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TP Chandrasekharan Case: केरल उच्च न्यायालय में एक बार फिर सुनवाई, आरोपियों की सजा को बढ़ाने की मांग

Tue, 27 Feb 2024 02:14 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 27 Feb 2024 02:14 AM IST
सार

हत्या का मामला चार मई 2012 का है, जब चंद्रशेखरन (52) बाइक से अपने घर जा रहे थे। इस वक्त आरोपियों ने उनपर हमला कर जिया और उनकी हत्या कर दी। केरल की तत्कालीन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने हत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित की थी।

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TP Chandrasekharan Murder Case Hearing Kerala High Court
केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

टीपी चंद्रशेखरन हत्या मामले में केरल उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई अभियोजन पक्ष की याचिका पर हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को दी गई सजा को बढ़ाने की मांग की है। मामला 2012 का है। न्यायमूर्ति एके जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने एक-एक करके आरोपियों से भी बात की, कि आखिर क्यों उनकी सजा को बढ़ाया न जाए। मंगलवार को भी मामले में सुनवाई होगी।

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पहले जानिए, क्या है पूरा मामला 
हत्या का मामला चार मई 2012 का है, जब चंद्रशेखरन (52) बाइक से अपने घर जा रहे थे। इस वक्त आरोपियों ने उनपर हमला कर जिया और उनकी हत्या कर दी। केरल की तत्कालीन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने हत्या की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित की थी। 2014 में कोझिकोड अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 11 आरोपियों को आजीवन कारावास और अन्य आरोपियों को अलग-अलग जेल की सजा सुनाई थी। दोषियों में सीपीएम नेता केसी रामचंद्रन और दिवंगत कुन्हानंदन भी शामिल हैं। बता दें, चंद्रशेखरन रिवॉल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी (आरएमपी) नेता थे।  

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19 फरवरी को पीठ ने आरोपियों की सजा को रखा था बरकरार
उच्च न्यायालय ने मामले में 19 फरवरी को दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली दोषियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। पीठ ने हत्या मामले में दो दोषियों को बरी करने वाले निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था। उच्च न्यायालय ने आपराधिक साजिश के लिए दोनों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। 

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अदालत ने इन दोषियों की सजा को बरकरार रखा
अदालत ने हत्या के लिए अनूप, मनोज उर्फ किरमानी मनोज, एनके सुनील उर्फ कोडी सुनी, टीके राजीव, केके मुहम्मद शफी, एस सिजित, के शिनोज, केसी रामंचंद्रन, मनोज और कुन्हानंदन को दोषी ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि इन याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान कुन्हानंदन की मौत हो गई थी। 

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