स्वास्थ्य: एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से टाइफाइड की दवाएं बेअसर, वैज्ञानिक बोले- साल्मोनेला बैक्टीरिया का इजाफा
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी वालिया के मुताबिक, साल्मोनेला टाइफी से आंतों का ज्वर होता है, जिसे आमतौर पर टाइफाइड बुखार जाना जाता है।
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एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक सेवन इन्सानों के लिए घातक होने लगा है। इनकी वजह से उस साल्मोनेला बैक्टीरिया के कई स्वरूप पैदा हुए हैं, जिससे टाइफाइड रोग होता है। इन पर दवाएं भी बेअसर हैं। भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में बगैर परीक्षण मरीजों को धड़ल्ले से इनका सेवन कराया जा रहा है। यही वजह है कि हाल के दिनों में टाइफाइड के कई मामलों में मौजूदा दवाएं बेअसर साबित हुई हैं।
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी वालिया के मुताबिक, साल्मोनेला टाइफी से आंतों का ज्वर होता है, जिसे आमतौर पर टाइफाइड बुखार जाना जाता है। दुनियाभर में हर साल दो करोड़ से ज्यादा मामले मिल रहे हैं और 1.20 से 1.60 लाख लोगों की मौत हो रही है। इसी से संबंधित स्वरूप साल्मोनेला पैराटाइफी है, जिसकी वजह से सालाना 34 लाख से अधिक लोग टाइफाइड की चपेट में आ रहे हैं और 1.90 लाख से अधिक मौते हो रही हैं। डॉ. वालिया का कहना है कि टाइफाइड का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है।