एलटीसी जारी करने को लेकर उलझन में फंसे केंद्र सरकार के बाबू, वित्त मंत्रालय से पूछ रहे ऐसे सवाल
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केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग एलटीसी यानी यात्रा किराया भत्ता, जारी करने को लेकर उलझन में फंस गए हैं। किस कर्मचारी के खाते में कितना पैसा जमा होगा, ये तय नहीं हो पा रहा है। सरकार ने इस बार अपने कर्मियों को एलटीसी की राशि का इस्तेमाल करने के लिए कई अन्य विकल्प दिए थे। इसमें जीएसटी बिल के साथ कोई खरीददारी करना, बीमा प्रीमियम का भुगतान और लीव इनकैशमेंट आदि शामिल हैं। अब इन्हीं विकल्पों को लेकर विभिन्न मंत्रालय उलझन में फंस गए हैं। लगभग सभी मंत्रालयों की तरफ से वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग से ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं। व्यय विभाग ने अब सभी सवालों का जवाब दे दिया है।
सरकार ने दिवाली से पहले अपने कर्मचारियों को एलटीसी कैश वाउचर स्कीम देने की घोषणा की थी। इस योजना में सरकारी कर्मचारी को एलटीसी के पैसे का इस्तेमाल कर खरीददारी करने की छूट मिली है। इस स्कीम का चयन करने वाले कर्मियों को 31 मार्च 2021 से पहले वह खरीददारी करनी होगी। सभी कर्मियों के लिए इस खरीद का बिल संबंधित विभाग के डीडीओ के पास जमा कराना अनिवार्य किया गया है। कर्मचारी जो भी सामान खरीदेगा, उसका स्वयं सत्यापित बिल भी डीडीओ को देना होगा। यदि विभाग द्वारा बिल की मूल प्रति दिखाने के लिए कहा जाता है तो कर्मचारी को वह बिल पेश करना पड़ेगा। साथ ही एलटीसी राशि को उस सामान पर खर्च करना होगा, जिनके लिए 12 फीसदी या उससे ज्यादा जीएसटी लगा हो। यह खरीदारी डिजिटल माध्यम से और केवल जीएसटी रजिस्टर्ड विक्रेता से ही करनी होगी। केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालय इन्हीं बातों को लेकर उलझ गए हैं। बहुत से ऐसे कर्मी हैं, जिन्होंने नियमों के अनुसार खरीदारी की है, लेकिन अभी तक उनके खाते में वह राशि जमा नहीं हो सकी है।
मंत्रालयों द्वारा पूछ जाने वाले सवालों में, क्या कोई कर्मचारी बिना लीव इनकैशमेंट के अपना स्पेशल कैश पैकेज ले सकता है, इसके जवाब में बताया गया है कि लीव इनकैशमेंट वैकल्पिक है। इसमें किसी कर्मचारी का जितना पैसा एलटीसी के लिए बनता है, वह उतना ही स्पेशल कैश पैकेज के तहत खर्च कर सकता है। यदि कोई कर्मी डीम्ड एलटीसी किराया भत्ता, बिना लीव इनकैशमेंट के लेता है और वह डीम्ड एलटीसी किराए की राशि के तीन गुणा से कम खर्च करता है तो उसका भुगतान किस तरह किया जाएगा। इसके जवाब में कहा गया है कि ऐसे मामले में समानुपात आधार पर भुगतान होगा। इसके क्लेम के लिए कर्मचारी को डीम्ड एलटीसी किराए का तीन गुणा खर्च करना पड़ेगा। अगर वह खर्च डीम्ड एलटीसी फेयर के तीन गुणा से कम खर्च करता है तो उसे मूल खर्च का एक तिहायी हिस्सा मिल पाएगा।
इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझा जा सकता है। यदि कोई कर्मचारी अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ इकोनॉमी क्लास में हवाई यात्रा करता है। एक सदस्य का किराया 20 हजार रुपये है। ऐसे में कुल किराया 80 हजार रुपया हो गया। यह राशि लेने के लिए उसे तीन गुणा अधिक राशि यानी 2 लाख 40 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
यदि कोई कर्मचारी 31 दिसंबर 2020 को रिटायर होने वाला है तो उन्हें सभी बिल अपनी सेवानिवृत्ति से पहले जमा कराने होंगे। इसके अलावा एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि कोई कर्मचारी दस दिन से कम समय का लीव इनकैशमेंट ले सकता है, व्यय विभाग ने इसका उत्तर देते हुए कहा, यह एलटीसी नियमों के प्रावधानों के अनुसार संभव होगा। एक अन्य सवाल यह पूछा गया है कि क्या स्पेशल पैकेज स्कीम के पैसे का इस्तेमाल पहले से जारी बीमा पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान करने के लिए किया जा सकता है, इसके जवाब में बताया गया है कि यह स्पेशल पैकेज स्कीम केवल वस्तु और सेवाओं की खरीददारी से संबंधित है। ये वस्तु भी 12 अक्तूबर से 31 मार्च 2021 के बीच 12 प्रतिशत जीएसटी बिल के साथ खरीदी गई हों। प्रीमियम का भुगतान इस श्रेणी में नहीं आता। यदि कोई पॉलिसी उपरोक्त तिथि के बीच में खरीदी गई है तो उसके प्रीमियम का भुगतान इस स्कीम के अंतर्गत हो सकता है। यानी किसी कर्मचारी ने अगर इस अवधि के दौरान नई पॉलिसी ली है तो वह उसका भुगतान स्पेशल पैकेज के जरिए कर सकता है।