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नक्सल समस्या: माओवादियों की आय के स्रोतों पर करें प्रहार, गृह मंत्री शाह का मुख्यमंत्रियों को निर्देश

Sun, 26 Sep 2021 03:14 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 26 Sep 2021 03:14 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छह मुख्यमंत्रियों और चार राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा स्थिति और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रविवार को समीक्षा की।

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Naxal problem: Attack on the sources of income of Left Wing Extremists, Home Minister Shahs instructions to Chief Ministers
नक्सल समस्या पर मंथन - फोटो : ANI

विस्तार

देश के कुछ राज्यों में नक्सली समस्या को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को छह मुख्यमंत्रियों और चार राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ मंथन किया। बैठक में शाह ने कहा कि वाम मार्गी उग्रवादियों की आय के स्रोतों को खत्म करना बेहद जरूरी है। केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर नक्सलियों के वित्तीय स्रोत बंद करने के प्रयास करना चाहिए।

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गृह मंत्रालय के अनुसार  शाह ने बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे अगले एक साल में माओवादी उग्रवादियों की समस्या से निपटने को प्राथमिकता दें, ताकि इस समस्या का हल निकाला जा सके। इसके लिए नक्सलियों पर दबाव बढ़ाने, उनके खिलाफ अभियान की रफ्तार तेज करने और बेहतर समन्वय की जरूरत है। बैठक में देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा स्थिति और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
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इन राज्यों के सीएम बैठक में शामिल हुए
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाग लिया। बैठक के लिए पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और केरल के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन इन चार राज्यों का प्रतिनिधित्व राज्य के किसी मंत्री या शीर्ष अधिकारियों ने किया।
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सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री ने मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों के साथ मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा स्थिति और माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियानों तथा विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। शाह ने इन राज्यों की जरूरतों, उग्रवादियों से निपटने के लिए तैनात बलों की संख्या, नक्सल प्रभावित इलाकों में किए जा रहे सड़कों, पुलों, विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण जैसे विकास कार्यों का जायजा लिया।

ओडिशा के मुख्यमंत्री पटनायक ने कहा कि उनके राज्य में माओवादी समस्या केवल तीन जिलों तक सिमट कर रह गई है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि इसे और कम करने के लिए क्या किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, गिरिराज सिंह, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय भी बैठक में शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, खुफिया ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ असैन्य एवं पुलिस अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।


केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में माओवादी हिंसा में काफी कमी आई है और यह खतरा अब लगभग 45 जिलों में है। हालांकि, देश के कुल 90 जिलों को माओवादी प्रभावित माना जाता है और ये मंत्रालय की सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के अंतर्गत आते हैं। नक्सल समस्या को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) भी कहा जाता है। यह समस्या 2019 में 61 जिलों में और 2020 में 45 जिलों में देखी गई। देश में 2015 से 2020 तक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न हिंसात्मक गतिविधियों के कारण लगभग 380 सुरक्षाकर्मी, 1,000 असैन्य नागरिक और 900 नक्सली मारे गए हैं। आंकड़ों में कहा गया है कि इसी अवधि के दौरान कुल 4,200 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है।

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