केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बोले, सरकार तारीखें नहीं बल्कि प्रस्ताव दे रही है, किसान संगठन बनाएं सहमति
- क्या मोगा की महापंचायत से निकलेगा किसान आंदोलन का समाधान?
- 15 फरवरी को पंजाब के मोगा में किसानों की होगी खुली महापंचायत,
- महापंचायत में बातचीत के अंतिम बिंदुओं पर बन सकती है सहमति
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26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन को 76 दिन हो गए हैं। तब से अब तक किसानों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के 11 दौर बीत चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका है। किसान नेताओं का आरोप रहा है कि केंद्र सरकार उन्हें केवल तारीख पर तारीख दे रही है और समाधान निकालने की कोई कोशिश नहीं कर रही है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि उसने किसान नेताओं के सामने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए हैं, लेकिन किसान नेता सहमत नहीं हो रहे हैं। सरकार का यह भी आरोप है कि आंदोलन में शामिल कुछ लोगों के कारण किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार पर तारीख पर तारीख देने के आरोप लग रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव पर प्रस्ताव पेश किए हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के विवादों को सिविल कोर्ट तक ले जाने, पराली जलाने पर किसानों पर कोई केस-जुर्माना न करने और प्रस्तावित बिजली कानून को स्थगित रखने जैसे जरूरी प्रस्ताव दिये जा चुके हैं।
अब तो कृषि कानूनों को डेढ़ वर्ष तक स्थगित रखने और कमेटी के माध्यम से हल निकलने तक का इंतजार करने की बात कही जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी किसान सहमत नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की प्रमुख मांगें स्वीकार की गई हैं, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोगों की जिद के कारण समस्या का समाधान नहीं निकल सका है।
सबका नुकसान नहीं कर सकती सरकार
पीयूष गोयल ने कहा कि देश में 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम कृषि भूमि है। नए कृषि कानूनों का सबसे बड़ा फायदा इन्हीं छोटे-छोटे किसानों को होगा। ऐसे में अगर कुछ बड़े किसान इस कानून से सहमत नहीं हैं तो भी बाकी किसानों के बड़े लाभ को देखते हुए सरकार इस कानून को बनाए रखने पर विचार कर रही है। किसानों से बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि सरकार कानूनों को पूरी तरह वापस लेने के पक्ष में नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बदले माहौल में अगर किसान नेता कुछ गंभीर प्रस्तावों के साथ आते हैं, तो सरकार उन पर गंभीरता से विचार करेगी। सरकार इस समस्या का समाधान निकालना चाहती है, लेकिन इसके लिए कुछ ठोस प्रस्तावों के साथ आना होगा।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों से बातचीत करने की दो बार अपील कर चुके हैं। वे आंदोलन से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को वापस जाने की भी अपील कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की अपील को किसान नेता बेहद सकारात्मक तरीके से ले रहे हैं और बातचीत के बिंदुओं पर दोबारा विचार-विमर्श करने की तैयारी में जुट गए हैं।
मोगा की महापंचायत से निकलेगा समाधान का रास्ता
आढ़ती किसान संघर्ष कमेटी, पंजाब के नेता रविंदर सिंह चीमा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के सामने अभी तक जो भी प्रस्ताव रखे हैं, वे किसानों की मांगों से अलग रहे हैं। यही कारण है कि अनेक प्रस्तावों के बाद भी अभी तक दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है। किसानों की सबसे बड़ी मांग यह रही है कि केंद्र सरकार कृषि मामलों पर दखल न दे। यह राज्यों का विषय है और वह इसे राज्यों के ऊपर ही छोड़ दे कि वे अपने राज्यों में कृषि के लिए कौन सा मॉडल अपनाना चाहते हैं।
अगर केंद्र सरकार कृषि विषयों पर कानून बनाने की बात से पीछे हटना स्वीकार करे तो उनके बीच बातचीत बन सकती है। किसान नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील को वे बेहद सकारात्मक तरीके से ले रहे हैं और वे भी चाहते हैं कि इस मामले का जल्दी से कोई समाधान निकले। लेकिन इसके लिए सरकार को पहल करनी पड़ेगी।
चीमा का कहना है, 15 फरवरी को पंजाब के मोगा में किसानों की एक खुली महापंचायत होगी। इस महापंचायत में सरकार के साथ बातचीत के बिदुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें संशोधित प्रस्ताव भी सामने आ सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी बातचीत को सफल बनाने की जिम्मेदारी सरकार पर ही रहेगी क्योंकि उसे ही ऐसे प्रस्तावों पर मुहर लगानी है जिस पर सहमति बन सकती है।
किसान नेता ने कहा कि महापंचायत में अनेक प्रकार के विचार सामने आते हैं। इनमें कई बार आपस में भी सहमति नहीं होती है, लेकिन कोई भी निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है। इसलिए अगर सरकार को लग रहा है कि किसानों के बीच कुछ ऐसे लोग हैं जो बातचीत को सफल नहीं होने देना चाहते हैं, तो भी अगर सरकार के प्रस्ताव ज्यादातर किसान संगठनों को ठीक लगते हैं तो बहुमत के आधार पर उससे सहमति की घोषणा की जा सकती है।