त्रिपुरा: शांत समुदायों को भड़काने की साजिश, सोशल मीडिया पर गलत तथ्यों के साथ पेश किए जा रहे हैं वीडियो और तस्वीरें
मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने 31 अक्तूबर से दो नवंबर के बीच तीन दिन तक त्रिपुरा के हिंसाग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया था। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव से मुलाकात के लिए वक्त मांगा गया था, लेकिन वह संभव नहीं हो सका। अब पांच नवंबर को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से हिंसा की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की गई है...
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त्रिपुरा शांत क्षेत्र रहा है, वहां इससे पहले 'हिंदू-मुस्लिम' जैसी कोई बात नहीं हुई है। पहली बार जो कुछ हुआ है, उसका मकसद वहां के शांत समुदायों को आमने-सामने करने की साजिश है। खास बात ये है कि अगरतला से करीब 155 किलोमीटर दूर स्थित पानीसागर इलाके में विश्व हिंदू परिषद द्वारा 26 अक्तूबर को निकाली गई रैली के दौरान कुछ मस्जिदों व कई मुस्लिम व्यापारियों की दुकानों में तोड़फोड़ मचाई गई। इस बाबत ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (एआईएमएम) और जमाते इस्लामी हिंद सहित कई संगठनों ने त्रिपुरा का दौरा कर हिंसा होने के लिए ज़िम्मेदार कारणों का विशेषण कर एक रिपोर्ट तैयार की थी। जमाते इस्लामी हिंद के मीडिया एडवाइजर सैयद तनवीर अहमद बताते हैं, वहां पर हुई घटना में लोकल हिंदू शामिल नहीं थे, जैसा समझा जाता है। कुछ लोगों ने किसी के भड़कावे में आकर मस्जिद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। मस्जिद में आग लगाने की बात ठीक नहीं है। हां, कुरान व दूसरी वस्तुओं को इधर-उधर फेंक दिया गया था।
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद का नाम आया सामने
सोशल मीडिया में जैसा नुकसान बताया जा रहा है, वैसा कुछ नहीं है। लगभग 12 से 15 मस्जिदों में रखे सामान को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है। इसके अलावा 17 दुकानों में तोड़फोड़ की गई है। पुलिस ने उपद्रवियों को कंट्रोल नहीं किया। अगर समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो हिंसा को रोका जा सकता था। बतौर तनवीर अहमद, सरकार को नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। शनिवार को एआईएमएम अध्यक्ष नवेद हामिद और जमाते इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने एक प्रेसवार्ता की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि त्रिपुरा में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा व आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया है। इसमें बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) जैसे हिंदू संगठनों का हाथ है। नवेद हामिद ने कहा था कि मस्जिदें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इंजीनियर का दावा था कि ऐसी ही एक मस्जिद, जो पूरी तरह जल गई, वह एक सीआरपीएफ कैंप के अंदर स्थित थी। कई दूसरी मस्जिदों में भी नुक़सान पहुंचाया गया।
त्रिपुरा पुलिस की भूमिका संदिग्ध
मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने 31 अक्तूबर से दो नवंबर के बीच तीन दिन तक त्रिपुरा के हिंसाग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया था। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव से मुलाकात के लिए वक्त मांगा गया था, लेकिन वह संभव नहीं हो सका। अब पांच नवंबर को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से हिंसा की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की गई है। चूंकि इस हिंसा में त्रिपुरा पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है, इसलिए उसे जांच के दायरे में लाया जाए। हालांकि सैयद तनवीर अहमद कहते हैं कि एक थाना क्षेत्र ऐसा भी था जहां की कमान एक महिला पुलिस अधिकारी ने संभाल रखी थी। उन्होंने अपने क्षेत्र में हिंसा नहीं होने दी। बाकी दूसरे इलाके में हिंसा होती रही, लेकिन पुलिस ने सक्रियता नहीं दिखाई। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कुल 11 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिन जगहों पर हिंसा हुई, वहां उस इलाके से बाहर के लोग आए थे। जहां पर आगजनी हुई, वह बाहर से आए हुए लोगों के द्वारा की गई। हिंसा पर मुसलमानों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, इसलिए स्थिति बिगड़ने से बच गई। अगर दोनों समुदाय आमने-सामने आ जाते तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था। कई स्थानीय लोगों ने हिंसा रोकने का प्रयास किया।
'तोड़-मरोड़कर दिखाई जा रही हैं वीडियो और तस्वीरें'
इस घटना के बाद सोशल मीडिया में खौफ फैलाया जा रहा है, ये गलत है। वीडियो और तस्वीरें तोड़ मरोड़कर दिखाई जा रही हैं। ऐसे लोगों के ख़िलाफ कठोर कार्रवाई हो। ये बात सही है कि दोनों पक्षों के कुछ लोग तनाव के पक्ष में हैं। हिंदू-मुस्लिम समुदाय के अधिकांश लोग आज भी इस तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते। हिंसा में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें मुस्लिमों की दुकानों में आग लगाने के साथ ही एक हिंदू की दुकान को भी जलाने का प्रयास किया गया। ये अलग बात रही कि आरोपियों ने बाद में उस आग को बुझा दिया। त्रिपुरा में दोनों समुदाय शांति से रहना चाहते हैं। ऐसी घटनाओं में अगर 90 फीसदी मुस्लिम टारगेट हुए हैं तो उनमें दस प्रतिशत हिंदू भी होते हैं। वहां रहने वाले आम गैर-मुस्लिम लोग, मुसलमानों के बचाव में दंगाईयों के सामने खड़े हुए थे, ये भी नहीं भूलना चाहिए। सोशल मीडिया में गलत तरीके से पोस्ट डालने वालों के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई हो रही है। उन्हें नोटिस भेजा गया है। बतौर अहमद, इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। देश के कई हिस्सों में चुनाव हैं, इसलिए कुछ लोग जानबूझकर हिंदू- मुस्लिम के बीच अशांति फैलाना चाहते हैं।