फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP elections 2022: BJP fears, SP may not get the benefit of sympathy of Jats

यूपी चुनाव 2022 : भाजपा को डर, कहीं सपा को न मिल जाए जाटों की सहानुभूति का लाभ

Fri, 28 Jan 2022 05:17 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 28 Jan 2022 05:17 AM IST
सार

नाराज जाट मतदाताओं को रालोद के समर्थन तक ही सीमित रखना चाहती है पार्टी, इसलिए जयंत को साथ आने का प्रस्ताव दिया।

विज्ञापन
UP elections 2022: BJP fears, SP may not get the benefit of sympathy of Jats
jayant chaudhary - फोटो : amar ujala

विस्तार

गणतंत्र दिवस के दिन पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाट बिरादरी से जुड़े लोगों के साथ गृहमंत्री अमित शाह की बैठक की बहुत चर्चा है। इसमें भी सर्वाधिक चर्चा भाजपा की ओर से रालोद को साथ आने का दिया गया या परोक्ष प्रस्ताव है। दरअसल, भाजपा मानती है कि चुनाव से पहले चौधरी अजित सिंह की मौत के बाद जाट बिरादरी में रालोद और इसके मुखिया जयंत चौधरी के पक्ष में सहानुभूति है। रालोद ने इस बार सपा के साथ गठबंधन किया है। 

विज्ञापन


ऐसे में पार्टी को डर है कि जयंत के पक्ष में जाट बिरादरी के एक पक्ष की सहानुभूति का लाभ कहीं सपा को न मिल जाए। भाजपा इस क्षेत्र में जाट बिरादरी की सहानुभूति को रालोद तक ही सीमित रखना चाहती है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट और मुस्लिम बिरादरी के 44 फीसदी मतदाता हैं। अगर इन दोनों बिरादरी की सहानुभूति सपा-रालोद के गठबंधन के पक्ष के साथ आती है तो भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी होंगी।

विज्ञापन

ये हैं सियासी समीकरण
इस चुनाव में भाजपा, सपा, बसपा और रालोद के केंद्र में जाट बिरादरी है। इस बिरादरी के भाजपा ने 17, रालोद ने 10, सपा ने पांच और बसपा के 10 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। बीते विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर दंगे ने जाट और मुस्लिम बिरादरी के बीच दरार डाल दी थी।

इसी कारण भाजपा को इस क्षेत्र की 136 में से 109 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा इस चुनाव में भी जाट और मुसलमान के बीच बनी खाई को बनाए रखना चाहती है। भाजपा चाहती है कि पहले तो रालोद के प्रति इस बिरादरी की सहानुभूति कम की जाए। दूसरा, खुद को इस बिरादरी के असली हितरक्षक के रूप में प्रचारित किया जाए।

प्रस्ताव के क्या हैं राजनीतिक निहितार्थ
भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद किसान आंदोलन अब पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहले की तरह बड़ा मुद्दा नहीं है। हालांकि मुश्किल इस बिरादरी में रालोद के पक्ष में उपजी सहानुभूति है।

चुनाव के पूर्व चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद इस बिरादरी के एक बड़े वर्ग में रालोद के प्रति सहानुभूति है। ऐसे में भाजपा की पहली रणनीति जाट बिरादरी को सपा से दूर रखने की है। जयंत को भाजपा में आने के प्रस्ताव के जरिये पार्टी संदेश देना चाहती है कि उसकी जयंत से नहीं, बल्कि असली अदावत सपा के साथ है।

विज्ञापन

इस बार आसान नहीं  है भाजपा की राह
मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे के बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस बिरादरी का भाजपा को व्यापक सहयोग मिला। यह सिलसिला 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जारी रहा। हालांकि इस बार किसान आंदोलन, गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ना मूल्य में औसत बढ़ोतरी के कारण जाट बिरादरी के एक पक्ष में गहरी नाराजगी है।

भाजपा मतदान से पहले इस नाराजगी को खत्म करना चाहती है। इस चुनाव में भी भाजपा ने इस बिरादरी के सर्वाधिक 17 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसके जरिये पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा जाटों को राजनीतिक नेतृत्व देने के मामले में अन्य दलों से काफी आगे है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed