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West Bengal: बंगाल विधानसभा में पीएसी अध्यक्ष पद को लेकर होगा शक्ति प्रदर्शन, टीएमसी के दोनों गुट आमने-सामने
Tue, 23 Jun 2026 10:22 PM IST
Pavan
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Tue, 23 Jun 2026 10:22 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 5 जुलाई को लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो सकता है। टीएमसी में ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच बढ़ते विवाद के कारण दोनों पक्ष अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। इस चुनाव को विधानसभा के भीतर दोनों गुटों की ताकत के बड़े परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस बार लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष पद के लिए अभूतपूर्व मुकाबला देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट विधानसभा के भीतर अपनी ताकत आजमाने की तैयारी में हैं। विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार को पीएसी समेत चार प्रमुख समितियों के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों के बीच सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है।
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30 जून तक दाखिल किया जा सकेगा नामांकन
अधिसूचना के अनुसार पीएसी, लोक उपक्रम समिति, प्राक्कलन समिति और स्थानीय निधि लेखा समिति के लिए 30 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 1 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 2 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 5 जुलाई को मतदान कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पीएसी अध्यक्ष पद को लेकर ऋतब्रत बनर्जी गुट काफी सक्रिय है और वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के नाम पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि ऋतब्रत गुट को टीएमसी के 80 में से करीब 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
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पीएसी विधानसभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक मानी जाती है। परंपरागत रूप से इसका अध्यक्ष विपक्ष की ओर से चुना जाता है, लेकिन टीएमसी में विभाजन के कारण इस बार स्थिति जटिल हो गई है।
राज्य में कब शुरू हुआ राजनीतिक संकट?
बंगाल में राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ जब टीएमसी के अधिकांश विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने का समर्थन किया। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। विवाद केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। हाल ही में ऋतब्रत गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा करते हुए विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया था। वहीं ममता गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी अलग संगठनात्मक सूची जमा कर रखी है।
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विधानसभा के बाद लोकसभा में भी टीएमसी को झटका
इस बीच लोकसभा में भी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 28 में से 20 सांसद अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं और उन्होंने भाजपा नीत एनडीए को समर्थन दिया है। ऐसे में 5 जुलाई को होने वाला पीएसी चुनाव केवल समिति गठन की प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि विधानसभा के भीतर टीएमसी के किस गुट के पास वास्तविक ताकत है, इसका भी बड़ा संकेत देगा।
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30 जून तक दाखिल किया जा सकेगा नामांकन
अधिसूचना के अनुसार पीएसी, लोक उपक्रम समिति, प्राक्कलन समिति और स्थानीय निधि लेखा समिति के लिए 30 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 1 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 2 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 5 जुलाई को मतदान कराया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पीएसी अध्यक्ष पद को लेकर ऋतब्रत बनर्जी गुट काफी सक्रिय है और वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के नाम पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि ऋतब्रत गुट को टीएमसी के 80 में से करीब 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
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पीएसी विधानसभा की सबसे प्रभावशाली समितियों में से एक मानी जाती है। परंपरागत रूप से इसका अध्यक्ष विपक्ष की ओर से चुना जाता है, लेकिन टीएमसी में विभाजन के कारण इस बार स्थिति जटिल हो गई है।
राज्य में कब शुरू हुआ राजनीतिक संकट?
बंगाल में राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ जब टीएमसी के अधिकांश विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने का समर्थन किया। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। विवाद केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है। हाल ही में ऋतब्रत गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा करते हुए विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया था। वहीं ममता गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी अलग संगठनात्मक सूची जमा कर रखी है।
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विधानसभा के बाद लोकसभा में भी टीएमसी को झटका
इस बीच लोकसभा में भी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 28 में से 20 सांसद अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं और उन्होंने भाजपा नीत एनडीए को समर्थन दिया है। ऐसे में 5 जुलाई को होने वाला पीएसी चुनाव केवल समिति गठन की प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि विधानसभा के भीतर टीएमसी के किस गुट के पास वास्तविक ताकत है, इसका भी बड़ा संकेत देगा।