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'मजार पर औरतों का जाना ही गलत था'

Thu, 28 Apr 2016 02:04 PM IST
मोहन लाल शर्मा/बीबीसी संवाददाता
मोहन लाल शर्मा/बीबीसी संवाददाता Updated Thu, 28 Apr 2016 02:04 PM IST
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trupti desai will go to haji ali dargah
हाजी अली दरगाह में जाएंगी तृप्ति देसाई - फोटो : PTI

धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आंदोलन चला रही भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई गुरुवार को मुंबई की हाजी अली की दरगाह में प्रवेश करने का प्रयास करेंगी।

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तृप्ति देसाई इससे पहले शनि शिंगणापुर मंदिर, फिर त्रयंबकेश्वर मंदिर और इसके बाद कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आंदोलन कर चुकी हैं।
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उधर हाजी अली दरगाह ट्रस्ट के प्रवक्ता अब्दुल सत्तार का कहना है कि महिलाएं अगर बाहर तक आती हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं, लेकिन मजार तक महिलाओं का जाना ठीक नहीं है।
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उनका कहना है, "मजार पर तो अब भी महिलाएं जाती हैं लेकिन उन्हें मजार को छूने की इजाजत नहीं है। इससे तो बुजुर्ग अपनी जिंदगी में भी औरतों को मना करते थे।"

उनके मुताबिक, "इस्लाम तो कहता है कि औरतें बेपर्दा होकर घर से बिलावजह नहीं निकलें। अगर कोई औरत ऐसा करती है तो अल्लाह के भरोसे है।"

वर्ष 2011 तक औरतों के मजार पर जाने की बात पर वो सवालिया लहजे में कहते हैं कि अगर 2011 से पहले औरतें मजार पर जाती थीं तो जो गलती हो गई, उसे सुधारा नहीं जा सकता क्या?

वो कहते हैं, "जो गलती की है क्या उसे जिंदगी भर करते रहें, जब तक की दुनिया खत्म ना हो जाए?"

उन्होंने कहा, "जब जागे तभी सवेरा। मुझे अहसास हुआ कि औरतों का मजार के पास जाना ठीक नहीं है। उनका तो घर से बेपर्दा निकलना तक ठीक नहीं हैं, तो मजार के पास जाना तो बहुत दूर की बात है। हाईकोर्ट ने अगर ये फैसला सुनाया है कि जहां मर्द जा सकते हैं, वहां औरतें भी जा सकती हैं तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं।"

ट्रस्टियों ने बंद किया महिलाओं का जाना

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तृप्ति देसाई - फोटो : ANI

दूसरी तरफ तृप्ती देसाई का कहना है, "2011 से पहले तक महिलाएं दरगाह के अंदर मजार तक जाती थीं। अचानक से ट्रस्टियों ने उनका जाना बंद कर दिया। 2011 से पहले जहां तक महिलाएं जाती थीं, वहां तक महिलाएं फिर से जाएं, इसके लिए हमारा यह आंदोलन है।"

उन्होंने बताया कि उनकी हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी मुफ्ती मंजूर से बात हुई है और उन्होंने साफ मना किया है कि वो बिल्कुल वहां तक औरतों को नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि यह शरीयत के खिलाफ है।

तृप्ती देसाई ने आरोप लगाया कि मुफ्ती मंजूर झूठ बोलते हैं कि 2011 से पहले भी वहां महिलाएं नहीं जाती थीं।

उन्होंने कहा, "पहले लोग बोल रहे थे कि सिर्फ आप मंदिर में जा रही हैं, दरगाह में जाने की बात क्यों नहीं कर रही हैं, मुस्लिम बहनों के लिए क्यों नहीं आगे आ रही हैं। इसलिए अभी हम दरगाह के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इसके बाद केरल के सबरीमाला के ट्रस्टियों से बात करेंगे।"

(तृप्ती देसाई और अब्दुल सत्तार से बीबीसी संवाददाता मोहन लाल शर्मा की बातचीत पर आधारित)

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