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कांग्रेस और टीएमसी नहीं चाहती भगवंत मान पर हो सख्त कार्रवाई
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 28 Jul 2016 04:25 AM IST
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- फोटो : ANI
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आप सांसद भगवंत मान द्वारा की गई संसद की वीडियोग्राफी मामले में लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित नौ सदस्यीय जांच समिति कार्रवाई के सवाल पर बंट सकती है। दरअसल समिति में शामिल ज्यादातर सदस्य मान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के इच्छुक हैं।
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जबकि कांग्रेस और टीएमसी का रुख थोड़ा नरम है। जांच समिति में शामिल इन दोनों दलों के सदस्यों को पार्टी नेतृत्व की ओर से कार्रवाई के मामले में नरम रुख अपनाने का निर्देश मिला है। रिपोर्ट को अंतिम रूप देते समय इन दोनों ही दलों के सदस्य समिति के समक्ष सांकेतिक कार्रवाई का सुझाव रखेंगे।
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दोनों ही दलों के नेतृत्व का तर्क है कि चूंकि मान ने इस मामले में माफी मांग ली है। इसके अलावा मान की हरकत संदिग्ध न हो कर अपरिपक्व था। हालांकि समिति में शामिल भाजपा, अन्नाद्रमुक और बीजेडी के सदस्य कठोर कार्रवाई के हक में हैं।
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समिति की अब तक हुई दो बैठकों में सबसे पहले वीडियो की पड़ताल की गई। इसके बाद इस पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर सहित सुरक्षा विशेषज्ञों की राय ली गई है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर और सुरक्षा विशेषज्ञ मान के कृत्य को बेहद गंभीर मान रहे हैं।
इनका मानना है कि वीडियो के कारण संसद की सुरक्षा की नए सिरे से तैयारी करनी होगी। जांच समिति में शामिल भाजपा के एक सदस्य के मुताबिक मान ने न सिर्फ वीडियो बना कर संसद की सुरक्षा को दांव पर लगाया, बल्कि यह कह कर हेठी भी दिखाई कि वह दोबारा वीडियो बना कर फेसबुक पर डालेंगे। इसका अर्थ यह है कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।
इसके अलावा वह इस मामले में प्रधानमंत्री को घसीट कर राजनीति भी कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का मामला बनता है। गौरतलब है कि मान ने मंगलवार को स्पीकर सुमित्रा महाजन को पत्र लिख कर जांच समिति का दायरा बढ़ाने और पठानकोट हमले की जांच के लिए आई पाकिस्तानी जांच टीम को एयरबेस में जाने की अनुमति दिए जाने के मामले में प्रधानमंत्री को भी समन करने की मांग की थी।
मान ने कहा था कि चूंकि जांच टीम में आतंकी हमला करने वाली पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के भी अधिकारी थे। ऐसे में प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा को दांव पर लगाया। मान के इस हमले से भाजपा काफी नाराज है। हालांकि टीएमसी और कांग्रेस इस मामले में कठोर कार्रवाई की सिफारिश पर सहमति दे कर भाजपा के साथ खड़ा दिखना नहीं चाहती।