फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP BJP president may be a dalit leader

दलित नेता को सौंपी जा सकती है यूपी भाजपा की कमान

Sat, 25 Mar 2017 06:38 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Mar 2017 06:38 AM IST
विज्ञापन
UP BJP president may be a dalit leader
केशव मौर्य को यूपी का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भाजपा आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चेहरों की खोज शुरू कर दी है। बसपा प्रमुख मायावती का दलित वोट बैंक अपने पाले में खींचने की कवायद में आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान किसी दलित नेता को सौंपने पर विचार कर रहा है।
विज्ञापन


पार्टी के तमाम दलित नेताओं के प्रभाव का आंकलन कर उनके नाम पर मंथन शुरू कर दिया गया है। यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए आलाकमान की नजर कौशांबी से लोकसभा सांसद विनोद सोनकर, आगरा से सांसद राम शंकर कठेरिया, हाथरस से सांसद राजेश कुमार दिवाकर, बुलंद शहर से भोला सिंह और नगीना से सांसद डा. यशवंत सिंह पर टिकी है।
विज्ञापन


अध्यक्ष का पद पश्चिम के किसी नेता को दिया जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में कठेरिया, राजेश कुमार दिवाकर और भोला सिंह को अध्यक्ष पद की कमान मिलने की संभावना ज्यादा है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व  ने इस मामले में संघ से भी चर्चा की है। दोनों के बीच किसी दलित नेता को अध्यक्ष पद की कमान सौंपने की लगभग सहमति बन चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूपी की रणनीति से जुडे़ संघ के एक शीर्ष पदाधिकारी का कहना है कि भाजपा को भावी राजनीति के मद्देनजर दलित बिरादरी को साधना बेहद जरूरी है। इस कवायद में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद की कमान किसी दलित नेता को सौंपना बेहद जरूरी है। विधानसभा चुनाव में बेशक भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई है।

मगर यदि मायावती के दलित वोटों के साथ अल्पसंख्यक मतों का जुड़ाव हो जाता तो पश्चिमी यूपी में भाजपा की राह मुश्किल हो सकती थी। विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है वहां के वोट गणित जताते हैं कि मुस्लिमों ने भाजपा के खिलाफ एकमुश्त वोट दिया। लेकिन यह ट्रेंड कुछ सीटों तक ही सीमित रहा। संघ का आंकलन है कि बसपा के जरिए मुस्लिम कार्ड खेलने के बावजूद भी अधिकांश मुस्लिमों की पसंद सपा रही है।

भाजपा के लिए ऐतिहासिक परिणाम लाने में इस समीकरण की भूमिका अहम रही है। पर यह लंबे समय तक जारी नहीं रह सकता है। लोकसभा चुनाव 2019 में दलित-मुस्लिम गठजोड़ भाजपा की नींद न हराम करे इसके लिए पार्टी और संघ दोनों के ही शीर्ष नेतृत्व को दलित मतों की चिंता सताने लगी है।

इसे अपनी ओर लाने के लिए भगवा परिवार को सूबे की कमान किसी दलित को सौंपना सबसे मुफीद लग रहा है। योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ केशव मौर्य और दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने अगड़ा-पिछड़ा के समीकरण को बखूबी साध लिया है।

दलित को यूपी भाजपा की कमान सौंपने के पीछे भगवा परिवार का यह भी तर्क है कि केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाने का उसका दांव कारगर रहा है। विधानसभा चुनाव में प्रदेश की पिछड़ी जाति ने जमकर भाजपा का साथ दिया।

केशव का व्यक्तित्व बेशक प्रभावी न रहा हो मगर उनके नाम के आगे जुडे़ मौर्य उपनाम की वजह से यूपी के सैनी, शाक्य, बघेल और कुशवाहा बिरादरी के लोगों ने उन्हें अपना नेता माना और भाजपा को भरपूर वोट दिया।


संघ के शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भाजपा की जीत में तमाम मुद्दों में सबसे बड़ा योगदान अति पिछड़ी बिरादरी का पार्टी के साथ आना है। यदि जीत के मामले को लेकर जीते हुए विधायकों की राय ली जाएगी तो उनका भी यही मानना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed