UP Nikay Chunav: योगी के मंत्री बोले- अरब के इत्र में सपाई डुबकी लगा लें, तो भी उनके अपराध नहीं छिपेंगे!
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में गुरुवार को पहले चरण के निकाय चुनाव होने हैं। भाजपा ने डबल इंजन इंजन सरकार के राज में होने वाले विकास के दावों और उसकी तस्वीर को निकाय चुनावों में जमकर भुनाया है। इसके अलावा अतीक अहमद जैसे माफियाओं पर कसे जाने वाले शिकंजे और उसके अंजाम के साथ अयोध्या में बन रहे राम मंदिर, कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति जैसे मुद्दे भी उत्तर प्रदेश के बड़े-बड़े नेता जनता के बीच में लेकर पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों की कमान संभालने वाले प्रमुख जिम्मेदार नेताओं में शामिल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रभारी भी हैं और सियासी समीकरणों को साधने के लिहाज से निकाय चुनावों में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। अमर उजाला डॉट कॉम ने प्रदेश के निकाय चुनावों के परिणाम, उसके अगले चुनावों पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के अंश।
सवाल: निकाय चुनाव का पहला चरण गुरुवार को है। क्या नजर आ रहा है आपको?
जवाब: हम तो प्रदेश की जनता की नजरों से चुनाव देख रहे हैं। डबल इंजन सरकार का विकास हर ओर बोल रहा है। सभी सत्रह के सत्रह मेयर भाजपा के बनने जा रहे हैं। बाकी नगर पंचायत और नगर पालिका में भी भाजपा के ही प्रत्याशी जीतेंगे।
सवाल: निकाय चुनाव तो स्थानीय स्तर के चुनाव होते हैं। मुद्दे भी विधानसभा और लोकसभा के चुनावों से बिल्कुल भिन्न होते हैं, तो क्या इस चुनाव में भी डबल इंजन सरकार के कामकाज को सियासी मैदान में उतारा है?
जवाब: कामकाज से सियासी मैदान नहीं बनाया जाता है। जनता का भरोसा पैदा होता है उससे। जब जनता को यह अहसास होता है कि केंद्र की सरकार राज्य की सरकार उनके लिए काम कर रही है, तो वह स्थानीय चुनावों में भी उसी विकास को ध्यान में रखकर वोट देते हैं। इसके अलावा हमारी सरकार ने निकाय स्तर पर जो विकास किया है आप उसे कहीं भी देख सकते हैं। फ्लाईओवर, सड़कें, हाइवे, एक्सप्रेस-वे, सौंदर्यीकरण, बिजली, कानून व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी जरूरत है, तो सभी नगर पालिका नगर निगम और नगर पंचायतों के लोगों के लिए ही हैं।
सवाल: कानून व्यवस्था की आपने बात की, अतीक अहमद के मामले में आप क्या सोचते हैं?
