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UPI के 10 साल पूरे: नकद की टेंशन खत्म, मोबाइल में बैंक; QR ने बदली पेमेंट की तस्वीर, पीएम मोदी ने पूछा अनुभव
Tue, 25 Aug 2026 11:29 AM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:29 AM IST
सार
UPI के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के डिजिटल भुगतान सफर का बड़ा मोड़ बताया। 25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए शुरू हुआ UPI आज लेनदेन की संख्या और रकम के मामले में कई हजार गुना बढ़ चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जबकि कुल लेनदेन मूल्य करीब 314 लाख करोड़ रुपये रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के 10 साल पूरे होने पर इसे भारत के डिजिटल भुगतान के सफर में एक बड़ा मोड़ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए UPI का इस्तेमाल करने वाले लोगों से अपने अनुभव साझा करने की अपील की और पूछा कि इस डिजिटल भुगतान प्रणाली ने उनकी जिंदगी को किस तरह आसान बनाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले शुरू हुआ UPI आज जिस स्तर तक पहुंच चुका है, उसकी व्यापकता और पहुंच हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।
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25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए शुरू हुआ UPI
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में 25 अगस्त 2016 को लॉन्च किया था। हालांकि, इससे पहले अप्रैल 2016 में 21 सदस्य बैंकों के साथ इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका था। अगस्त 2016 में इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया। उस समय UPI से जुड़े बैंकों ने अपने UPI-सक्षम मोबाइल एप्लिकेशन गूगल प्ले स्टोर पर जारी किए थे। इसके कुछ महीने बाद दिसंबर 2016 में BHIM ऐप लॉन्च किया गया, जिसने आम लोगों के बीच UPI आधारित भुगतान को और आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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10 साल में लेनदेन का आंकड़ा 13 हजार गुना बढ़ा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, UPI के जरिए होने वाले सालाना लेनदेन में पिछले एक दशक के दौरान जबरदस्त वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए महज 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। यह संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। यानी एक दशक के भीतर लेनदेन की संख्या में करीब 13,000 गुना की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि UPI किस तेजी से भारत में रोजमर्रा के भुगतान का अहम हिस्सा बन गया है।
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लेनदेन की रकम भी 4 हजार गुना से ज्यादा बढ़ी
UPI के जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या के साथ-साथ उनके कुल मूल्य में भी भारी उछाल आया है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के माध्यम से करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह रकम बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस तरह एक दशक में UPI के जरिए होने वाले लेनदेन के कुल मूल्य में 4,000 गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, डिजिटल भुगतान की यह व्यवस्था अब देश की आर्थिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन चुकी है।
11 देशों तक पहुंचा भारत का UPI
भारत में लोकप्रिय होने के बाद UPI की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। वर्तमान में 11 देशों में UPI को स्वीकार किया जाता है। ग्रीस और मालदीव भारत के रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म को अपनाने वाले सबसे नए देशों में शामिल हैं। UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल की वैश्विक स्वीकार्यता को भी दर्शाता है। इससे विदेशों में भारतीय यात्रियों के लिए भुगतान करना आसान होने के साथ-साथ भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को दूसरे देशों तक पहुंचाने का रास्ता भी खुला है।
एक ऐप से कई बैंक खातों का संचालन
UPI एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता किसी भागीदार बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के एक ही मोबाइल ऐप से कई बैंक खातों को संचालित कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अलग-अलग बैंक खातों और भुगतान सेवाओं के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो जाती है। UPI एक ही प्लेटफॉर्म पर कई बैंकिंग सेवाओं, फंड ट्रांसफर और व्यापारियों को भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराता है। यही वजह है कि यह तकनीक भारत में डिजिटल भुगतान को तेज, सरल और सुविधाजनक बनाने में अहम साबित हुई है।
सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एन्क्रिप्शन
UPI में डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित रखने के लिए कई सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन सुरक्षा उपायों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों और भुगतान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना तथा अनधिकृत लेनदेन के जोखिम को कम करना है। इसके चलते डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
ग्राहकों के लिए भुगतान शुल्क नहीं, व्यापारियों पर MDR
UPI के विस्तार के साथ सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (PSS Act) में भी बदलाव किए। इसके तहत व्यापारियों के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े शुल्क का प्रावधान किया गया, जबकि भुगतान करने वाले ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं रखा गया। इस व्यवस्था ने UPI को आम लोगों के लिए आकर्षक बनाए रखने में मदद की। ग्राहकों के लिए बिना अतिरिक्त शुल्क के तत्काल भुगतान की सुविधा ने छोटे-बड़े कारोबारों में डिजिटल लेनदेन को तेजी से बढ़ावा दिया।
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UPI ने बदली भारत के भुगतान की तस्वीर
10 साल के सफर में UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की पहचान बन चुका है। शुरुआत में सीमित संख्या में बैंकों के साथ शुरू हुई यह व्यवस्था आज करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के भुगतान का हिस्सा है। किराने की दुकान पर छोटे भुगतान से लेकर बड़े कारोबारी लेनदेन तक, UPI ने भुगतान के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी बदलाव को रेखांकित करते हुए लोगों से UPI के साथ अपने अनुभव साझा करने को कहा है। एक दशक में लेनदेन की संख्या, रकम और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता में हुई तेज वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल अब घरेलू सीमाओं से आगे वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है।