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नौकरियां बढ़ानी हों तो ये काम करे सरकार, औद्योगिक संगठन ने दिया सुझाव
Sat, 25 May 2019 06:56 AM IST
गौरव द्विवेदी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 25 May 2019 06:56 AM IST
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फिक्की (फाइल फोटो)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने दूसरे कार्यकाल में सबसे बड़ी चुनौती घरेलू औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने की होगी। इससे न सिर्फ निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे नौकरियां भी पैदा होंगी जो सरकार के पिछले कार्यकाल में उनकी सबसे बड़ी चिंता के कारण बने थे। इसी बीच शुक्रवार को सरकार के साथ बजट पूर्व बैठक में औद्योगिक संगठनों ने सरकार से कार्पोरेट टैक्स घटाने का सुझाव दिया है। संगठनों ने कार्पोरेट टैक्स घटाकर 25 फीसद करने की मांग की है।
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औद्योगिक कंपनियों के संगठन फिक्की ने सरकार से अपील की है कि कार्पोरेट टैक्स की दर मौजूदा 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाए। इससे कंपनियों के पास ज्यादा पूंजी बचेगी जो वे अपने नए उद्योगों में लगाएंगी। इससे न सिर्फ उद्योग सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे नई नौकरियों के अवसर भी बनेंगे।
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फिक्की के एक अधिकारी ने कहा कि विश्व के ज्यादातर देशों में 25 फीसद का कार्पोरट टैक्स लगाया जाता है। जबकि भारत में 250 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए यह दर तीस फीसदी है। इस सेक्टर में भारत की ज्यादातर कंपनियां आ जाती हैं क्योंकि आज के दौर में 250 करोड़ रुपये का टर्नओवर बहुत बड़ी बात नहीं है। इतना ही नहीं, इसके बाद पांच फीसद का अतिरिक्त सरचार्ज भी लगाया जाता है। अगर कंपनियों की आय वार्षिक एक निश्चित सीमा से ऊपर होती है तो उन्हें अतिरिक्त चार्ज भी देना पड़ता है। तीन फीसद का शिक्षा उपकर भी लगाया जाता है। वहीं, विदेशी कंपनियों के मामले में यह सीमा 40 से 50 फीसद तक हो जाती है।
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अधिकारी के मुताबिक, सरकार उद्योग-निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात कर रही है। ऐसे में अगर कार्पोरेट टैक्स कम किया जाता है तो इससे उद्योग क्षेत्र में एक बड़ा सकारात्मक संदेश जाएगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।