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त्रिपुरा: मणिक सरकार ने गर्वनर को सौंपा इस्तीफा, माने जाते हैं देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 04 Mar 2018 03:22 PM IST
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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक सरकार ने रविवार को गवर्नर तथागत राय को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
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बता दें सीएम मणिक ने त्रिपुरा चुनाव में पार्टी की हार स्वीकार करते हुए अपना इस्तीफा सौंपा है। हालांकि नई सरकार बनने तक वह राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभालेंगे। राज्य में पिछले 25 साल से उनकी पार्टी की सरकार थी।
#ManikSarkar submitted his resignation as Tripura CM to Governor Tathagata Roy. Sarkar will continue as the CM until the new govt is sworn in. pic.twitter.com/NkQc8oUQ2Z
— ANI (@ANI) March 4, 2018विज्ञापन
भाजपा ने राज्य में शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। भाजपा ने यहां 43 सीटों पर जीत हासिल की है।
सरकार के जाने के साथ ही देश के सबसे गरीब और जनता के मुख्यमंत्री कहे जाने वाले माणिक का यह तमगा भी खत्म हो गया। मध्य वर्गीय परिवार में 1949 में पैदा हुए माणिक सरकार के पिता अमूल्य दर्जी थे और मां अंजली राज्य सरकार की कर्मचारी थीं। 19 साल में माकपा के सदस्य बन गए सरकार बीकॉम स्नातक थे।
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1978 में त्रिपुरा में पहली बार वामदलों की सरकार बनी और वह 1980 में पहली बार विधायक चुने गए। त्रिपुरा में 1993 से लगातार माकपा की सरकार थी। हालांकि माणिक सरकार 1998 में राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने लगातार चार चुनावों में शानदार जीत हासिल की।
उनकी सरकार को जनता की सरकार कहा जाता था। इस साल जनवरी में एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्हें भाजपा से चुनाव में तगड़ी चुनौती मिल सकती और वे हार भी सकते हैं तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया था कि चुनौती? सत्ता गंवा सकते हैं? जनता के पास जाइए और पूछिए, आपको सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। लेकिन उनके इस भरोसे को दो माह के अंदर ही जनता ने चकनाचूर कर दिया।
कार और मोबाइल तक नहीं
राज्य के सबसे ज्यादा वक्त तक मुख्यमंत्री रहे सरकार पर भ्रष्टाचार का एक आरोप तक नहीं लगा। हालांकि उनकी पार्टी पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। सादगी पसंद और स्वच्छ छवि के सरकार अपना वेतन और भत्ता पार्टी को दान में दे देते थे और पार्टी तथा पत्नी के वेतन से परिवार का गुजारा चलता था।
सरकार के पास अपनी कार यहां तक मोबाइल फोन भी नहीं है। उनके हलफनामे के अनुसार उनके पास करीब 4 हजार रुपये थे। उन्होंने आज तक कभी आयकर रिटर्न तक नहीं भरा। उनके पास कृषि योग्य या घर बनाने योग्य जमीन भी नहीं है। उनकी पत्नी पंचाली भट्टाचार्य सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। वह भी आने जाने या खरीदारी के लिए रिक्शे का इस्तेमाल करती हैं। सरकार दंपति अपने दादा के पुराने और छोटे घर में रहते हैं।