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हो जाएं सावधान: सामाजिक असमानता से बढ़ती है डिमेंशिया की बीमारी, उम्र बढ़ने के साथ होती हैं ये समस्याएं

Tue, 31 Dec 2024 04:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 31 Dec 2024 04:56 AM IST
सार

नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित करके मस्तिष्क स्वास्थ्य की समस्याओं के मूल कारणों का समाधान किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय सूचकांकों जैसे आय के आधार पर असमानता से आकार और जुड़ाव पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया। 

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Trinity College Dublin Ireland Research reveals social inequality increases incidence of dementia
डिमेंशिया का खतरा (सांकेतिक) - फोटो : istock

विस्तार

सामाजिक असमानता का मस्तिष्क में उन बदलावों से सीधा संबंध है, जो उम्र बढ़ने और डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश से जुड़े होते हैं। खासकर  निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डिमेंशिया के मरीजों के बढ़ने की संभावना अधिक है।

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यह खुलासा हुआ है ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन, आयरलैंड के शोध में। नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित करके मस्तिष्क स्वास्थ्य की समस्याओं के मूल कारणों का समाधान किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय सूचकांकों जैसे आय के आधार पर असमानता से आकार और जुड़ाव पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया। अध्ययन में शामिल लैटिन अमेरिका व अमेरिका के 2,100 से अधिक लोगों में से कुछ को अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां थीं और कुछ स्वस्थ थे। अध्ययन में पाया गया कि सामाजिक-आर्थिक असमानता मस्तिष्क की संरचना और कनेक्शन में बदलावों से सीधे तौर पर जुड़ी है। बदलाव उन मस्तिष्क क्षेत्रों में अधिक दिखाई दिए, जो याददाश्त और सोचने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होते हैं और जो उम्र बढ़ने व डिमेंशिया से प्रभावित होते हैं।
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उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती हैं मस्तिष्क की समस्याएं
शोध के अनुसार, अधिक असमानता का संबंध मस्तिष्क के छोटे आकार और कमजोर कनेक्शन से था। यह असर लैटिन अमेरिका में अधिक दिखाई दिया, खासकर टेम्पोरो-सेरेबेलर, फ्रोंटो-थैलेमिक और हिप्पोकैम्पल क्षेत्रों में। अल्जाइमर पीड़ित लैटिन अमेरिकी सर्वाधिक प्रभावित मिले। यह बताता है कि असमान समाज में उम्र बढ़ने से मस्तिष्क की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। ये असर व्यक्तिगत कारकों जैसे शिक्षा, उम्र, लिंग व संज्ञानात्मक क्षमता को ध्यान में रखने के बाद भी देखे गए।
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दिमाग का सेहत से है रिश्ता
अध्ययन ने इस बात को उजागर किया कि बड़े सामाजिक कारक जैसे सामाजिक और भौतिक वातावरण, मस्तिष्क स्वास्थ्य को स्वतंत्र रूप से प्रभावित करते हैं। इससे पता चलता है कि असमानता व्यक्तिगत कारकों से परे मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है।

  • लैटिन अमेरिकी मस्तिष्क स्वास्थ्य संस्थान (ब्रेनलैट), चिली की मुख्य शोधकर्ता अगुस्टिना लेगाज ने कहा कि अध्ययन दिखाता है कि असमानता जैविक रूप से मस्तिष्क को कैसे प्रभावित कर सकती है। ट्रिनिटी कॉलेज में वैश्विक मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रोफेसर अगुस्टिन इबानेज के मुताबिक, शोध ने मस्तिष्क स्वास्थ्य को सुधारने के लिए संरचनात्मक असमानता दूर करने के महत्व पर जोर दिया। जैसे-जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डिमेंशिया के मामले बढ़ रहे हैं, प्रत्येक क्षेत्र के लिए लक्षित प्रयासों की आवश्यकता है।
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