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Pakistan: आतंकियों ने बढ़ाई चीन की परेशानी, खतरे में 65 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट, जानें पूरा मामला

Sun, 25 Jun 2023 03:16 PM IST
शक्तिराज सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: शक्तिराज सिंह Updated Sun, 25 Jun 2023 03:16 PM IST
सार

पिछले साल टीटीपी ने बलूचिस्तान के उत्तरी हिस्से में एक अन्य छाया प्रांत की स्थापना की थी। ये वो इलाका है, जहां ज्यादातर पश्तून आबादी है। टीटीपी का ज्यादातर आधार पश्तून समुदाय के बीच ही है।

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TTP's new bet increases the threat to Chinese bases in Pakistan
BRI Project - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तान के दक्षिणी इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाने की नई मुहिम शुरू की है। इससे चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत हो रहे निर्माण कार्यों के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। चीन इन परियोजनाओं पर 65 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है।
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पिछले हफ्ते टीटीपी ने एलान किया कि वह बलूचिस्तान प्रांत में ‘कलत-मकरान’ (शैडो प्रोविंस) की स्थापना कर रहा है। इसी प्रांत में ग्वादार है, जहां बीआरआई के तहत बहुचर्चित बंदरगाह बना है। इस क्षेत्र में पहले भी आतंकवादी हमले होते रहे हैँ। उन हमलों के दौरान चीनी ठिकानों को खास निशाना बनाया गया है। शैडो प्रोविंस (छाया प्रांत) की अपनी योजना के तहत टीटीपी इस इलाके के लिए एक समानांतर सरकार बनाएगा। जिस क्षेत्र को उसने अपने इस छाया प्रांत में शामिल करने की घोषणा की है, वह बलूचिस्तान का 40 फीसदी हिस्सा है।
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पिछले साल टीटीपी ने बलूचिस्तान के उत्तरी हिस्से में एक अन्य छाया प्रांत की स्थापना की थी। ये वो इलाका है, जहां ज्यादातर पश्तून आबादी है। टीटीपी का ज्यादातर आधार पश्तून समुदाय के बीच ही है। नए छाया प्रांत की स्थापना की घोषणा प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की एक रिफाइनरी पर टीटीपी के हमले की घटना के एक महीने के अंदर की गई है। उस घटना में छह सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक टीटीपी पाकिस्तान के अंदर दूर-दराज तक जाकर हमले करता रहा है, लेकिन फिलहाल उसका किसी खास इलाके पर नियंत्रण नहीं है। स्वतंत्र विश्लेषक किय्या बलूच ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘चीन ने बलूचिस्तान में नए निवेश का इरादा जताया है, लेकिन उसने सुरक्षा की गारंटी करने की शर्त लगाई है। उसे देखते हुए टीटीपी की नई धमकी एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।’ इसी महीने चीन ने पाकिस्तान और ईरान के साथ त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की थी। उसमें मुख्य ध्यान बलूचिस्तान में सुरक्षा की बिगड़ी स्थिति पर केंद्रित रहा था। 

पिछले साल प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाज शरीफ ने बार-बार चीन से यह वादा किया है कि पाकिस्तान में चीनी हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। इसके बावजूद आतंकवादी सुरक्षा घेरे को तोड़ने में कामयाब होते रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में मैक्वायर यूनिवर्सिटी में काउंटर-टेररिज्म के एक्सपर्ट खुर्रम इकबाल ने निक्कई एशिया से कहा- ‘पाकिस्तान सरकार चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कोरिडोर में फिर से जान फूंकने की पूरी कोशिश कर रही है, ताकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में फिर गति आ सके।’ जबकि अन्य जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के सुरक्षा बल अभेद्य सुरक्षा का इंतजाम करने में नाकाम रहे हैं। 


गुजरे एक साल में चार कट्टर इस्लामी गुट टीटीपी में शामिल हो गए हैँ। इससे टीटीपी की ताकत बढ़ी है। अब टीटीपी ने छाया प्रांत की स्थापना का नया दांव चला है। ऐसा उसने अफगान तालिबान की तर्ज पर किया है, जो अगस्त 2021 में काबुल पर कब्जे के पहले अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में समानांतर सरकारें चला रहा था। सिंगापुर स्थित राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्च फेलॉ अब्दुल बासित के मुताबिक ‘टीटीपी अपने नेटवर्क को फैला रहा है, जिसके तहत ही उसने नया छाया प्रांत बनाने की घोषणा की है।’
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