ट्राई की दो टूक, डाटा पर कपंनियों का नहीं ग्राहकों का है अधिकार
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डाटा सुरक्षा पर दूरसंचार नियामक ट्राई ने केंद्र सरकार को भेजी गई सिफारिशों में मौजूदा कानून पर सवाल खड़े किए हैं। उसने कहा है कि डाटा पर सिर्फ उपभोक्ता का हक है। निजी कंपनियों द्वारा डाटा एकत्र किया जाना अधिकार से परे है। नियामक ने दूरसंचार विभाग को भेजी गई सिफारिशों में कानून बनाने की सिफारिश की है ताकि निजी कंपनियों के डाटा इकट्ठा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगे।
ट्राई ने डाटा की निजता, सुरक्षा और मालिकाना हक पर भेजी गई सिफारिशों में कहा है कि मौजूदा डाटा संरक्षण कानून समुचित नहीं है। ग्राहकों के डाटा का गलत इस्तेमाल होने का खतरा है। ऐसे में डाटा संरक्षण को लेकर सरकार नियम बनाए। ऐसा तब तक के लिए किया जाए, जब तक कानून नहीं बन जाता। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि निर्धारित किए गए नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
मोबाइल, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउसर के लिए सरकार नियमों का निर्धारण करे ताकि डाटा का गलत इस्तेमाल किसी भी तरह से नहीं किया जा सके। नियामक ने कहा कि ग्राहकों के पास डाटा का पूर्ण अधिकार हो, वह किसी को अपना डाटा संजोने या रखने की मंजूरी दे सके या फिर पूरी तरह से निजी रखे। इसके साथ ही कंपनियां उपभोक्ताओं की निजता को बनाए रखें। इसकी व्यवस्था सरकार द्वारा नियम बनाकर की जाए।
ट्राई ने पिछले साल एक परामर्श पत्र जारी किया था जिसके बाद इस साल फरवरी में खुली चर्चा भी हुई थी। वह इस मुद्दे पर अपने विचारों को न्यायाधीश बीएन कृष्णा समिति के साथ भी साझा करेगा। यह समिति देश में डाटा संरक्षण की रूपरेखा पर काम कर रही है। विशिष्ट पहचान पत्र आधार के डाटा पर सवाल उठने के बाद सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया था। डाटा की गोपनीयता, सुरक्षा व स्वामित्व पर कानून बनाने की कवायद के बीच ट्राई ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपी है।
हर निशानी को खत्म करने का हक दिया जाए
ट्राई ने कहा है कि ग्राहकों को यह अधिकार भी मिलना चाहिए कि डिजिटल दुनिया में वह जब तक रहना चाहते हैं रहें अन्यथा उनकी हर निशानी खत्म करने या मिटाने की व्यवस्था अधिकार के साथ मिले। हैंडसेट बेचने से पहले उपभोक्ता को सारी जानकारी मुहैया कराई जाए।
कंपनियों को उपभोक्ता क्या मंजूरी दे रहा है या नहीं दे रहा है, इस संबंध में स्पष्ट तौर पर करार हो, जिसे कानून बनने तक नियम बनाकर स्पष्ट किया जाए। अगर कंपनी डाटा का इस्तेमाल करें तो वह उपभोक्ता को सूचित कर बताएं कि आखिर किस कारण उनका डाटा प्रयोग में लाया जा रहा है।
इनबिल्ट एप को हटाने का अधिकार भी मिले
ट्राई ने यह भी सिफारिश की है कि हैंडसेट में आने वाले इनबिल्ट एप को हटाने का अधिकार भी उपभोक्ता को दिया जाए। यह सुविधा उन्हें डाटा सुरक्षा और निजता के मद्देनजर मिलनी चाहिए। साथ ही सरकार डाटा इनक्रिप्शन के लिए राष्ट्रीय नीति लाए। डाटा लीक होने की घटनाओं की जानकारी या सूचना मुहैया कराने के लिए एक पोर्टल बनाया जाए। इसमें सभी कंपनियां (सरकारी या निजी) हिस्सा बने और डाटा लीक की जानकारी देने वालों को इनाम देने की व्यवस्था की जाए ताकि इसके प्रति लोगों में जागरूकता आए।