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UP SIR: यूपी में कटे 2.89 करोड़ मतदाता, एसआईआर से किसे होगा फायदा, किसे नुकसान

Tue, 06 Jan 2026 07:22 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 06 Jan 2026 07:22 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में एसआईआर की रिपोर्ट जारी हो गई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट गए हैं। कटे हुए नामों पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। 

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UP SIR 2.89 crore voters removed from the electoral roll in Uttar Pradesh
उत्तर प्रदेश का एसआईआर डाटा जारी - फोटो : डीडी न्यूज

विस्तार

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश का एसआईआर डाटा जारी कर दिया है। प्राथमिक रूप से जारी किए गए आंकड़ों में यूपी के करीब 18 प्रतिशत मतदाताओं (2.89 करोड़) का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है। मोटे तौर पर प्रदेश का हर पांचवां मतदाता इस बार सूची से बाहर हो गया है। विधानसभा चुनावों में हजार-पांच सौ वोटों के अंतर से भी अनेक सीटों पर हार-जीत के परिणाम तय होते हैं। लेकिन एसआईआर आंकड़ों में हर विधानसभा से औसतन 70-71 हजार वोट काटे गए हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। 

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विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सभी सियासी दल इन आंकड़ों के जारी होने के बाद अपनी जीत-हार को लेकर गुणा-भाग करने में जुट गए हैं। सभी दल यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एसआईआर के बाद नए समीकरणों में यह किसके लिए लाभ और किसके लिए नुकसान का सौदा साबित होगा।  

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एसआईआर को लेकर अपनी नाराजगी पहले ही जाहिर कर चुके हैं। भाजपाई खेमे में शहरी क्षेत्रों से मतदाताओं के नाम कटने को लेकर बड़ी चिंता है। भाजपा का ग्रामीण इलाकों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में प्रभाव ज्यादा रहा है, लिहाजा माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में वोट कटने से भाजपा को नुकसान हो सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी का कारण भी यही था।

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लेकिन राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि एसआईआर से किसी भी दल को एक तरफा लाभ या नुकसान नहीं होने जा रहा है। बिहार के अनुभव ने यही दिखाया है कि जिस राजनीतिक दल का जातीय समीकरण ज्यादा बेहतर होगा, और विकास के वादों के साथ जो जनता को अपने साथ ज्यादा जोड़ पाएगा, चुनाव में उसे बढ़त मिल सकती है। 

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं का नाम एक जगह से कट गया है जो यूपी में ही किसी दूसरे शहर, या देश के दूसरे हिस्सों में जाकर मतदाता बन चुके हैं। भारी संख्या में ऐसे भी मतदाता सामने आए हैं जो अपने गांव के मूलनिवास के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, कानपुर या प्रयागराज जैसे शहरी स्थानों पर भी मतदाता सूची में थे। इनमें अनेक मतदाताओं ने ग्रामीण इलाकों में ही मतदाता बने रहने को प्राथमिकता दी है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि यदि ऐसा है तो यह भाजपा को लाभ पहुंचा सकता है क्योंकि इससे उसके प्रतिबद्ध मतदाता ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर उसका ग्रामीण क्षेत्र में राजनीतिक आधार मजबूत कर सकते हैं।

सबका साथ, सबका विकास की नीयत से करते हैं काम- एसएन सिंह  

भाजपा प्रवक्ता एसएन सिंह ने अमर उजाला से कहा कि मतदाता सूची में सुधार को किसी राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के मूल मंत्र को ध्यान में रखकर काम करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र की सरकार हो या यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार सबने समाज के हर वर्गों का विकास किया है और किसी के साथ धर्म-क्षेत्र के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है। भाजपा देश के हर नागरिक, हर वोटर को अपना मानकर काम करती है। 

उन्होंने कहा कि सबको अपना मानने और सबके लिए काम करने की सोच का ही कारण है कि भाजपा को हर जाति, हर वर्ग के मतदाता का प्यार मिल रहा है। जो विपक्षी दल जनता के बीच काम नहीं करते हैं और केवल कभी संविधान और कभी एसआईआर पर भ्रम पैदा कर चुनाव जीतना चाहते हैं, उन्हें बिहार की तरह यूपी में भी हार का ही सामना करना पड़ेगा।

भाजपा नेता एसएन सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग ने एसआईआर के जरिये यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि केवल वैध भारतीय नागरिक ही चुनावों में वोट कर सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को एसआईआर पर भ्रम फैलाने की बजाय वैध मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने में सहायता करनी चाहिए।  

पीडीए का वोट जोड़ने का करेंगे काम- मो. आजम खान

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा के खेमे में इस बात की चिंता है कि 2.89 करोड़ काटे गए नामों में उसके समर्थक मतदाताओं की संख्या 80-90 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री भी इसको लेकर चिंता जता चुके हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि एसआईआर के कारण इस चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान होने जा रहा है। 

मोहम्मद आजम खान ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्गों के हर मतदाता का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का प्रयास किया है। अभी एसआईआर सूची में नाम छूटने पर अपील की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ता इस दौरान हर वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का काम करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इस बार यूपी में सपा की सरकार बननी तय है। 

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