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कोरोना वायरस: बंदी की भेंट चढ़ा रेलवे की मेंटेनेंस का कारोबार, लॉन्ड्री की जगहों पर पसरा है सन्नाटा

Sat, 28 Mar 2020 01:08 PM IST
श्रीधर मिश्रा नेश्नल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
नेश्नल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Sat, 28 Mar 2020 01:08 PM IST
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Tran maintenance work stalled due to stoppage of railway operations
वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के वाशिंग लाइन पर खड़ी महाकाल एक्सप्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सरकार ने पूरे देशभर में लॉकडाउन कर दिया है। ऐसे में भारतीय रेलवे पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है, जो इन दिनों रुक गई है। इस बंदी का असर कई कॉन्ट्रैक्टर और प्राइवेट कर्मचारियों पर भी देखने को मिल रहा है। बात करें भोपाल की तो यहां मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री पूरी तरह से बंद हो चुकी है। दरअसल यहां कई ट्रेनों के कंबल, चादर, तकिये धोने के लिए आते हैं। इसके अलावा यहां इनके कवर को भी धुला जाता है। लेकिन लॉकडाउन के बाद अब यहां का काम बंद हो चुका है। यहां बंदी से पहले आए कपड़ों को धुल कर रख दिया गया है। वहीं, कर्मचारियों को घर वापस जाने के लिए भेज दिया गया है।

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मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री कब खुलेगी इस पर ऑफिशियल्स का कहना है कि अभी, यह तय नहीं है कि जब रेलवे का फंक्शन वापस से शुरू होगा तब यात्रियों को चादर या कंबल देना है या नहीं। ऐसे में रेलवे बोर्ड की तरफ से जो गाइड लाइन जारी की जाएगी उसका पालन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह रेलवे की तरफ से गाइड लाइन जारी करने के बाद ही पता चलेगा कि जब दोबोरा ट्रेनें चलने लगेंगी तो यात्रियों को कंबल और चादर देना है या नहीं। 
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यहां आपको बता दें कि रेलवे में चादर, कंबल, तकिया आदी की धुलाई का काम प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए होती है। ऐसे में बंदी के बाद ट्रेनों के कंबल, तकिये, चादर और कवर को धोकर रेलवे के हवाले कर दिया गया है और कर्मचारियों को घर भेज दिया गया है।
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भोपाल मंडल से शुरू होने वाली ट्रेनों की बात करें तो यहां एक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री से 11 ट्रेनों में करीब 4 हजार लिनेन की सप्लाई की जाती है। इसमें कंबल, चादर और तकियों के साथ कवर भी शामिल होते हैं। बता दें कि इस यूनिट में चादर और तकियों के कवर को हर दिन धुला जाता है। वहीं, हर 15 दिनों में कंबल की धुलाई होती है। यही हाल भोपाल से शुरू होने वाली सभी 17 ट्रेनों का है, जिनके रैक के मेंटेनेंस का काम बंदी के चलते बंद हो रखा है। इस काम को भी प्राइवेट कांट्रेक्टरों को दिया जाता है।

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