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चिंताजनक: संयुक्त राष्ट्र संघ ने दी चेतावनी- 30% तक बढ़ सकता है 2040 तक पशुओं में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल
Sun, 06 Apr 2025 05:02 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 06 Apr 2025 05:02 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो 2040 तक दुनियाभर में पशुओं में एंटीबायोटिक का उपयोग 30 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसका अत्यधिक उपयोग बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है, जिससे मानव और पशु दोनों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो 2040 तक दुनियाभर में पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करीब 30 फीसदी तक बढ़ सकता है। यह अनुमान संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने अपने एक महत्वपूर्ण अध्ययन में जताया है। इसे प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया है। एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार पशुओं के लिए एंटीबायोटिक उपयोग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 2019 में पशुओं पर 1,10,777 टन एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग हुआ था, जो 2040 तक 1,43,481 टन तक पहुंच सकता है।
एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 64.6 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक एंटीबायोटिक का उपयोग होता है, इसके बाद दक्षिण अमेरिका 19 फीसदी का स्थान आता है। जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में यह आंकड़ा 6 फीसदी से भी कम है।
नियमित एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं
रिपोर्ट के अनुसार पशुओं को स्वस्थ रहने के लिए नियमित एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। जैविक और उच्च कल्याण प्रणालियां पशुओं को एंटीबायोटिक का उपयोग करने से बचाती हैं। जब पशुओं की बीमारियां उनकी आंतरिक प्रतिरक्षा प्रणाली से ठीक नहीं होती है तब एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है। लेकिन इसकी खुराक पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के देखरेख में ही दी जानी चाहिए।
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ये भी पढ़ें: अमेरिका के दक्षिण और मिडवेस्ट में भारी बारिश और बाढ़ का कहर जारी, और ज्यादा तबाही की आशंका
अंधाधुंध उपयोग से बढ़ रही बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता
अध्ययन में भी चेतावनी दी गई है कि खेती और पशुपालन में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। इससे पशुओं के साथ मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया भर में पशुओं को बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। इसका इस्तेमाल पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि इसका अत्यधिक इस्तेमाल कई तरह के नुकसानों को जन्म देता है। एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल पशुओं को बीमारियों से बचाने और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके लिए पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली जाती है।
भारत और चीन में तीन गुना बढ़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन जैसे देशों में पशुओं पर एंटीबायोटिक के भारी उपयोग ने वहां के जानवरों में रेसिस्टेन्स के खतरे को तीन गुना तक बढ़ा दिया है। अनुमान है कि दुनियाभर में बेची जा रही 73 फीसदी एंटीबायोटिक दवाएं भोजन के लिए पाले गए जानवरों को दी जाती हैं। सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक्स का उपयोग आमतौर पर पोल्ट्री उद्योग में श्वसन रोगों और अन्य जीवाणु संक्रमणों के उपचार और रोकथाम के लिए किया जाता है। इसलिए इसके उत्पादन भी मनुष्यों के लिए नुकसानदायक होते हैं। इनका असर बहुत धीरे-धीरे होता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देश मानव प्रतिरोध के डर के कारण पोल्ट्री में फ्लोरोक्विनोलोन का उपयोग नहीं करते।
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एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 64.6 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक एंटीबायोटिक का उपयोग होता है, इसके बाद दक्षिण अमेरिका 19 फीसदी का स्थान आता है। जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में यह आंकड़ा 6 फीसदी से भी कम है।
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नियमित एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं
रिपोर्ट के अनुसार पशुओं को स्वस्थ रहने के लिए नियमित एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। जैविक और उच्च कल्याण प्रणालियां पशुओं को एंटीबायोटिक का उपयोग करने से बचाती हैं। जब पशुओं की बीमारियां उनकी आंतरिक प्रतिरक्षा प्रणाली से ठीक नहीं होती है तब एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है। लेकिन इसकी खुराक पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के देखरेख में ही दी जानी चाहिए।
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अंधाधुंध उपयोग से बढ़ रही बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता
अध्ययन में भी चेतावनी दी गई है कि खेती और पशुपालन में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। इससे पशुओं के साथ मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया भर में पशुओं को बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। इसका इस्तेमाल पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि इसका अत्यधिक इस्तेमाल कई तरह के नुकसानों को जन्म देता है। एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल पशुओं को बीमारियों से बचाने और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके लिए पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली जाती है।
भारत और चीन में तीन गुना बढ़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन जैसे देशों में पशुओं पर एंटीबायोटिक के भारी उपयोग ने वहां के जानवरों में रेसिस्टेन्स के खतरे को तीन गुना तक बढ़ा दिया है। अनुमान है कि दुनियाभर में बेची जा रही 73 फीसदी एंटीबायोटिक दवाएं भोजन के लिए पाले गए जानवरों को दी जाती हैं। सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक्स का उपयोग आमतौर पर पोल्ट्री उद्योग में श्वसन रोगों और अन्य जीवाणु संक्रमणों के उपचार और रोकथाम के लिए किया जाता है। इसलिए इसके उत्पादन भी मनुष्यों के लिए नुकसानदायक होते हैं। इनका असर बहुत धीरे-धीरे होता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देश मानव प्रतिरोध के डर के कारण पोल्ट्री में फ्लोरोक्विनोलोन का उपयोग नहीं करते।