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Tribal Pride Day: वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों को बताया भारत का मूल निवासी, इतिहास की गलती का खुलासा
Sun, 26 Nov 2023 10:39 PM IST
शक्तिराज सिंह
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 26 Nov 2023 10:39 PM IST
सार
कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के प्रशासनिक अधिकारी अनिल वर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता पूर्व निगम पार्षद और समाजसेवी रमेश पहलवान ने की।
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वनवासी कल्याण आश्रम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वनवासी कल्याण आश्रम के दक्षिणी विभाग और दिल्ली प्रांत के आर.के.पुरम विभाग द्वारा रविवार को जन जातीय गौरव दिवस का आयोजन किया गया। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम नेहरू नगर के जी.एल.टी सरस्वती बाल मंदिर सेकेंडरी स्कूल में हुआ।
कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के प्रशासनिक अधिकारी अनिल वर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता पूर्व निगम पार्षद और समाजसेवी रमेश पहलवान ने की। आयोजन के मुख्य वक्ता दिल्ली प्रांत के उपाध्यक्ष तिलक चांदना थे। इस दौरान वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत सह सचिव सी.ए.कैलाश जोशी, दिल्ली प्रांत की कार्यकारिणी सदस्य डॉ.नीतू मोनी ककाती और दक्षिण विभाग के सचिव सुनील वर्मा भी मौजूद थे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तिलक चांदना ने वनवासी और आदिवासी के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि, ये दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं है। बल्कि इतिहास में ब्रिटिश शासन के दौरान इतिहास लेखन में हुई त्रुटियों के परिणामस्वरूप इन शब्दों को एक दूसरे का पर्याय माना गया। जबकि ऐसा नहीं है। आदिवासी भारत का मूल निवासी है। इस दौरान उन्होंने प्राचीन काल, मध्यकाल और आधुनिक काल में जनजातीय लोगों के गौरवपूर्ण इतिहास पर भी प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता की कर रहे पूर्व निगम पार्षद और समाजसेवी रमेश पहलवान ने कार्यक्रम में आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि, प्रत्येक व्यक्ति को समाज के लिए उत्तरदायी होना चाहिए। अपने गांव समाज से जुड़ा रहना चाहिए। समारोह में भारत के विभिन्न गांव से आए लोगों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, हर व्यक्ति की जड़ें गांवों से जुड़ी हैं। दिल्ली सरकार के अधिकारी अनिल वर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी की सराहना की।
समारोह की शुरुआत मंत्रो उच्चारण के बीच दीप प्रज्वलन के साथ हुई। एकल गीत के साथ कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। इस दौरान डॉ.सीमा और डॉ.मेखला ने सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी। विनोद बोहरा ने वनवासी वीरों पर आधारित देश भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा यतिका शर्मा ने ओडिशा और ग्लोरी साकिया ने असम का लोक नृत्य प्रस्तुत किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चिराग और उनकी टीम ने दार्जिलिंग लोक गीत की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों का सम्मान डॉ.सुमित दहिया, सुरजीत, डॉ.अर्चना, डॉ.एंजेला, डॉ. सीमा, डॉ.मेखला, डॉ.विनोद और बदरपुर जिले के अध्यक्ष मनमोहन ने किया। अतिथियों को जनजातीय गौरव पुस्तक देकर सम्मानित भी किया गया। मंच पर मौजूद अतिथियों का परिचय दक्षिण विभाग के सचिव सुनील वर्मा कराया। इस दौरान आर.के.पुरम विभाग के प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने वन्दे मातरम् गीत प्रस्तुत किया। जबकि दक्षिणी विभाग के सह सचिव डॉ.नितिन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच का संचालन डॉ दीपक कुजूर ने किया। समारोह में भगवान बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी क्रांतिकारियों पर वृत्तचित्र पर प्रदर्शनी भी विशेष तौर पर लगाई गई थी।
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कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के प्रशासनिक अधिकारी अनिल वर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता पूर्व निगम पार्षद और समाजसेवी रमेश पहलवान ने की। आयोजन के मुख्य वक्ता दिल्ली प्रांत के उपाध्यक्ष तिलक चांदना थे। इस दौरान वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत सह सचिव सी.ए.कैलाश जोशी, दिल्ली प्रांत की कार्यकारिणी सदस्य डॉ.नीतू मोनी ककाती और दक्षिण विभाग के सचिव सुनील वर्मा भी मौजूद थे।
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तिलक चांदना ने वनवासी और आदिवासी के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि, ये दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं है। बल्कि इतिहास में ब्रिटिश शासन के दौरान इतिहास लेखन में हुई त्रुटियों के परिणामस्वरूप इन शब्दों को एक दूसरे का पर्याय माना गया। जबकि ऐसा नहीं है। आदिवासी भारत का मूल निवासी है। इस दौरान उन्होंने प्राचीन काल, मध्यकाल और आधुनिक काल में जनजातीय लोगों के गौरवपूर्ण इतिहास पर भी प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता की कर रहे पूर्व निगम पार्षद और समाजसेवी रमेश पहलवान ने कार्यक्रम में आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि, प्रत्येक व्यक्ति को समाज के लिए उत्तरदायी होना चाहिए। अपने गांव समाज से जुड़ा रहना चाहिए। समारोह में भारत के विभिन्न गांव से आए लोगों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, हर व्यक्ति की जड़ें गांवों से जुड़ी हैं। दिल्ली सरकार के अधिकारी अनिल वर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी की सराहना की।
समारोह की शुरुआत मंत्रो उच्चारण के बीच दीप प्रज्वलन के साथ हुई। एकल गीत के साथ कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। इस दौरान डॉ.सीमा और डॉ.मेखला ने सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी। विनोद बोहरा ने वनवासी वीरों पर आधारित देश भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा यतिका शर्मा ने ओडिशा और ग्लोरी साकिया ने असम का लोक नृत्य प्रस्तुत किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चिराग और उनकी टीम ने दार्जिलिंग लोक गीत की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों का सम्मान डॉ.सुमित दहिया, सुरजीत, डॉ.अर्चना, डॉ.एंजेला, डॉ. सीमा, डॉ.मेखला, डॉ.विनोद और बदरपुर जिले के अध्यक्ष मनमोहन ने किया। अतिथियों को जनजातीय गौरव पुस्तक देकर सम्मानित भी किया गया। मंच पर मौजूद अतिथियों का परिचय दक्षिण विभाग के सचिव सुनील वर्मा कराया। इस दौरान आर.के.पुरम विभाग के प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने वन्दे मातरम् गीत प्रस्तुत किया। जबकि दक्षिणी विभाग के सह सचिव डॉ.नितिन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच का संचालन डॉ दीपक कुजूर ने किया। समारोह में भगवान बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी क्रांतिकारियों पर वृत्तचित्र पर प्रदर्शनी भी विशेष तौर पर लगाई गई थी।