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संयुक्त राष्ट्र ने कहा, ईको-लेबलिंग मानकों से मिटा सकते हैं गरीबी और भुखमरी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:03 AM IST
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राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईको-लेबल और स्वैच्छिक स्थिरता मानक अपनाने से न केवल गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि विकासशील देशों के उत्पादों को बाजार में नई पहचान भी मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे विकासशील देशों के लिए नए बाजार भी खुलेंगे।
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सोमवार को नई दिल्ली में क्वॉलिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया और संयुक्त राष्ट्र फोरम (यूएनएफएसएस) की तरफ से स्थिर व्यापार और मानकों पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मानकों को अपनाने से गरीबी और भुखमरी हटाने, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ पानी और सस्ती ऊर्जा पाने में मदद मिलेगी।
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अंकटाड के उप महासचिव इजाबेल दुरांत ने स्थिर व्यापार और मानकों पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि आज 199 देशों और 25 औद्योगिक क्षेत्रों में 25 तकरीबन 500 इको-लेबल्स हैं। उद्योगों में मानकों के अपनाए जाने से सामाजिक, पर्यावरण और आर्थिक हालात बेहतर होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मानकों को व्यापक अर्थों में समझा जाए तो ठोस उपाय अपनाने से कंपनियों और उनके सप्लायर्स को ग्राहकों को बेहतर उत्पाद उपलब्ध करा सकते हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक इकोलेबलिंग पर्यावरण के सर्टिफिकेशन का एक स्वैच्छिक उपाय है, जो पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जा रहा है। इकोलेबलिंग से पता चल जाता है कि यह उत्पाद या सेवा पर्ययावरण के अनुकूल है या नहीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने यूएनएफएसएस के समर्थन से 2016 में ब्राजील और चीन के साथ मिल कर पहला राष्ट्रीय मंच स्थापित किया था।
यूएनएफएसएस के संयोजक सेंटियागो फर्नांडीज डी कोरजोबार ने कहा कि इन मानकों के जरिए विकासशील देशों को वैश्विक बाजार तलाशने में मदद मिलती है। इन मानकों को लागू करने के बाद व्यापार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं।
क्वॉलिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आदिल जैनुलभाई का कहना है कि मेक इन इंडिया नीति के जरिए सरकार स्वच्छ और स्थाई तकनीकों को उद्योगों में बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक रुप से स्थिरता मानकों के जरिए व्यापार करने की नीति और प्रक्रियाओं को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि इन मानकों को अपनाने ने अर्थव्यव्स्था में व्यापक लाभ और विकास के दरवाजे खुल सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए क्वॉलिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि आज हम ऐसी दहलीज पर खड़े हैं, जहां वैश्विकरण लोगों को एक-दूसरे के नजदीक ला रहा है। वहीं, भारत को आगे बढ़ने के लिए कई स्थिरता मानकों को लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खासतौर पर विकसित अर्थव्यवस्था के मुकाबले भारत के सामने मानक प्रणाली की चुनौतियों से निबटने की जरूरत है।
यूएनएफएसएस एक वैश्विक स्तर पर ज्ञान साझा करने का एक प्लेटफॉर्म है, जिसे अंकटाड और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन का समर्थन हासिल है। इस सम्मेलन में तीसरी यूएनएफएसएस रिपोर्ट लॉन्च की गई है।