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SC: बसपा के पूर्व विधायक पर ट्रायल कोर्ट का निर्णय खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केस वापस लेना जनहित में नहीं

Wed, 17 Jul 2024 05:01 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Wed, 17 Jul 2024 05:01 AM IST
सार

बसपा के पूर्व विधायक और दोहरे हत्याकांड के आरोपी छोटे सिंह के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अच्छी छवि के नाम पर विधायक से हत्या का मुकदमा वापस लेना जनहित में नहीं होगा।






 

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Trial court's decision on former BSP MLA rejected by SC
Supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई आरोपी विधायक के रूप में निर्वाचित हो गया, तो इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि आम जनता में उसकी अच्छी छवि है। अच्छी छवि के आधार पर किसी विधायक के खिलाफ मुकदमा वापस लेना जनहित में नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें 1994 के दोहरे हत्याकांड के आरोपी छोटे सिंह के खिलाफ मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी गई थी। छोटे सिंह को 2007 में यूपी की कालपी विधानसभा सीट से बसपा विधायक चुना गया था।
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अदालत ने कहा कि 19 मई, 2012 को पारित आदेश में ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन वापस लेने की अनुमति देकर लापरवाही बरती। वर्तमान मामले में दोहरे हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध के मामले में गहन जांच के बाद आरोप पत्र में नामित आरोपी की अच्छी सार्वजनिक छवि के आधार पर अभियोजन वापस लेना सही नहीं है। मृतकों में से एक के बेटे शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव की ओर से याचिका दायर की गई थी। अपीलकर्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से अभियोजन वापस लेने के आदेश के विरुद्ध 2012 की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में बार-बार स्थगन से व्यथित था।  
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केस वापसी... राजनीतिक शक्ति का किया इस्तेमाल
पीठ ने कहा, हमारे देश की न्यायिक प्रणाली अकसर कानूनी कार्यवाही में लंबे समय तक देरी और संदिग्ध राजनीतिक प्रभाव के व्यापक मुद्दों से जूझती है। शक्तिशाली व्यक्तियों की ओर से अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल स्थिति को और जटिल कर देता है। इससे निष्पक्षता के बारे में चिंताएं पैदा होती हैं। ट्रायल कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि आरोपी के खिलाफ केस वापसी के लिए राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल किया गया है।
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बाकी नौ आरोपियों पर शीघ्र फैसला ले हाईकोर्ट
अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के विचार के विपरीत, इस तरह की वापसी को जनहित में अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रायल कोर्ट के तर्क को विशेष रूप से प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता वाले मामलों में स्वीकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने इस मामले में हाईकोर्ट से कहा कि वह शेष नौ आरोपियों के लंबित आवेदनों पर शीघ्र निर्णय ले, जिन्होंने पूर्व विधायक के साथ समानता की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राजनीतिक प्रभाव या किसी अन्य बाहरी कारकों के कारण न्याय में और देरी या समझौता न हो। पीठ ने कहा, मुकदमे की कार्यवाही में यह गतिरोध बहुत परेशान करने वाला है। स्थिति की गंभीरता और न्याय के हनन के जोखिम को देखते हुए, तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
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