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पुलवामा पर यूएनएससी प्रस्ताव में है भारत प्रस्तावित भाषा, चीन ने भी किया समर्थन

Fri, 22 Feb 2019 01:30 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 22 Feb 2019 01:30 PM IST
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UN Security Council resolution on Pulwama attack contained specific language proposed by India
पुलवामा हमले के बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षाबल

पुलवामा हमले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में जैश-ए-मोहम्मद का नाम और हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लाने की अपील समेत वह विशेष भाषा प्रयोग की गई है जो भारत ने अपने सहयोगी देशों के माध्यम से प्रस्तावित की है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।

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चीन समेत 15 स्थायी और अस्थायी सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद ने भारत के प्रति एकजुटता एवं समर्थन जताने के लिए पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ‘जघन्य एवं कायराना’ आतंकवादी हमले की ‘कड़े शब्दों में’ गुरुवार को निंदा की। भारत ने आतंकवादी समूहों को और सीमा पार आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन के कारण उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग थलग करने के लिए राजनयिक हमला तेज कर दिया है।
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यूएनएससी ने प्रस्ताव में इस बात को भी दोहराया कि हर प्रकार का आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के समक्ष सबसे गंभीर खतरों में से एक है। परिषद ने आतंकवाद की इन निंदनीय करतूतों को अंजाम देने वाले, इनके आयोजकों, वित्त पोषकों और प्रायोजकों को जिम्मेदार ठहराए जाने और न्याय के दायरे में लाए जाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
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यहां सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव को चीन समेत सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से पारित किया। इसमें उस विशेष भाषा का प्रयोग किया गया जो भारत ने अपने सहयोगी देशों के माध्यम से प्रस्तावित की थी। इसमें भारत की प्रस्तावित भाषा के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिया गया और साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लाए जाने की बात की गई।

सुरक्षा परिषद ने सभी देशों से अपील की कि वे पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून एवं प्रासंगिक सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुसार भारत और अन्य सभी प्रासंगिक प्राधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग करें।


इसमें यह भी दोहराया गया कि आतंकवादी करतूतें आपराधिक हैं और उन्हें न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका मकसद क्या है और उन्हें कहां, कब और किसने अंजाम दिया है। पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

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