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मंजूरी: 2000 करोड़ से शुरू होगा 'मिशन मौसम', चरम घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में करेगा मदद
Thu, 12 Sep 2024 05:55 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 12 Sep 2024 05:55 AM IST
सार
यह मौसम की चरम घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में नागरिकों सहित हितधारकों को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद करेगा। यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम लंबे समय में समुदायों, क्षेत्रों और इकोसिस्टम की क्षमता एवं अनुकूलन को व्यापक बनाने में सहायता करेगा।
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पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : X/@narendramodi
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगले दो वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ 'मिशन मौसम' को मंजूरी दे दी। मिशन मौसम को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से कार्यान्वित किया जाएगा।
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इस मिशन के तहत भारत के मौसम और जलवायु-संबंधी विज्ञान, अनुसंधान एवं सेवाओं को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक बहुआयामी और परिवर्तनकारी पहल की परिकल्पना की गई है। यह मौसम की चरम घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में नागरिकों सहित हितधारकों को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद करेगा। यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम लंबे समय में समुदायों, क्षेत्रों और इकोसिस्टम की क्षमता एवं अनुकूलन को व्यापक बनाने में सहायता करेगा। इस मिशन के जरिये भारत, वायुमंडलीय विज्ञान, विशेष रूप से मौसम निगरानी, मॉडलिंग, पूर्वानुमान और प्रबंधन में अनुसंधान एवं विकास तथा क्षमता का तेजी से विस्तार करेगा। इसके तहत उन्नत अवलोकन प्रणालियों, हाईटेक कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करके अधिक स्पष्टता के साथ मौसम की भविष्यवाणी की जा सकेगी।
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3,435 करोड़ खर्च से 38,000 से अधिक ई-बसों की होगी तैनाती
कैबिनेट ने 3,435.33 करोड़ रुपये खर्च के साथ सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा ई-बसों की खरीद और संचालन के लिए पीएम-ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना को भी मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29 तक 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) की तैनाती की जाएगी।
- वर्तमान में, पीटीए द्वारा संचालित अधिकांश बसें डीजल/सीएनजी पर चलती हैं, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर, ई-बसें पर्यावरण के अनुकूल हैं और उनकी परिचालन लागत भी कम है।