जवाब: देखिए...जो हत्या हुई उसके लिए तो एक जांच कमेटी बना दी गई है। इस पूरे मामले पर वह कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। लेकिन यह जानना भी बहुत जरूरी है कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ समेत पूरे परिवार का आतंक था। बाकी जो हमने सुना है वह आपने भी सुना होगा कि योगीराज में माफियाओं पर कसे जाने वाले शिकंजे को लेकर लोग क्या राय रखते हैं। प्रदेश का हर व्यक्ति माफियाओं पर कसे जाने वाले शिकंजे से बहुत खुश हैं।
सवाल: तो आपको लगता है कि अतीक अहमद का मामला निकाय चुनावों में भाजपा के लिए फायदेमंद होने वाला है।
जवाब: फायदे और नुकसान की बात ही नहीं है। अगर एक भी आदमी किसी भी घटना के लिए यह कहता है कि यह सही है तो न सिर्फ उससे माहौल बनता है, बल्कि उसका असर भी होता है। यह असर न सिर्फ भरोसे का होता है, बल्कि उसका चुनाव में भी असर नजर आता है। हम तो उन सभी मुद्दों के साथ चुनावी मैदान में हैं, जिसका पूरे प्रदेश और देश की जनता न सिर्फ सम्मान करती है, बल्कि उसकी प्रशंसा करती है। आप देखिए, प्रदेश में हर और विकास हो रहा है। जो वादे किए जा रहे हैं वह पूरे हो रहे हैं। कानून को मानते हुए जो फैसला आया आज मंदिर भी वहीं पर बनाया जा रहा है। लोग सवाल पूछते थे कि कश्मीर में धारा 370 कब हटेगी, लेकिन हमारी सरकार ने मजबूत इरादों के साथ वह सब किया, जिसका वादा किया था।
सवाल: समाजवादी पार्टी तो आरोप लगाती है कि भाजपा ने विकास के नाम पर अपना कोई काम नहीं किया। उनका दावा है कि इस बार भाजपा एक भी सीट मेयर की नहीं जीतेगी।
जवाब: समाजवादी पार्टी सिर्फ सत्ता का सुख भोगना जानती है और वही वह चाहती भी है। लेकिन प्रदेश की जनता ने तो हर चुनाव में अपना मन बना कर दिखा दिया कि सत्ता की मलाई लूटने वालों को वह दोबारा सत्ता नहीं सौंपने वाले। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इतने अपराध किए हैं कि अगर उनका एक-एक नेता अरब के इत्र में डुबकी लगा ले, तो भी वह छुपने वाले नहीं।
सवाल: अगर सपाई में इतने ही बड़े अपराधी हैं, तो आपने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को अपने ही गृह जनपद में भाजपा में शामिल करा कर उसे प्रत्याशी क्यों बना दिया। आपने कौन से इत्र में उन्हें नहलाया कि वह पाक साफ हो गए।
जवाब: आप एक बात बताइए...अगर कोई व्यक्ति सुधरना चाहता है। वह दलदल में फंसा हुआ है और वापस आना चाहता है। तो क्या उसको मौका नहीं मिलना चाहिए। समाज में अच्छे लोगों की जरूरत है।
सवाल: सपा-बसपा इन दिनों भाजपा पर हमलावर हैं कि उनके पास ऐसे कोई मुद्दे नहीं है, जिसके दम पर वे वोट मांगे।
जवाब: देखिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के दो नेता भारतीय राजनीति के बड़े शिल्पकार रहे। माननीय मुलायम सिंह यादव और काशीराम जी ने भारतीय राजनीति में जो पहचान बनाई, उसका सभी सम्मान करते हैं। लेकिन अखिलेश यादव और मायावती जो विरासत की लीडरशिप में आगे बढ़े और खत्म होते रहे। बसपा का क्या हश्र है वह किसी से छिपा नहीं है। समाजवादी पार्टी भी थोड़े दिनों बाद पूरी तरीके से उसी अंजाम की ओर चली जाएगी, जहां बसपा है। इसलिए इन पार्टियों के आरोपों में न कोई दम है और न ही गंभीरता।
सवाल: अगले साल लोकसभा के चुनाव हैं। क्या निकाय चुनाव के परिणाम उन चुनावों को भी प्रभावित करेंगे?
जवाब: अब 2017 में हुए निकाय चुनावों के परिणाम देखिए। उसके बाद हुए अन्य चुनावों को आप देख लीजिए। भाजपा सियासत करती है विकास की। देश के प्रधानमंत्री मोदी के विजन से प्रदेश के एक-एक व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में मदद मिल रही है। आप उत्तर प्रदेश के किसी भी नगर पालिका, नगर पंचायत या नगर निगम में जाकर पुरानी सरकारों के दौर में हुए शहरों के विकास की तुलना आज करके देख लीजिए। हमारे लिए ग्राम पंचायत में पंच का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना कि लोकसभा का चुनाव। भाजपा का हर कार्यकर्ता हर चुनाव को बहुत ही शिद्दत से लड़ता है।