर बुरा असर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
केंद्र सरकार के लिए भी यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार इसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के संदर्भ में अहम मानती है; यही नदी भारत में प्रवेश करने पर 'सियांग' कहलाती है।