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बागी बने रहे अखिलेश तो बदलेंगे यूपी के समीकरण

Tue, 03 Jan 2017 02:06 AM IST
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली Updated Tue, 03 Jan 2017 02:06 AM IST
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up election equation depend on akhilesh yadav
- फोटो : amar ujala

दो फाड़ हुई समाजवादी पार्टी ने न सिर्फ खुद के लिए बल्कि विरोधी दलों के लिए भी परेशानी बढ़ा दी है। सपा विरोधी बसपा और भाजपा के नेता भी दबी जुबान स्वीकार कर रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बागी तेवर बरकरार रहे तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का न सिर्फ सियासी समीकरण बदलेगा, बल्कि उन्हें कानून व्यवस्था और विकास की जगह नए मुद्दे भी तलाशने होंगे।

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यही कारण है कि इन दोनों ही दलों की निगाहें फिलहाल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भावी रुख पर टिकी हैं। इन्हें अब भी लगता है कि सार्वजनिक तौर पर दो फाड़ हो चुकी सपा में चल रहे सियासी नाटक का पर्दा गिरना अभी बाकी है।
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गौरतलब है कि सपा की प्रतिद्वंद्वी भाजपा और सपा ने फिलहाल राज्य की लचर कानून व्यवस्था और विकास को ही अपना प्रमुख मुद्दा बना रखा है। इन्हें डर है कि अगर अखिलेश ने शिवपाल यादव और उनके गुट से पल्ला झाड़ा तो कानून व्यवस्था का मुद्दा चुनाव प्रचार से किनारे हो जाएगा।

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ऐसे बदलेंगे यूपी चुनाव के मुद्दे

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सपा के दो फाड़ हो जाने पर विरोधी दल भले ही इस पार्टी के चुनाव परिदृश्य से गायब हो जाने का दाव कर रहे हैं, मगर हकीकत यह है कि नए घटनाक्रम से ये दल असमंजस में हैं। चुनाव रणनीतिकारों की टीम से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक हालांकि सपा के कलह की तस्वीर अभी पूरी तरह से साफ नहीं है।

अगर अखिलेश ने दूसरे गुट से नाता तोड़ नई पार्टी बनाई तो लचर कानून व्यवस्था का मुद्दा कमजोर पड़ेगा। तब अखिलेश खुद साफ सुथरी राजनीति की दुहाई देंगे और इसके लिए रिश्तेदारों तक का साथ छोड़ने की बात प्रचारित करेंगे।

जहां तक विकास के मुद्दे की बात है तो अखिलेश शुरू से ही अपनी सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों का गुणगान कर रहे हैं। फिर अखिलेश की ओर से कांग्रेस, रालोद, जदयू जैसे दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की भी संभावना बन रही है। ऐसे में निश्चित रूप से सियासी समीकरण में बड़ा बदलाव होगा। बसपा को भी भय है कि अगर इस गठबंधन ने मूर्तरूप लिया तो खासतौर से मुस्लिम मतदाता बड़ा सियासी मंच देख कर अखिलेश से जुड़ सकते हैं।

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