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Tripura Violence: सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा पुलिस को लगाई फटकार, सोशल मीडिया पोस्ट पर नोटिस भेजने का मामला
Mon, 07 Feb 2022 06:17 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 07 Feb 2022 06:17 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को त्रिपुरा पुलिस को राज्य में कथित सांप्रदायिक हिंसा को लेकर किए गए एक पत्रकार के ट्वीट के संबंध में ट्विटर को जारी किए नोटिस पर कार्रवाई करने से रोक लगा दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
त्रिपुरा में कथित सांप्रदायिक हिंसा को लेकर पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले लोगों को नोटिस भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को त्रिपुरा पुलिस को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर अंतरिम रोक का आदेश जारी किया था। न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को आगाह किया कि अगर पुलिस ने लोगों को परेशान करना बंद नहीं किया तो गृह सचिव और संबंधित पुलिस अधिकारियों को समन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पत्रकार समीउल्लाह शब्बीर खान की याचिरा पर सुनवाई करते हुए की। खान ने त्रिपुरा पुलिस की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत पेश होने के लिए उन्हें जारी किए गए एक नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की है। पीठ ने इस दौरान कहा कि पुलिस अधीक्षक को सूचित करें कि इस तरह से लोगों को परेशान नहीं किया जाए। किसी को सुप्रीम कोर्ट आने की आवश्यकता क्यों पड़े? अगर यह उत्पीड़न नहीं है तो फिर इसे और क्या कहा जा सकता है।
पीठ ने कहा कि यदि हमें यह जानकारी मिली कि पुलिस अधीक्षक लोगों को नोटिस जारी करने आदेश का अनुपालन करने से बचने की कोशिश कर रहे हैं तो हम उन्हें अदालत के सामने बुलाएंगे और उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। पीठ ने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में हम गृह सचिव समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अदालत में पेश होने के लिए कहेंगे। जब एक बार शीर्ष अदालत ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है तो आपको भी जिम्मेदाराना रवैये का प्रदर्शन करना चाहिए।
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शब्बीर खान की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शाहरुख आलम ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को एक अंतरिम आदेश पारित किया था और पुलिस पर खान की ओर से किए गए ट्वीट को लेकर कोई कार्रवाई करने से रोक लगाई थी। उधर, राज्य सरकार के वकील ने अनुरोध किया कि मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि जब आपने आज पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है, तो मामले को स्थगित करने के अनुरोध का क्या मतलब है।
सुनवाई के अंत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दखल दिया और पीठ को आश्वासन दिया कि अदालत के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले में खान को पेश होने के नोटिस के संबंध में कोई और कदम न उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को त्रिपुरा पुलिस को राज्य में कथित सांप्रदायिक हिंसा को लेकर किए गए एक पत्रकार के ट्वीट के संबंध में ट्विटर को जारी किए नोटिस पर कार्रवाई करने से रोक लगा दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पत्रकार समीउल्लाह शब्बीर खान की याचिरा पर सुनवाई करते हुए की। खान ने त्रिपुरा पुलिस की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत पेश होने के लिए उन्हें जारी किए गए एक नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की है। पीठ ने इस दौरान कहा कि पुलिस अधीक्षक को सूचित करें कि इस तरह से लोगों को परेशान नहीं किया जाए। किसी को सुप्रीम कोर्ट आने की आवश्यकता क्यों पड़े? अगर यह उत्पीड़न नहीं है तो फिर इसे और क्या कहा जा सकता है।
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पीठ ने कहा कि यदि हमें यह जानकारी मिली कि पुलिस अधीक्षक लोगों को नोटिस जारी करने आदेश का अनुपालन करने से बचने की कोशिश कर रहे हैं तो हम उन्हें अदालत के सामने बुलाएंगे और उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। पीठ ने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में हम गृह सचिव समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अदालत में पेश होने के लिए कहेंगे। जब एक बार शीर्ष अदालत ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है तो आपको भी जिम्मेदाराना रवैये का प्रदर्शन करना चाहिए।
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शब्बीर खान की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शाहरुख आलम ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को एक अंतरिम आदेश पारित किया था और पुलिस पर खान की ओर से किए गए ट्वीट को लेकर कोई कार्रवाई करने से रोक लगाई थी। उधर, राज्य सरकार के वकील ने अनुरोध किया कि मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि जब आपने आज पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है, तो मामले को स्थगित करने के अनुरोध का क्या मतलब है।
सुनवाई के अंत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दखल दिया और पीठ को आश्वासन दिया कि अदालत के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले में खान को पेश होने के नोटिस के संबंध में कोई और कदम न उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को त्रिपुरा पुलिस को राज्य में कथित सांप्रदायिक हिंसा को लेकर किए गए एक पत्रकार के ट्वीट के संबंध में ट्विटर को जारी किए नोटिस पर कार्रवाई करने से रोक लगा दी थी।