यूपी में छाया मोदी की उज्जवला का जादू बनी, नंबर वन
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प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाली महिलाओं को नि:शुल्क रसोई गैस -एलपीजी- कनेक्शन उपलब्ध कराने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है।
इसके तहत अभी तक 17 लाख से भी ज्यादा कनेक्शन उपलब्ध कराये जा चुके हैं, जिनमें से 9 लाख कनेक्शन उत्तर प्रदेश में है। उज्जवला योजना की घोषणा इसी साल के बजट में हुई थी और इसकी शुरूआत बीते एक मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के बलिया से की थी।
एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि इतनी कम अवधि में उज्जवला योजना के तहत 17 लाख से ज्यादा कनेक्शन उपलब्ध कराने के पीछे पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा योजना को लागू करने वाले निचले कर्मचारी से सीधे संवाद करना है।
बताया जाता है कि प्रधान खुद ही डिस्ट्रिक नोडल अधिकारी -डीएनओ- से भी फोन पर प्रगति का जायजा लेते रहते हैं। हालांकि राजनीतिक हलकों में इसे उत्तर प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव को जोड़ कर देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि गरीब परिवारों में पैठ बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी अधिक से अधिक लाभार्थियों तक इसे पहुंचाना चाहती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उज्जवला योजना के तहत 20 जुलाई 2016 तक देश भर में कुल 17.06 लाख कनेक्शन उपलब्ध कराये गए थे, जिसमें से 9.18 लाख कनेक्शन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपलब्ध कराया गया है।
इसके बाद राजस्थान का स्थान है जहां 3.85 लाख, मध्य प्रदेश में 1.76 लाख और गुजरात में 1.04 लाख कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं। बिहार में भी अब तक करीब 79 हजार कनेक्शन दिये जा चुके हैं।
इस योजना को लागू करने में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शीर्ष चार राज्यों को देखा जाए तो इसमें उत्तर प्रदेश को छोड़ कर अन्य राज्य भाजपा शासित है । उत्तर प्रदेश में भी 80 में से 73 सांसद भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के हैं।
इन सांसदों ने अपने क्षेत्र में उज्जवला योजना के तहत अधिक से अधिक कनेक्शन दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस योजना की दुनिया भर में तारीफ हो रही है। यूनिवर्सिटी आफ केलिफोर्निया बार्कले के ग्लोबल इनवायरामेंट हेल्थ विभाग में प्रोफेसर डा. किर्क आर. स्मिथ ने कहा है कि गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले परिवारों को केन्द्र सरकार की तरफ से नि:शुल्क रसोई गैस -एलपीजी- गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना उनके स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर को ऊपर उठाने में ऐतिहासिक साबित होगा।
उनके मुताबिक जिन परिवारों को लक्ष्य कर यह योजना शुरू की गई है, वह परिवार आज भी गोबर के उपले और लकड़ी जला कर खाना बनाते हैं। ऐसे परिवारों की संख्या करीब 70 करोड़ है, जो आज भी पारंपरिक चूल्हे में उपले और लकड़ी का उपयोग कर खाना बनाने को मजबूर हैं।
अध्ययन बताता है कि भारत में खाना पकाने के दौरान धुंआ लगने की वजह से साल में 9 लाख से भी अधिक महिलाएं काल कलवित हो जाती हैं। इन घरों में यदि एलपीजी जैसे सुरक्षित ईंधन से खाना बनाया जाता तो इन मौतों को टाला जा सकता है। जहां तक लकड़ी-उपले पर भोजन बनाने से होने वाली बीमारियों का संबंध है, इसे पांच तरह की बीमारी होती हैं, जिनसे जान जाने का काफी खतरा होता है।