पूरे देश के व्यापारियों को एक वोट बैंक में तब्दील करने की कोशिश, एक फरवरी से चलेगा अभियान
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हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के चुनाव ने अलग-अलग वर्ग को अलग-अलग संदेश दिया है। इन चुनावों से राजनीतिक दलों को मिले संदेश के अलावा अन्य वर्गों ने किसानों की एक जुटता से सीख ली है कि अगर वे भी किसानों और सामान्य वर्ग की तरह एक जुट होकर वोट करें तो राजनीतिक दलों और सरकारों को उनकी बात सुनने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इसी संदेश का परिणाम है कि पूरे देश के व्यापारियों ने व्यापारियों को एक जुट होकर एक उद्देश्य के तहत एक राजनीतिक दल को वोट करने की दिशा में काम करना शुरु कर दिया है। इसके लिए व्यापारियों की एक संस्था कैट ने पहल शुरु कर दी है।
कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी पूरे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। लेकिन सरकारें अपने फायदे के हिसाब से कभी उनके खिलाफ कानून पास कर देती हैं तो कभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में कदम उठा लेती हैं। जबकि स्थापित सत्य यह है कि कृषि के बाद इस देश के सबसे ज्यादा लोगों को स्थानीय खुदरा व्यापारी ही रोजगार देता है। यही वर्ग देश को सबसे ज्यादा टैक्स भी देता है।
ऐसे में उनकी कोशिश है कि पूरा व्यापारी समाज एक होकर वोट करना सीखे जिससे किसी भी राजनीतिक दल के द्वारा उनकी जायज मांगों को इनकार करना संभव न रह जाए। इसके लिए भोपाल में दो दिवसीय कार्यक्रम में निर्णय ले लिया गया। इस मुद्दे को लेकर एक फ़रवरी से एक देश-एक व्यापारी-एक वोट के नारे के साथ पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा।
ये है आंकड़ा
देश भर में लगभग सात करोड़ व्यापारी हैं। यह वर्ग लगभग 45 करोड़ लोगों को रोज़गार देता है। प्रतिवर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपए का व्यापार होता है। कृषि के बाद देश में खुदरा व्यापार ही रोज़गार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है।