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यूपी चुनाव: कांग्रेस-सपा में अब दिलों के गठबंधन की उच्चस्तरीय कोशिश

Mon, 30 Jan 2017 08:36 PM IST
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jan 2017 08:36 PM IST
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UP polls: Congress-SP alliance of hearts now try high-level
- फोटो : social media

उत्तरप्रदेश में भले ही कांग्रेस-सपा का गठबंधन हो गया हो, अखिलेश और राहुल साझा प्रचार अभियान भी कर आए लेकिन अब इसे दिमाग नहीं दिल का गठबंधन साबित करने की कोशिश चल रही है। टीम राहुल चाहती है कि उत्तरप्रदेश में कम से कम चार साझा जनसभाएं मुलायम और सोनिया गांधी की हों। दोनों के मुंह से अखिलेश के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश को आगे बढ़ाने की बात हो। सूत्र बताते हैं कि इसकी थीम भी यह साथ पसंद है और ये लडक़े ही हो। इसके लिए उच्च स्तर पर कोशिश जारी है।

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बताते हैं टीम अखिलेश ने भरोसा दिया है कि समय  के साथ सबकुछ ठीक हो जाएगा। सोनिया और मुलायम की साझा जनसभा होगी। मुलायम के साथ उत्तरप्रदेश में साझा प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने में कांग्रेस अध्यक्ष को कोई परेशानी नहीं है। पार्टी के प्रचार अभियान की रुपरेखा तैयार करने में जुटे प्रशांत  किशोर भी चाहते हैं कि मुलायम और सोनिया साथ आएं।
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कांग्रेसी रणनीतिकारों को भी ऐसे पल का बेसब्री से इंतजार है। राहुल गांधी की टीम के एक अहम सदस्य का कहना है कि रविवार को लखनऊ में हुए रोड-शो की सफलता काफी कुछ कह रही है। हमें उम्मीद है आने वाले समय में सबकुछ अनुकूल ही रहेगा।

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कहां है दिक्कत

UP polls: Congress-SP alliance of hearts now try high-level

मुलायम सिंह यादव सोनिया गांधी के साथ साझा प्रचार अभियान के लिए अभी तैयार नहीं हो रहे हैं।  यह बात उनके गले के  नीचे नहीं उतर पा रही है। नेताजी(मुलायम) को लग रहा है कि जिस पार्टी की नीतियों का विरोध करते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी खड़ी की, आखिर कैसे उसके साथ उत्तरप्रदेश में मंच का साझा कर लें।

उन्हें यह गठबंधन भी बिल्कुल रास नहीं आ रहा है। 2008 में परमाणु करार के मुद्दे पर यूपीए सरकार को विश्वास मत के लिए लोकसभा में समर्थन देने को भी वह अपनी सबसे बड़ी भूल बता चुके हैं। उन्हीं की पार्टी के एक राज्यसभा सांसद और खुद को मुलायमवादी कहने वाले सूत्र के अनुसार कांग्रेस का साथ मुलायम के डीएनए में ही नहीं है, लेकिन वह पुत्र प्रेम के आगे मजबूर हैं।

सोनिया -मुलायम का साथ

UP polls: Congress-SP alliance of hearts now try high-level

गठबंधन की आत्मीयता और सहजता के लिए जरूरी है। यह संदेश साझा जनसभा से आसानी से पूरे प्रदेश में फैलेगा। रणनीतिकारों का मानना है कि इससे जहां पार्टी और गठबंधन की एकजुटता सामने आएगी, वहीं भितरघातियों और बगावत करने वालों का असर कम हो जाएगा।

मुलायम को उत्तरप्रदेश में मौलाना मुलायम भी कहा जाता रहा है। इसके अलावा वह तमाम पिछड़े और अन्य पिछड़ा वर्ग में तालमेल बनाने के माहिर माने जाते हैं। ऐसे में मुलायम के गठबंधन को स्वीकारने का संदेश देने के बाद जहां वोटों के बिखराव की संभावना कम हो जाएगी, वहीं कांग्रेस-सपा गठबंधन को इसका गुणात्मक लाभ मिलना तय है।

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