ट्विटर विवाद: कानून मंत्री बोले-कैपिटल हिल अमेरिका का गौरव तो लाल किला भारत का, मानने होंगे देश के नियम
ट्विटर द्वारा भारतीय नियम-कायदों का पालन नहीं करने पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दो टूक राय दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी कंपनी को भारत में काम करना है तो उसे देश का संविधान व कानून का पालन करना होगा।
विस्तार
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून का पालन नहीं करने पर उसका इंटरमीडियरी दर्जा खत्म करने को लेकर कानून, इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को खरी-खरी बातें कहीं। प्रसाद ने कहा कि यदि कैपिटल हिल अमेरिका के लिए गौरव की बात है तो लाल किला भारत के लिए, जहां प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। ट्विटर ने लद्दाख को चीन का हिस्सा बताया और हमें उसे इसे हटाने के लिए तीन माह तक जद्दोजहद करना पड़ी, यह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को भी अपनी डिजिटल संप्रभुता का संरक्षण करने का उतना ही हक है।
If Capitol Hill is US' pride, Red Fort is India's where PM hoists Tricolour. You show parts of Ladakh as China's part. It takes a fortnight for us to pursue you to remove it. This isn't fair. As democracy, India is equally entitled to safeguard its digital sovereignty: RS Prasad pic.twitter.com/Yg8f5W3fF1
— ANI (@ANI) June 17, 2021विज्ञापन
आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि हमने ट्विटर को तीन माह का वक्त दिया। दूसरी कंपनियों ने नियम का पालन किया, लेकिन ट्विटर ने नहीं किया। आईटी गाइडलाइंस का नियम 7 कहता है कि यदि आप नियमों का पालन नहीं करते हैं तो सेक्शन 79 के तहत आप इंटरमीडियरी दर्जा खो सकते हैं। इसके बाद बाद आप देश के दंडात्मक कानूनों समेत अन्य कानूनों के पालन के लिए जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि ट्विटर का इंटरमीडियरी दर्जा खत्म करने का मैंने नहीं कहा है, कानून ने किया है। यदि दूसरों ने नियम का पालन किया तो, इन्होंने क्यों नहीं? हमने उन्हें तीन अधिकारी नियुक्त करने को कहा। तीन माह का वक्त दिया, वह 26 मई को खत्म हो गया। अंत में हमने सौजन्यवश अंतिम अवसर भी दिया।
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रसाद ने कहा कि यदि भारतीय कंपनियां या फार्मा कंपनियां अमेरिका में उत्पादन करती हैं तो उन्हें वहां के नियमों का पालन करना होता है या नहीं? यदि आपको यहां व्यवसाय करना है तो,आपके भारत के संविधान व नियमों का पालन करना होगा। आप भारत के पीएम की आलोचना कर सकते हो, लेकिन नियम तो मानना होंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कुछ लोग ट्विटर के जरिए राजनीति करते हैं तो मुझे कोई आपत्ति न हीं है, अब वे ट्विटर की राजनीति करते हैं तो भी कोई समस्या नहीं है, लेकिन यह मामला ट्विटर या सरकार या भाजपा का नहीं है। यह मामला ट्विटर व उसके यूजर्स के बीच का है, जिन्हें दुरुपयोग की दशा में शिकायत करने का मंच मिलना चाहिए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। निष्पक्ष चुनाव होते हैं। हम असम में जीते तो बंगाल में हारे। स्वतंत्र न्यायपालिका कठोर सवाल पूछती है। मीडिया वरिष्ठ मंत्रियों से सवाल करता है। यह लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आजादी है। इसके बावजूद आप नियमों का पालन नहीं करोगे तो यह गलत तर्क है।
हम किसी प्लेटफॉर्म को बैन करने के पक्ष में नहीं
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार पूरी तरह से निष्पक्ष है। अगर किसी देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति समेत आधी सरकार ट्विटर पर है तो यह जाहिर होता है कि हम निष्पक्ष हैं। हम किसी भी प्लेटफॉर्म को बैन करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन आपको कानून का पालन करना होगा।
सभी मैसेज को डिक्रिप्टेड नहीं करना चाहते
कानून मंत्री ने कहा कि हम सभी मैसेज को डिक्रिप्टेड नहीं करना चाहते हैं। सभी ऑर्डिनरी व्हाट्सएप यूजर इसे जारी रखें, लेकिन यदि किसी कंटेंट के वायरल होने पर मॉब लिंचिंग, दंगा, हत्या, महिलाओं को बिना कपड़े के दिखाने या फिर बच्चों का यौन शोषण होता है तो ऐसे मामलों में आपसे यह पूछा जाएगा कि यह कंटेंट किसने वायरल किया था। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि कोई ऐसा मैसेज जो सीमापार से आया है, तो भारत में किसे इसने भेजना शुरू किया, ये चीजें तो पूछी ही जाएंगी। यह लोगों के हित में है।