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Hindi News ›   India News ›   UP Election 2022: Not with Modi-Yogi, there is trouble with village heads, allegations of discrimination in giving benefits of schemes

UP Election 2022 : मोदी-योगी से नहीं, ग्राम प्रधानों से है लोगों को परेशानी, योजनाओं का लाभ देने में भेदभाव के आरोप

Thu, 23 Dec 2021 01:20 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 23 Dec 2021 01:20 PM IST
सार

केंद्र और राज्य सरकार जो योजनाएं आम जनता के हित के लिए बना रही हैं उन्हें प्रधान अपने 'पक्ष' के लोगों के बीच बांट देते हैं। प्रधान और उसके लोग योजनाओं को उस गरीब वर्ग तक पहुंचने ही नहीं देते जो इसके असली हकदार होते हैं।

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UP Election 2022: Not with Modi-Yogi, there is trouble with village heads, allegations of discrimination in giving benefits of schemes
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जौनपुर के गांवों के लोग यहां के ग्राम प्रधानों से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि 'ग्राम प्रधान' सरकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं।  केंद्र और राज्य सरकार जो योजनाएं आम जनता के हित के लिए बना रही हैं उन्हें प्रधान अपने 'पक्ष' के लोगों के बीच बांट देते हैं। प्रधान और उसके लोग योजनाओं को उस गरीब वर्ग तक पहुंचने ही नहीं देते जो इसके असली हकदार होते हैं। लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील भी कर रहे हैं कि वे कोई ऐसी व्यवस्था बनायें जिससे स्थानीय स्तर पर होने वाले इस भेदभाव और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सके। 
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जौनपुर के जलालपुर की एक महिला रीमा राजभर ने अमर उजाला को बताया कि उनके गांव में राशन कार्ड का सबसे ज्यादा लाभ उन लोगों को दिया जा रहा है जो ग्राम प्रधान के पक्ष से हैं। जो गरीब हैं और राशन योजना के असली हकदार हैं, उन्हें राशन नहीं दिया जा रहा है। बेहद गरीब लोगों को भी लाल कार्ड की जगह सफेद कार्ड दिया जाता है जिस पर राशन लेने के लिए उन्हें कुछ मूल्य चुकाना पड़ता है। 
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बदलापुर के आशीष गुप्ता स्थानीय बाजार के चौराहे पर  एक दुकान चलाते हैं। उनका कहना है कि उनके क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लोगों को मिल रहा है, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालय बनाने की योजनाओं का लाभ भी लोगों को मिल रहा है। लेकिन ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की सांठगांठ इसका लाभ असली हकदारों तक नहीं पहुंचने देती। योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है जो ग्राम प्रधान के कहने पर किसी राजनीतिक दल विशेष के पक्ष में मतदान करते हैं। 
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कम सदस्यों के लिए राशन 
पुष्पा देवी ने बताया कि परिवार में सदस्यों की संख्या बढ़ गई है लेकिन राशन कार्ड पर सदस्यों की संख्या अभी भी पुरानी ही चल रही है। परिवार में छः सदस्यों के होने के बाद भी अभी केवल चार लोगों के अनुसार ही राशन मिल रहा है। ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर पर कई बार प्रयास करने के बाद भी राशन कार्ड पर सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकी है। यह समस्या केवल पुष्पा देवी तक ही सीमित नहीं है। अन्य अनेक लोग इसी तरह की शिकायत कर रहे हैं। 

चोरी के नए तरीके
मछलीशहर के निवासी राधेश्याम शर्मा बताते हैं कि राशन योजना का लाभ लेने के लिए अब बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाना पड़ता है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि इससे राशन वितरण में होने वाले घोटाले पर रोक लगेगी। लेकिन पीडीएस दुकानदारों ने इसमें भी 'चोरी' का रास्ता तैयार कर लिया है। उन्हें नियमतः राशन लेने के लिए 70 रुपये का भुगतान करना चाहिए लेकिन दुकानदार उनसे 100 रुपये की वसूली करता है। 

आरोप है कि हर व्यक्ति को मिलने वाले राशन में भी दो से पांच किलो तक की घटतौली की जाती है। लोगों को बताया जाता है कि पीछे से ही राशन की कटौती की जा रही है जिससे उन्हें भी राशन कम दिया जा रहा है। 

मनरेगा की तरह दूर करें भ्रष्टाचार
लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इन योजनाओं में चल रहे भेदभाव को समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। बदलापुर के सरोखनपुर गांव के अनुराग शर्मा ने कहा कि मनरेगा योजना में भी पहले बहुत भ्रष्टाचार किया जा रहा था। कई ऐसे लोगों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर पैसा वसूला जा रहा था जिन्हें यह तक पता नहीं होता था कि उनके नाम से जॉब कार्ड बनाया जा चुका है। उनके नाम से बैंक में खाते खोलकर उनसे पैसा निकाला जा रहा था। 


लेकिन जब इस योजना में धांधली होने की खबर ऊपर तक पहुंची तो अनेक ग्राम प्रधानों और बैंक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हुई। इसके बाद अब मनरेगा योजना में हो रहे भ्रष्टाचार में खासी कमी आयी है। लोगों की अपील है कि केंद्र-राज्य को ग्राम प्रधान और ब्लॉक स्तर पर हो रहे इस भेदभाव और  भ्रष्टाचार को समाप्त करने की ठोस योजना बनानी चाहिए जिससे इन योजनाओं का लाभ इसके असली हकदारों को मिल सके।
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