छात्रसंघ चुनावों में भी छाया रहेगा तीन तलाक-अनुच्छेद 370 का मुद्दा, कैसे निबटेगी एनएसयूआई?
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लोकसभा चुनाव 2019 में राष्ट्रवाद का मुद्दा भाजपा के लिए बहुत कारगर साबित हुआ। इस मुद्दे के सहारे उसने विपक्ष को मात देते हुए केंद्र में दोबारा सत्ता पाई और नरेंद्र मोदी को दोबारा देश का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। अब भाजपा समर्थित छात्र संगठन एबीवीपी भी इन्हीं मुद्दों को लेकर डूसू छात्र संघ चुनाव में उतर रहा है। संगठन छात्रों के बीच सभाओं को आयोजित करने से लेकर बड़े नेताओं के भाषणों के जरिए मुद्दे उठाने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वह इन मुद्दों से किस प्रकार निबटती है।
छात्र हितों पर लड़ेंगे चुनाव
एबीवीपी के द्वारा इन मुद्दों को उठाए जाने के सवाल पर एनएसयूआई अध्यक्ष नीरज कुंदन ने अमर उजाला से कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रवाद के झूठे मुद्दों की आड़ में बीजेपी पूरे देश में युवाओं की बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता की सच्चाई को छिपा रही है, एबीवीपी भी उन्हीं मुद्दों के सहारे छात्रों के हितों के मुद्दों से भागने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम छात्रों के बीच उन्हीं मुद्दों को उठाएंगे जिनसे उन्हें रोज जूझना पड़ता है। गरीब माता-पिता के बच्चों को पढ़ने और नौकरी के लिए अवसर नहीं हैं, लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि एबीवीपी का मुद्दा इस चुनाव में बहुत कारगर रहेगा।
नीरज कुंदन ने कहा कि बेरोजगारी युवाओं के सामने गंभीर सच्चाई है और वह मामले की गंभीरता समझ रहा है, इसलिए इस बार वह एबीवीपी के झांसे में नहीं आने वाला है। उन्होंने कहा कि हम 'एक यूनिवर्सिटी, एक स्टेटस' का मुद्दा उठायेंगे और छात्रों के हितों के मुद्दों पर ही उनसे समर्थन मांगेंगे।
नए कार्यक्रम
एनएसयूआई ने 'आवाज उठाओ, सीटी बजाओ' कार्यक्रम भी चलाने का निर्णय किया है। इसके तहत यूनिवर्सिटी में जगह-जगह पर कार्यक्रम कर छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाए जायेंगे और सीटी बजाकर युवा उनका समर्थन करेंगे। एनएसयूआई एबीवीपी के एक साल के कार्यकाल में हुए कामों की खामियों को भी छात्रों के सामने रखेगी।
छात्रों के लिए राष्ट्रवाद अहम
वहीं, एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख मोनिका चौधरी का कहना है कि कांग्रेस कभी यह समझ नहीं पाई कि देश का युवा क्या चाहता है? आज का युवा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करना चाहता। यही कारण है कि आज पूरा देश कश्मीर मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ा है। उसी प्रकार तीन तलाक विरोधी कानून पास करवाकर मोदी सरकार ने मुस्लिम बहनों को बड़ा न्याय दिया है। पढ़ा-लिखा मुस्लिम इस मामले पर केंद्र सरकार के साथ खड़ा है। वे छात्रों से इन मुद्दों पर भी समर्थन मांगेंगे।
मोनिका चौधरी ने कहा कि डूसू चुनाव में वे इन मुद्दों के साथ-साथ एबीवीपी के किये कामों को भी छात्रों के बीच रखेंगी। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में एबीवीपी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी और भवनों की व्यवस्था सुधारने में काफी काम किया है। दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष बसों की व्यवस्था कराई है। वे छात्रों से उनको दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर भी उनका समर्थन मांगेंगी।
पिछला चुनाव
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) का चुनाव 12 सितंबर को होना तय है। इसके लिए चार सितंबर को नामांकन की तारीख तय की गई है। पिछले चुनाव में एबीवीपी ने अध्यक्ष सहित तीन पदों पर बाजी मारी थी। जबकि एनएसयूआई एक पद पर जीत हासिल कर सकी थी। हालांकि, पिछला डूसू चुनाव काफी विवादित रहा था और ईवीएम के मुद्दे पर एनएसयूआई कोर्ट चली गई थी।