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Earthquake: आखिर क्यों कांप रही है दिल्ली से किश्तवाड़ तक की धरती? उत्तर भारत में किसी बड़े भूकंप की आहट!

Sun, 07 Apr 2024 07:13 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 07 Apr 2024 07:13 PM IST
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सार
दिल्ली में भूकंप के झटके के बाद किश्तवाड़ की धरती लगातार कांप रही है। बीते चार दिनों में बड़े संकेत मिले हैं। तब से किश्तवाड़ की धरती में 8 से ज्यादा बार कंपन हो चुका है।  
 
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tremors are being felt in Kishtwar After earthquake in Delhi on April 3
लगातार कांप रही धरती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते चार दिन से उत्तर भारत के नीचे की धरती में कुछ हलचल हो रही है। हलचल का असर यह है कि दिल्ली से लेकर किश्तवाड़ तक तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा बार जमीन कांप चुकी है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक जिस हिस्से में बीते कुछ दिन से जमीन में कंपन हो रहा है, वह पहले से ही भूकंप के लिए सबसे खतरनाक इलाका का माना जाता है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक चार दिनों के भीतर दिल्ली से लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ इलाके में अब तक पंद्रह से ज्यादा बार धरती थरथरा चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा कंपन जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ इलाके में हो रहा है। 



तीन अप्रैल को दिल्ली में आए थे हल्के झटके
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर भारत के हिस्से में धरती के कांपने का सिलसिला दिल्ली से शुरू हुआ। तीन अप्रैल को दिल्ली में बहुत हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर महज 2.1 ही आंकी गई थी। तीन अप्रैल को दिल्ली से शुरू हुआ यह भूकंप का सिलसिला अब तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में बदस्तूर जारी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा किश्तवाड़ इलाके में धरती के कांपने का सिलसिला शुरू हुआ। इसमें सिर्फ जम्मू कश्मीर के इलाके ही नहीं बल्कि लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के हिस्से भी शामिल थे।


सबसे ज्यादा भूकंप बीते चार दिनों के भीतर जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ इलाके में आया है। चार अप्रैल को किश्तवाड़ में 3.2 की तीव्रता का भूकंप इस इलाके में आया। उसके बाद चार तारीख को ही 1 बजे 2.9 की तीव्रता का भूकंप इस इलाके में महसूस किया गया। 5 अप्रैल को भी किश्तवाड़ में रात 2 बजे के करीब 3.2 की तीव्रता का झटका महसूस किया गया। 5 अप्रैल को तो सबसे ज्यादा किश्तवाड़ में झटके महसूस किए जाने लगे। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक 5 अप्रैल को किश्तवाड़ में चार झटके भूकंप के महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 2.9 से लेकर 4.0 तक की आंकी गई। उसके बाद 6 अप्रैल को दिन में 2 बजे एक बार फिर 3.8 की तीव्रता का भूकंप किश्तवाड़ में महसूस किया गया। जबकि 7 अप्रैल को भी किश्तवाड़ में 3.5 की तीव्रता का भूकंप आया। 

किसी बड़ी हलचल की गवाही
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक सिर्फ किश्तवाड़ ही नहीं, बल्कि लद्दाख के करेल इलाके में भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। इस इलाके में 6 अप्रैल को लगातार दो बार झटके महसूस किए गए। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के डोडा और हिमाचल के चंबा में भी भूकंप की तीव्रता आंकी गई है। बीते इन चार दिनों के भीतर सबसे ज्यादा भूकंप की तीव्रता 4 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के चंबा में आंकी गई थी, इस दौरान यहां पर 5.3 की तीव्रता का बड़ा झटका महसूस हुआ था। इस भूकंप का असर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और दिल्ली में भी महसूस किया गया था। भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक यह झटका धरती के भीतर हो रही किसी बड़ी हलचल की गवाही दे रहे हैं।

वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक चंद्रकांत पाल के मुताबिक जिस इलाके में भूकंप के झटके महसूस हो रहे हैं, वह पहले से ही सीस्मिक जोन की चतुर्थ श्रेणी के हिस्से में आता है। यानी यह इलाका पहले से ही भूकंप के लिए खतरनाक है। हालांकि वह कहते हैं कि सीस्मिक जोन के खतरनाक श्रेणी वाले हिस्सों में लगातार आने वाले भूकंप का मतलब होता है कि धरती के अंदर बन रही ऊर्जा निकल रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जम्मू कश्मीर के जिस हिस्से में बीते कुछ दिनों से धरती के भीतर कंपन हो रहा है, वह लंबे अरसे बाद इतनी फ्रीक्वेंसी के साथ देखा गया है। इसलिए यह चिंता की बात भी हो सकती है। वह कहते हैं कि सिर्फ उत्तर भारत के इस इलाके में ही नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में जिस तरीके के भूकंप की संख्या बीते कुछ दिनों में ज्यादा बढ़ी है, जो निश्चित तौर पर चिंता बढ़ाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में खासतौर से जो सीस्मिक जोन की श्रेणी में आते हैं, वहां पर पिछले कुछ दिनों में भूकंप आने की सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। 

पानीपत के पास फॉल्ट लाइन मौजूद
भूगर्भशास्त्रियों के मुताबिक दरअसल दिल्ली से थोड़ी दूर स्थित पानीपत इलाके के पास भूगर्भ में फॉल्ट लाइन मौजूद है। जिसके चलते भविष्य में किसी बड़ी तीव्रता वाले भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली-एनसीआर में जमीन के नीचे मुख्यतया पांच लाइन दिल्ली-मुरादाबाद, दिल्ली-मथुरा, महेंद्रगढ़-देहरादून, दिल्ली-सरगौधा रिज और दिल्ली-हरिद्वार रिज मौजूद है। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली-हरिद्वार कगार, महेंद्र गढ़-देहरादून भ्रंश, मुरादाबाद भ्रंश, सोहना भ्रंश, ग्रेट बाउंड्री भ्रंश, दिल्ली-सरगोडा कगार, यमुना तथा यमुना-गंगा नदी की दरार रेखाएं जैसे कमजोर क्षेत्र और फॉल्ट स्थित हैं। इन कमजोर क्षेत्रों तथा भ्रंशों से आंतरिक तनाव और ऊर्जा बाहर निकल सकती है और किसी बड़े भूकंप का कारण बन सकती है।

7 टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है धरती की ऊपरी सतह
धरती मुख्यत: चार परतों से बनी हुई है। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मेनटल कोर को लिथोस्फेयर कहा जाता है। अब ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। यानि धरती की ऊपरी सतह 7 टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है। ये प्लेटें कभी भी स्थिर नहीं होतीं। ये लगातार हिलती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक दूसरे की तरफ बढ़ती हैं, तो इनमें आपस में टकराव होता है। कई बार ये प्लेटें टूट भी जाती हैं। इनके टकराने से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे इलाके में हलचल होती है। कई बार ये झटके काफी कम तीव्रता के होते हैं, इसलिए ये महसूस भी नहीं होते। जबकि कई बार इतनी ज्यादा तीव्रता के होते हैं, जिससे धरती फट भी जाती है और बड़ी तबाही भी मचाती है।

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