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उत्तर प्रदेश चुनाव: पश्चिम में और कठिन हो सकती है योगी की राह, भाजपा की रणनीति से उसे ही घेरने में जुटे अखिलेश

Mon, 10 Jan 2022 06:06 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 10 Jan 2022 06:06 PM IST
सार

भाजपा नेता अमित शाह के ऊपर जाटों की नाराजगी कम करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की पैठ मजबूत बनाने की जिम्मेदारी है। शाह ने पश्चिमी यूपी के नाराज जाटों को दोबारा पार्टी से जोड़ने के लिए हरियाणा और राजस्थान के जाट नेताओं को महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वे अपनी रोटी-बेटी के पारंपरिक संबंधों के आधार पर जाटों और खाप नेताओं को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं...

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UP election 2022: On the lines of BJP, Akhilesh Yadav has started making big leaders of different communities in his side
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

छोटे दलों को साथ लेने और विपक्ष के नाराज नेताओं को अपने खेमे में लाने की रणनीति पर काम करते हुए अमित शाह ने भाजपा के लिए कई अहम चुनाव जीते हैं। इसमें लोकसभा चुनावों से लेकर उत्तर प्रदेश और असम तक के राज्य भी शामिल हैं। लेकिन इस बार उनकी इसी रणनीति पर काम करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा खेमे के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पश्चिम में आरएलडी नेता जयंत चौधरी को साथ लेकर वे ‘जाट लैंड’ पर पहले ही भाजपा की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं। अब वे पश्चिमी यूपी के दूसरे दलों के नाराज नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हैं। इससे आने वाले दिनों में पश्चिमी यूपी में सपा की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है और भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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सपा में शामिल हो सकते हैं कई नेता

सपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, भाजपा सहित कई अन्य दलों के नेता भी पार्टी के संपर्क में हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े नेता समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। इसमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के नेता शामिल हो सकते हैं। सपा नेता के मुताबिक, सपा का जोर पश्चिमी यूपी में गैर-भाजपाई वोटरों को एकजुट रखने पर है। इसके लिए विभिन्न स्थानीय नेताओं से बातचीत की जा रही है।  

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इस क्षेत्र में सपा के लिए बड़ी चुनौती मुस्लिम वोटरों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने पक्ष में मोड़ने की है। मायावती की पार्टी बसपा के साथ-साथ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी मुस्लिम वोटों की बड़ी दावेदार हैं। इनके प्रभाव को सीमित करने के लिए समाजवादी पार्टी मुस्लिम समुदाय के प्रभावी नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव पिछले दिनों कई मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर मुस्लिम समाज को अपने साथ लाने की कोशिश कर चुके हैं। अगर सपा की यह कोशिश कामयाब रही तो इससे पार्टी की पश्चिमी यूपी में संभावनाएं बेहद मजबूत हो सकती हैं, जिसके पार पाना भगवा दल के लिए आसान नहीं रहेगा।

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जाट लैंड पर वापसी को मजबूत रणनीति बना रही भाजपा

यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। भाजपा नेता अमित शाह को इस मोर्चे पर लगाया गया है। उनके ऊपर जाटों की नाराजगी कम करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की पैठ मजबूत बनाने की जिम्मेदारी है। अमित शाह ने पश्चिमी यूपी के नाराज जाटों को दोबारा पार्टी से जोड़ने के लिए हरियाणा और राजस्थान के जाट नेताओं को महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वे अपनी रोटी-बेटी के पारंपरिक संबंधों के आधार पर जाटों और खाप नेताओं को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।


जाट युवाओं के लिए सेना में नौकरी आकर्षण का बड़ा केंद्र रही है। बड़ी संख्या में यहां के युवा सेना में विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने सैनिकों का मानदेय बढ़ाकर और वर्षों से अटकी ओआरओपी योजना का लाभ देकर सैनिकों का मनोबल बढ़ाया है। इसका लाभ यहां के अनेक सैनिक परिवारों को मिल रहा है। भाजपा जाट नेताओं के साथ अपनी मुलाकातों में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।

इसके अलावा नोएडा जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ-दिल्ली हाई स्पीड रेल, जाट नेता राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय, मेडिकल सुविधाओं के विकास, मेरठ में सैनिकों के लिए विशेष सेंटर खोलने जैसी विभिन्न विकास योजनाओं के जरिए भाजपा इस क्षेत्र के लोगों को अपने साथ जोड़ने में जुटी है। हालांकि इसके बाद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस क्षेत्र का दौरा कर मतदाताओं में ‘हिंदुत्व’ का टोन देने का काम कर रहे हैं।   


पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, किसान आंदोलन के समय इस बेल्ट में भाजपा के विरुद्ध लोगों की नाराजगी चरम पर थी। लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। आज हमारा अनुमान है कि लगभग एक तिहाई जाट वोटर सरकार को दोबारा मौका देने के लिए हमारे पक्ष में वोट कर सकते हैं। अभी टिकटों की घोषणा नहीं हुई है। कुछ प्रभावशाली जाट नेताओं को यहां से मैदान में उतारकर उनकी नाराजगी को और कम करने की कोशिश की जाएगी। नेता के मुताबिक अनुमान है कि चुनाव तक पार्टी जाटों के एक बड़े धड़े को अपने साथ दोबारा जोड़ने में कामयाब रहेगी।

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