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ताजमहल के 'हरे दाग' का इलाज हुआ शुरू, की जा रही खास थेरेपी
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 28 Jun 2016 03:43 AM IST
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संगमरमरी दीवारों से ‘दाग’ छुड़ाने की कवायद शुरू हो गई है।
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ताजमहल पर काइरोनोमस कीड़ों के हमले से हरी हुई संगमरमरी दीवारों से ‘दाग’ छुड़ाने की कवायद शुरू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचे इस मामले में एएसआई की केमिकल ब्रांच ने यमुना किनारे की हरी दीवारों पर मडपैक थेरेपी शुरू कर दी है। ताज की मीनारों के बाद आर्च के अंदरूनी हिस्से और दीवारों पर जमा गंदगी और हरे दागों को हटाने का काम तीन महीने तक चल सकता है।
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पीले पड़ते ताजमहल की दीवारें अप्रैल के तीसरे सप्ताह में यमुना के प्रदूषण में पनपे काइरोनोमस कीड़ों के कारण हरी हो गईं। देश और दुनिया में यह मामला उठा तो एएसआई ने तमाम पड़ताल और रिसर्च के बाद अब नम मौसम में हरे दागों की छुड़ाने की कवायद शुरू कर दी है। यमुना किनारे साइंस ब्रांच ने आर्च में पैड लगवाने का काम तेज कर दिया है। ताज की उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिमी मीनारों के मडपैक के बाद आर्च ही साफ किए जाएंगे। मुख्य गुंबद के बाद संगमरमरी प्लेटफार्म पर भी हरे दागों को छुड़ाने के लिए मडपैक थेरपे की जाएगी।
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बता दें कि यमुना नदी में भारी प्रदूषण के कारण 20 अप्रैल से काइरोनोमस कीड़ों का पनपना शुरू हुआ। इन कीड़ों के स्राव से दीवारों पर हरे, काले रंग के धब्बे पड़ने शुरू हो गए। एएसआई साइंस ब्रांच अधीक्षण पुरातत्वविद केमिकल डा. एम के भटनागर ने सैंपल लेकर इसकी जांच कराई और यमुना में प्रदूषण रोकने तथा मडपैक की सिफारिश की। बाद में यह मामला समाजसेवी डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी उठाया।
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मडपैक स्थाई समाधान नहीं, प्रदूषण पर रोक जरूरी
एएसआई साइंस ब्रांच के मुताबिक ताज पर मडपैक स्थाई समाधान कतई नहीं है। हरे दागों को साफ कर दिया जाएगा, लेकिन अगले साल गर्मी में या अक्तूबर में फिर से कीड़ों का हमला हुआ तो फिर कितनी बार मडपैक कराया जाएगा। डीएम के निर्देश पर बनी एडीएम की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने भी यमुना में प्रदूषण रुकवाने की संस्तुति की थी। यमुना में प्रदूषण रोकने और ताज के पीछे यमुना नदी में पानी का बहाव बरकरार रखने पर कीड़ों का प्रकोप रुक सकता है।