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कांग्रेस का BJP सरकार पर हमला : जयराम रमेश बोले, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का न होना असंवैधानिक, कही ये बात
Mon, 06 Mar 2023 09:43 AM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 06 Mar 2023 09:43 AM IST
सार
जयराम का ये बयान तब आया है, जब एक महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने निचले सदन के उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं करने पर केंद्र से जवाब मांगा था। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लंघन बताया था।
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जयराम रमेश
- फोटो : Social Media
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विस्तार
लोकसभा और पांच विधानसभाओं में डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने पर कांग्रेस ने भाजपा की केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पिछले चार साल से लोकसभा में कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है और यह असंवैधानिक है। जयराम का ये बयान तब आया है, जब एक महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने निचले सदन के उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं करने पर केंद्र से जवाब मांगा था। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लंघन बताया था।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसको लेकर ट्वीट किया। उन्होंने कहा, 'पिछले चार साल से लोकसभा में कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है। यह असंवैधानिक है। मार्च 1956 में पं. नेहरू ने विपक्षी अकाली दल के सांसद और नेहरू के आलोचक सरदार हुकम सिंह के नाम का प्रस्ताव इस पद के लिए रखा और उन्हें सर्वसम्मति से चुन लिया गया था।'
पिछले महीने कोर्ट ने दायर हुई थी याचिका
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक जनहित याचिका दायर हुई थी। इसमें पिछले चार साल से डिप्टी स्पीकर न होने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने कुछ राज्य विधानसभाओं का भी उल्लेख किया था, जिन्होंने अपने यहां डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं कराया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के उपाध्यक्ष का चुनाव न होना स्वस्थ लोकतांत्रिक कामकाज के खिलाफ है।
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क्यों जरूरी है डिप्टी स्पीकर का चुनाव?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील डी मखीजा के अनुसार, 10वीं लोकसभा से डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा शुरू हुई थी। याचिकाकर्ता ने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन का हवाला दिया जिन्होंने बताया कि विपक्ष को डिप्टी स्पीकर का पद देने की परंपरा 1991 में शुरू हुई जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एस मल्लिकार्जुनैया को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। उस वक्त लोकसभा अध्यक्ष कांग्रेस के शिवराज पाटिल थे। परंपरा को अंतिम कार्यकाल तक निभाया गया। इसी तरह कांग्रेस एम थंबीदुरई जब उपाध्यक्ष थे, तब भाजपा की सुमित्रा महाजन अध्यक्ष थीं। अभी उपाध्यक्ष का पद 23 जून 2019 से रिक्त है।
अनुच्छेद 93 क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार, संसद के निचले सदन में जितनी जल्दी हो सके, सदन के दो सदस्यों को क्रमश: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनना होगा। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद अगर रिक्त हो जाता है, तो सभा किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुन सकता है।
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जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसको लेकर ट्वीट किया। उन्होंने कहा, 'पिछले चार साल से लोकसभा में कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है। यह असंवैधानिक है। मार्च 1956 में पं. नेहरू ने विपक्षी अकाली दल के सांसद और नेहरू के आलोचक सरदार हुकम सिंह के नाम का प्रस्ताव इस पद के लिए रखा और उन्हें सर्वसम्मति से चुन लिया गया था।'
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पिछले महीने कोर्ट ने दायर हुई थी याचिका
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर एक जनहित याचिका दायर हुई थी। इसमें पिछले चार साल से डिप्टी स्पीकर न होने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने कुछ राज्य विधानसभाओं का भी उल्लेख किया था, जिन्होंने अपने यहां डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं कराया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के उपाध्यक्ष का चुनाव न होना स्वस्थ लोकतांत्रिक कामकाज के खिलाफ है।
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क्यों जरूरी है डिप्टी स्पीकर का चुनाव?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील डी मखीजा के अनुसार, 10वीं लोकसभा से डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा शुरू हुई थी। याचिकाकर्ता ने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन का हवाला दिया जिन्होंने बताया कि विपक्ष को डिप्टी स्पीकर का पद देने की परंपरा 1991 में शुरू हुई जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एस मल्लिकार्जुनैया को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। उस वक्त लोकसभा अध्यक्ष कांग्रेस के शिवराज पाटिल थे। परंपरा को अंतिम कार्यकाल तक निभाया गया। इसी तरह कांग्रेस एम थंबीदुरई जब उपाध्यक्ष थे, तब भाजपा की सुमित्रा महाजन अध्यक्ष थीं। अभी उपाध्यक्ष का पद 23 जून 2019 से रिक्त है।
अनुच्छेद 93 क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार, संसद के निचले सदन में जितनी जल्दी हो सके, सदन के दो सदस्यों को क्रमश: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनना होगा। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद अगर रिक्त हो जाता है, तो सभा किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुन सकता है।