Odisha: ओडिशा विधानसभा में 'सेक्सटॉर्शन' मामले पर हंगामा, विपक्ष ने मांगा सीएम का इस्तीफा
दोनों विपक्षी दलों कांग्रेस और भाजपा ने अलग-अलग नैतिक आधार पर पटनायक के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी दलों का कहना है कि सीएम ने इस आरोप का कोई जवाब नहीं दिया कि उनके कई विधायक और मंत्री के कथित महिला ब्लैकमेलर अर्चना नाग के साथ घनिष्ठ संबंध थे।
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ओडिशा विधानसभा में शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन मंगलवार को भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने कथित 'सेक्सटॉर्शन' मामले में चुप्पी साधे रहने के लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के इस्तीफे की मांग की। इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने उस समय उठाया, जब मृत पूर्व सदस्यों के सम्मान में आधे दिन कार्यवाही स्थगित रहने के बाद सदन दोपहर में फिर से शुरू हुआ।
दोनों विपक्षी दलों कांग्रेस और भाजपा ने अलग-अलग नैतिक आधार पर पटनायक के इस्तीफे की मांग की क्योंकि उन्होंने इस आरोप का जवाब नहीं दिया कि उनके कई विधायक और मंत्री के कथित महिला ब्लैकमेलर अर्चना नाग के साथ घनिष्ठ संबंध थे। अर्चना नाग को 'सेक्सटॉर्शन' के जरिए अमीर और प्रभावशाली लोगों को ब्लैकमेल करने के आरोप में अक्तूबर में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
अर्चना नाग और उसके पति जगबंधु चंद को ओडिशा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके करीबी सहयोगी खगेश्वर पात्रा को गिरफ्तार किया और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने के बाद कई लोगों से पूछताछ की।
नरसिंह मिश्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दंपति को गिरफ्तार करने के बाद जांच को आगे नहीं बढ़ाया, लेकिन ईडी ने उनके सहयोगी को पकड़ा और इस सिलसिले में कई लोगों से पूछताछ भी की। दंपति ने कथित तौर पर 2018 से 2022 तक केवल चार वर्षों की अवधि के दौरान लगभग 30 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी। मिश्रा ने कहा कि ईडी की जांच सही रास्ते पर है। केंद्रीय एजेंसी ने उन लोगों से पूछताछ की और उन्हें गिरफ्तार किया, जिन्हें पहले ओडिशा पुलिस ने बख्श दिया था। इससे साबित होता है कि पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की, क्योंकि गृह मंत्रालय भी मुख्यमंत्री के पास है।
कांग्रेस नेता ने सदन के बाहर बताया कि कहा जा रहा है कि ईडी ने गिरफ्तार व्यक्तियों से सेक्सटॉर्शन गिरोह के बारे में बहुमूल्य जानकारी जुटाई है। कालेधन को लेकर बनी एसआईटी ने भी एक रिपोर्ट मांगी है और आयकर विभाग को भी इस मामले की जांच करने के लिए कहा गया है। लेकिन मुख्यमंत्री पूरे प्रकरण पर मूक दर्शक बने हुए हैं। मिश्रा ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह गिरोह में शामिल लोगों को बचाना चाहते हैं, क्योंकि पुलिस भी उचित जांच नहीं कर रही है।
विपक्ष के मुख्य सचेतक और भाजपा नेता मोहन माझी ने भी पटनायक के इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कई वरिष्ठ नेता ब्लैकमेलिंग रैकेट से जुड़े हुए हैं। माझी ने कहा कि मुख्यमंत्री की चुप्पी इस मामले में बीजद नेताओं की संलिप्तता की ओर इशारा कर रही है। इसलिए, मुख्यमंत्री को बिना किसी देरी के अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मांझी ने विधानसभा अध्यक्ष से मुख्यमंत्री को इस रैकेट में पुलिस और सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों की भूमिका के बारे में सदन को सूचित करने की मांग की।
इस बीच ईडी के वकील गोपाल अग्रवाल ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अर्चना नाग और उनके पति जगबंधु चंद की उपस्थिति की मांग करते हुए यहां जिला न्यायाधीश अदालत के समक्ष एक पेशी याचिका दायर की है। इससे पहले ईडी ने व्यवसायी और ढेंकानाल के विधायक सुधीर सामल के भाई गंगाधर सामल से भी पूछताछ की। गंगाधर सामल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अर्चना नाग को 30 लाख रुपये का भुगतान किया था।