उन्नाव दुष्कर्म मामलाः परिवार पर होता रहा सितम, 2017 से अब तक क्या-क्या हुआ
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दो वर्ष पहले साल 2017 में एक युवती ने भाजपा के बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाइयों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। तब से यह मामला लगातार सुर्खियों में है। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में ये युवती (पीड़िता) गंभीर रूप से घायल हो गई और फिलहाल वेंटिलेटर पर है।
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दो वर्ष पहले साल 2017 में एक युवती ने भाजपा के बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाइयों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। तब से यह मामला लगातार सुर्खियों में है। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में ये युवती (पीड़िता) गंभीर रूप से घायल हो गई और फिलहाल वेंटिलेटर पर है।

जानिए पुलिस ने कब दायर की चार्जशीट



इस तारीख को हुई थी पीड़िता के पिता की मौत
अब तक क्या-क्या हुआ
- 11 जून 2017: पीड़िता गांव के युवक शुभम के साथ गायब हुई, परिवारवालों ने आरोपी शुभम, अवधेश पर केस दर्ज किया।
- 21 जून 2017: पीड़िता पुलिस से मिली।
- 22 जून 2017: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया, पीड़िता ने तीन लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। विधायक समर्थक बताए जा रहे तीनों युवकों की गिरफ्तारी हुई।
- 1 जुलाई 2017: मामले में चार्जशीट दायर हुई।
- 22 जुलाई 2017: पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर और उनके भाइयों पर गैंगरेप का आरोप लगाया।
- 30 अक्टूबर 2017: मामला बढ़ने पर विधायक समर्थकों ने पीड़िता के परिवार पर मानहानि का केस दर्ज कराया।
- 11 नवंबर 2017: पीड़िता के चाचा पर भी मानहानि का केस दर्ज कराया गया।
- 22 फरवरी 2018: पीड़िता की ओर से उन्नाव जिला अदालत में अर्जी दी गई।
- 4 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता गिरफ्तार। पीड़िता का आरोप है कि मुकदमा वापस ना लेने की वजह से 3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह ने उसके पिता को पीटा था। परिवार पर भी हमला हुआ था। घायल पिता माखी थाने में मुकदमे की तहरीर देने गए तो पुलिस ने पांच अप्रैल को उन्हीं के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया।
- 8 अप्रैल 2018: पीड़िता ने किया आत्मदाह का प्रयास। पिता के खिलाफ कार्रवाई से दुखी पीड़ित युवती ने 8 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास किया जहां पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया।
- 9 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता की मौत। 8 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता को जेल में पेट दर्द के साथ खून की उल्टियां शुरू हुई थीं। कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने इस मामले में थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसवालों को निलंबित किया था।
- 10 अप्रैल 2018: विधायक का भाई अतुल सेंगर गिरफ्तार। युवती के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
- 11 अप्रैल 2018: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यूपी सरकार को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर। इसी दिन उन्नाव गैंगरेप और पीड़िता के पिता की मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की। साथ ही एडवोकेट जनरल या एडिशनल एडवोकेट जनरल को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए कहा।
- 12 अप्रैल 2018: जांच सीबीआई को सौंपी गई। राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को उन्नाव बलात्कार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया।
विधायक को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
- 13 अप्रैल 2018: विधायक गिरफ्तार। उन्नाव गैंगरेप मामले में सीबीआई की टीम ने आरोपी विधायक को गिरफ्तार किया।
- 14 अप्रैल 2018: दूसरी गिरफ्तारी। सीबीआई ने शशि सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया जिस पर घटना के दिन पीड़िता को भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पास ले जाने का आरोप था।
- 2 मई 2018: जेल में करीबियों के साथ जनता दरबार लगाने और गवाहों को प्रभावित करने की शिकायत के बाद विधायक समेत केस से जुड़े सभी आरोपियों को उन्नाव से लखनऊ जेल में शिफ्ट किया गया।
- 24 अगस्त 2018: विधायक कुलदीप सेंगर की कथित संलिप्तता वाले उन्नाव बलात्कार और हत्या मामले के गवाह में से एक की मौत हो गई। यूनुस नाम का गवाह पिछले कुछ समय से कथित तौर पर बीमार चल रहा था। 26 अगस्त को यूनुस का शव कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
- 28 जुलाई 2019: लगभग एक साल बाद उन्नाव मामला फिर सुर्खियों में आ गया जब रविवार 28 जुलाई को खबर आई कि उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता जिस कार में जा रही थी उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई जबकि खुद पीड़िता और उसके वकील की हालत बेहद गंभीर है। पीड़िता और उसके रिश्तेदार अपने वकील के साथ रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा से मिलने जा रहे थे।
- 1 अगस्त 2019: भाजपा ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाला। सुप्रीम कोर्ट ने सभी केस दिल्ली किया ट्रांसफर। पीड़ितों को मिली सीआरपीएफ की सुरक्षा। पीड़िता को 24 घंटे के भीतर 25 लाख का मुआवजा देने का निर्देश। 45 दिन में ट्रायल पूरा करने का निर्देश।